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India Gold Reserves: भारत की तिजोरी में कितना सोना, बदलते दौर में क्यों है इतना जरूरी?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, January 23, 2026
Last Updated On: Friday, January 23, 2026
India Gold Reserves: वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की आर्थिक रणनीति में सोने की भूमिका लगातार मजबूत होती दिख रही है. बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात, जोखिम और अनिश्चितताओं के बीच स्वर्ण भंडार को लेकर सरकार और रिजर्व बैंक की सोच साफ नजर आती है. यह लेख भारत की तिजोरी में रखे सोने, उसकी अहमियत और इससे जुड़ी रणनीति को सरल भाषा में समझाने की कोशिश करता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, January 23, 2026
India Gold Reserves: आज की दुनिया युद्ध, वैश्विक तनाव, आर्थिक प्रतिबंध और मंदी की आशंकाओं से घिरी हुई है. ऐसे दौर में जब करेंसी और शेयर बाजारों पर भरोसा कमजोर पड़ता है, तब सोना एक बार फिर देशों के लिए सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरा है. भारत भी इस वैश्विक ट्रेंड से अलग नहीं है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI के पास मौजूद सोना न सिर्फ देश की आर्थिक मजबूती दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारत भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए कितनी गंभीर तैयारी कर रहा है.
भारत के पास कुल कितना सोना है?
अगर सीधे आंकड़ों की बात करें, तो भारत के पास इस समय लगभग 880.18 मीट्रिक टन सोना मौजूद है. यह सोना भारत के आधिकारिक स्वर्ण भंडार का हिस्सा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब 113.32 अरब डॉलर बैठती है. भारतीय मुद्रा में देखें तो यह रकम 9.5 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा होती है. इतनी बड़ी कीमत के साथ सोना भारत के खजाने की सबसे कीमती संपत्तियों में गिना जाता है और संकट के समय यह देश के लिए सबसे मजबूत ढाल बन सकता है.
फॉरेक्स रिजर्व में सोने की बढ़ती ताकत
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की भूमिका बीते कुछ सालों में काफी मजबूत हुई है. फिलहाल सोने की हिस्सेदारी भारत के कुल फॉरेक्स रिजर्व का 16.02% हो चुकी है. कुल विदेशी मुद्रा भंडार की कीमत करीब 687 अरब डॉलर के आसपास है. यह आंकड़ा पिछले लगभग दो दशकों में सोने की सबसे ऊंची हिस्सेदारी को दिखाता है. इसका साफ मतलब है कि भारत अब सिर्फ डॉलर पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि अपने भंडार को ज्यादा सुरक्षित और संतुलित बनाना चाहता है.
भारत अपना सोना कहां और कैसे संभालकर रखता है?
भारत ने हाल के वर्षों में अपने सोने को देश के भीतर रखने पर खास जोर दिया है. इस समय लगभग 510 से 575 मीट्रिक टन सोना भारत में ही सुरक्षित रखा गया है. यह सोना मुख्य रूप से मुंबई और नागपुर में स्थित RBI की हाई-सिक्योरिटी तिजोरियों में रखा जाता है. इसके अलावा करीब 290 टन सोना विदेशों में रखा गया है, जो बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स जैसी भरोसेमंद संस्थाओं के पास सुरक्षित है.
घर वापसी: भारत ने क्यों लौटाया अपना सोना?
पिछले तीन सालों में भारत ने लगभग 274 टन सोना विदेशों से वापस मंगाया है. इसके पीछे बड़ी वजहें भू-राजनीतिक जोखिम, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का डर और रणनीतिक संपत्तियों पर सीधा नियंत्रण रखना है. दुनिया के बदलते हालात ने यह साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय संपत्ति जितनी देश के करीब हो, उतना बेहतर होता है. इसी सोच के तहत भारत ने अपने सोने की “घर वापसी” को प्राथमिकता दी.
सोने की खरीद में अचानक ब्रेक क्यों लगा?
जहां एक तरफ सोने की अहमियत बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर 2025 में RBI की सोना खरीदारी में बड़ी गिरावट देखने को मिली. साल 2024 में RBI ने 72.6 टन सोना खरीदा था, लेकिन 2025 में यह आंकड़ा गिरकर सिर्फ 4.02 टन रह गया. यह बीते आठ वर्षों में सबसे कम खरीद मानी जा रही है. जानकारों के मुताबिक, इसकी वजह पहले से मजबूत भंडार, कीमतों में तेजी और संतुलित निवेश रणनीति हो सकती है.
निष्कर्ष: भारत की तिजोरी कितनी सुरक्षित है?
कुल मिलाकर देखें तो भारत का स्वर्ण भंडार देश की आर्थिक मजबूती और दूरदर्शी नीति को दर्शाता है. भले ही हाल के समय में सोने की खरीद कम हुई हो, लेकिन पहले से मौजूद विशाल भंडार भारत को वैश्विक आर्थिक झटकों से बचाने में सक्षम है. बदलते दौर में सोना भारत के लिए सिर्फ धातु नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा की मजबूत चाबी बन चुका है.
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