सावन भादो के महीने में रखें सेहत का खयाल
Authored By: स्मिता
Published On: Tuesday, July 15, 2025
Updated On: Tuesday, July 15, 2025
मानसून गर्मी से राहत तो दिलाता है, लेकिन अस्थमा, एलर्जी और अन्य सांस के रोग भी अपने साथ लाता है. पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि सावन-भादो में जीवनशैली तंदुरुस्त रखने के साथ-साथ खान-पान भी संयमित करना चाहिए.
Authored By: स्मिता
Updated On: Tuesday, July 15, 2025
Monsoon Health Tips: सावन-भादो के महीने में लगातार बारिश से गर्मी से तो राहत मिल जाती है, लेकिन इस मौसम में स्वास्थ्य संबंधी समस्या भी खूब होने लगती है. लोग ध्यान नहीं देते हैं. स्ट्रीट फ़ूड जमकर खाते हैं. घर पर भी चाट-पकौड़े खूब खाने लगते हैं. नतीजा तबियत खराब होने के रूप में सामने आता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि बारिश के मौसम में हमें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए. हमें न सिर्फ खाने-पीने पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि जीवनशैली भी सक्रिय रखना चाहिए.
क्यों होती है समस्या
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. नीतू भट्ट बताती हैं, ‘बारिश के मौसम में पाचन कमजोर हो जाता है. शरीर के भीतर अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे हमारा पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है. ऐसे में तैलीय भोजन का उपयोग कम करें. हमेशा ताज़ा भोजन खाएं. देर का बना हुआ भोजन नहीं खायें. दही, केला, खीरा, मूली और ठंडी चीज नहीं ले.
बारिश के मौसम में कुछ सावधानी है जरूरी
- बदलते मौसम के अनुरूप दिनचर्या रखे
- तापमान बढ़ने पर रेफ्रीजरेटर के खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करें
- अस्थमा और सीओपीडी वाले मरीज दवा बिल्कुल नहीं छोड़े
- दही, केला, खीरा, मूली और ठंडा चीज का प्रयोग नहीं करें
क्या है अस्थमा और सीओपीडी
अस्थमा एलर्जी के कारण होता है, जो गले के वायु मार्ग में सूजन की वजह से होता है. यह किशोरावस्था में ज्यादा होता है. हालांकि यह किभी भी उम्र में हो सकता है. सांस की नली में सूजन की वजह धूम्रपान और धूल-कण हो सकता है. इसमें मरीज को बीच-बीच में समस्या आती है. यह दवा और परहेज से ठीक हो जाता है. 80 फीसदी को एलर्जिक रायनाइटिस होता है, जिसमें छींक और नाक से पानी आता है. सांस लेने में दिक्कत होती है.
सीओपीडी कॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज है. यह वैसे लोगों में होता है जो धूम्रपान ज्यादा करते हैं. ऐसी महिलाएं जो खाना बनाने में जलावन या कोयला का उपयोग ज्यादा करती है. बंद कमरें में जलावन से खाना बनाने वाली महिलाओं में ज्यादा परेशानी देखी जाती है, इसमें फेफडा प्रभावित होता है. बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है. यह 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में होता है. इसके लक्षण में सांस फूलने की समस्या सालों भर रहती है. बलगम हमेशा आता रहता है. सीबीसी, खून जांच, एक्सरे, स्पायरोमेट्री से इस रोग का पता चलता है.
सांसों की बीमारी में योग के फायदे
अस्थमा और सीओपीडी क्रोनिक बीमारी है. इसमें रोगी को सांस फूलने, दम घुटने और सांस लेने में तकलीफ होती है. इन सभी समस्याओं में योग काफी कारगर साबित होता है. पवनमुक्तासन, सेतुबंधासन, शलभासन भुजंगासन, धनुरासन और अनुलोम विलोम प्राणायाम से काफी राहत मिलती है. बरसात के मौसम में भीगने से एलर्जी की समस्या ज्यादा होती है. होमियोपैथ में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है. ठंड की प्रकृति वाले खाद्य पदार्थ व फल के उपयोग से बचे. योग को इस मौसम में नियमित रूप से अपनी दिनचर्या में शामिल करें.
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