Gut Health: 5 में से 1 भारतीय गट हेल्थ की समस्या से परेशान

Authored By: स्मिता

Published On: Tuesday, September 16, 2025

Last Updated On: Tuesday, September 16, 2025

Gut Health Mystery highlighting gut health problems in Indians.
Gut Health Mystery highlighting gut health problems in Indians.

शोध और विशेषज्ञ बताते हैं कि हाल के कुछ वर्षों में भारतीय लोगों में आंतों की समस्या बढ़ गई है. जानते हैं इसका कारण और आंतों को स्वस्थ रखने के उपाय.

Authored By: स्मिता

Last Updated On: Tuesday, September 16, 2025

Gut Health Mystery: स्वस्थ आंत स्वस्थ जीवन का आधार है. इस बात का अनुसरण करते हुए भारत की लीडिंग हेल्थकेयर कंपनी एबॉट ने हाल में छह शहरों में ‘एबॉट गट-हेल्थ सर्वे’ किया था. एबॉट ने 3,500 से अधिक व्यक्तियों से स्वास्थ्य समस्या पर बात की. इसके आधार पर यह निष्कर्ष सामने आया कि शहरी भारत में 14% लोग पुरानी कब्ज की समस्या से पीड़ित हैं. अमेरिका की बायोमेडिकल और लाइफ साइंस जर्नल लिटरेचर पबमेड सेन्ट्रल के अनुसार, दुनिया भर में पुरानी कब्ज से 10% से अधिक लोग पीड़ित हैं. भारत में हाल के वर्षों में लोगों में आंतों से जुड़ी समस्या तेजी से बढ़ी है. आधुनिक जीवनशैली, बदलती खानपान की आदतें और बढ़ता तनाव इसके मुख्य कारण हो सकते हैं. गट हेल्थ का सीधा संबंध शारीरिक और मानसिक सेहत से है. सही आहार, व्यायाम और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है.

खानपान की खराब आदतों ने बढ़ाई समस्या

भारत में जब से पारंपरिक खाद्य पदार्थों से हटकर मॉडर्न डाइट खासकर प्रोसेस्ड और फास्ट फूड खाने का चलन बढ़ा है, इसका आंत के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. खानपान की खराब आदतों ने भारत में समस्या बढाई है. एक्स्ट्रा फैट, शुगर और लो फाइबर वाले खाद्य पदार्थ आंत की सेहत पर बुरा प्रभाव डालते हैं. फाइबर और प्रोबायोटिक्स का आहार में पर्याप्त मात्रा में न होना आंत के माइक्रोबायोम (सूक्ष्मजीव समुदाय) को असंतुलित करता है.

तनाव और मानसिक स्वास्थ्य

लंबे समय तक तनाव का आंत की गतिविधि पर सीधा असर पड़ता है. ब्रेन और गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट के बीच कम्युनिकेशन करने वाला “ब्रेन-गट एक्सिस” के अनुसार, मानसिक तनाव से आंतों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है.

  • दवाओं और एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक उपयोग – एंटीबायोटिक्स के ज्यादा उपयोग से आंतों के स्वस्थ बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं, जिससे गट हेल्थ बिगड़ती है.
  • शारीरिक गतिविधि की कमी – इनएक्टिव लाइफस्टाइल आंतों की गति यानी पेरीस्टाल्सिस को धीमा कर देती है, जिससे कब्ज और अन्य पाचन समस्याएं होती हैं.
  • आंत से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं चिंताजनक – गट हेल्थ प्रभावित होने पर कुछ सामान्य और गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं.
    इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, डायरिया, कैंसर, लीकी गट सिंड्रोम जैसे रोग हो सकते हैं.

आंतों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ जरूरी उपाय किए जा सकते हैं

1. कोरियाई माइक्रोबायोम वाकिंग
नेचर जर्नल के अनुसार, कोरियाई सैनिकों पर की गई स्टडी में यह बात सामने आई कि 8 सप्ताह या उससे अधिक समय तक प्रति सप्ताह 30-90 मिनट तक मध्यम से अधिक तीव्रता वाली एक्सरसाइज में भाग लेने से आंत के माइक्रोबायोटा में परिवर्तन होने की संभावना बढ़ जाती है.
2. संतुलित आहार

  • प्रीबायोटिक – अभिनेता रितिक रोशन ने भी माना कि आंतों को स्वस्थ रखने के लिए प्रोबायोटिक्स का सेवन करना चाहिए. प्रीबायोटिक आम तौर पर हाई फाइबर वाले खाद्य पदार्थ होते हैं, जो शरीर में अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देते हैं. वे आंत में सूक्ष्मजीवों के संतुलन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. काजू, बादाम, बार्ली, सेब आदि प्रीबायोटिक हैं.
  • प्रोबायोटिक्स – प्रोबायोटिक्स में जीवित माइक्रो ऑर्गेनिज्म होते हैं, जो शरीर में अच्छे बैक्टीरिया को बनाए रखने या बेहतर बनाने में मदद करते हैं. प्रोबायोटिक्स युक्त कुछ सामान्य फर्मेंटेड खाद्य पदार्थों में दही, केफिर, कोम्बुचा, सोकर कूट, मिसो, टेम्पेह, किमची आदि हैं.
  • गट गमीज : ये प्रो और प्रीबायोटिक हेल्थ सप्लीमेंट्स हैं.
  • ग्लूटेन फ्री डाइट : गेंहूं में ग्लूटेन पाया जाता है. आंतों को स्वस्थ रखने के लिए गेंहूं मुक्त ब्रेड, पिज़्ज़ा बेस और केक खाएं.
  • डाइजेस्टिव एंजाइम : ऐसा प्रोटीन, जो एंजाइम की तरह फ़ूड को ब्रेक डाउन करने में मदद करे.
  • फाइबर युक्त आहार: फाइबर एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है, जो प्राकृतिक रूप से प्लांट बेस्ड फूड्स में पाया जाता है. यह हेल्दी डाइट के लिए जरूरी है. दोनों सोल्युबल और इन सॉल्युबल फाइबर गट हेल्थ को लाभ पहुंचा सकते हैं. साबुत अनाज, दालें, और हरी सब्जियां कब्ज और पाचन समस्याओं से बचाव करती हैं.

3. पर्याप्त हाइड्रेशन और डिटॉक्स वाटर – पानी की पर्याप्त मात्रा आंतों को सक्रिय रखती है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है.
4. व्यायाम – नियमित योग और हल्का व्यायाम जैसे वज्रासन और पवनमुक्तासन पाचन को सुधारते हैं.

5 तनाव प्रबंधन – ध्यान (मेडिटेशन) और प्राणायाम ब्रेन-गट एक्सिस को संतुलित करने में मदद करते हैं.

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About the Author: स्मिता
स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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