JPNIC पर फिर आमने-सामने अखिलेश और योगी, क्यों अहम है जेपी की विरासत?

Authored By: Nishant Singh

Published On: Wednesday, August 26, 2026

Last Updated On: Wednesday, August 26, 2026

JPNIC पर अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ आमने-सामने, JPNIC News
JPNIC पर अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ आमने-सामने, JPNIC News

लखनऊ का JPNIC एक बार फिर यूपी की सियासत में चर्चा का केंद्र है. योगी सरकार ने इसे 30 साल की लीज पर निजी कंपनियों को देने की मंजूरी दी है. अखिलेश यादव इसे अपनी विकास विरासत से जोड़ते हैं, जबकि बीजेपी इसे पिछली सरकार की अधूरी परियोजना बताती है.

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Last Updated On: Wednesday, August 26, 2026

लखनऊ के गोमती नगर में बना जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर यानी JPNIC एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है. लंबे समय से बंद पड़े इस परिसर को योगी सरकार ने 30 साल के लिए निजी कंपनियों को लीज पर देने की मंजूरी दी है. फैसले के बाद समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है.

30 साल की लीज से क्या होगा?

सरकार के मुताबिक JPNIC को ‘जैसा है, जहां है’ की स्थिति में वृंदावन बॉटलर्स और रॉकवुड होटल्स को सौंपा जाएगा. इसके बदले लखनऊ विकास प्राधिकरण को शुरुआत में सालाना 6 करोड़ रुपये लीज रेंट मिलेगा. इसमें हर वर्ष 5 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. सरकार का अनुमान है कि 30 साल में 800 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व मिल सकता है. साथ ही परिसर में बचे करीब 200 से 250 करोड़ रुपये के काम भी निजी कंपनियां पूरा करेंगी.

अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट की कहानी

JPNIC की शुरुआत अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते 2013 में हुई थी. इसे दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर की तर्ज पर तैयार करने की योजना बनाई गई थी. शुरुआती बजट करीब 265 करोड़ रुपये था, लेकिन परियोजना का दायरा बढ़ने के साथ लागत लगभग 864 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. इसमें कन्वेंशन सेंटर, स्विमिंग पूल, गेस्ट हाउस, म्यूजियम और हेलीपैड जैसी सुविधाएं प्रस्तावित थीं.

2017 में सत्ता परिवर्तन से पहले अखिलेश यादव ने इसका उद्घाटन कर दिया था, लेकिन कई काम अधूरे थे. बीजेपी सरकार बनने के बाद परियोजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू हुई और परिसर लंबे समय तक बंद रहा.

नौ साल से आरोप-प्रत्यारोप

सपा का आरोप है कि सत्ता बदलने के बाद बीजेपी सरकार ने राजनीतिक कारणों से JPNIC को आगे नहीं बढ़ाया. अखिलेश यादव कई बार सरकार से इसे शुरू कराने की मांग कर चुके हैं. दूसरी तरफ बीजेपी का कहना रहा है कि पिछली सरकार ने परियोजना पर जरूरत से ज्यादा खर्च किया और अधूरे निर्माण का उद्घाटन कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की.

जेपी जयंती पर भी हुआ सियासी टकराव

JPNIC का विवाद हर साल 11 अक्टूबर को और गहरा जाता है. जयप्रकाश नारायण की जयंती पर अखिलेश यादव परिसर में लगी उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचते रहे हैं. कई मौकों पर प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर उनका प्रवेश रोकने की कोशिश की. इसके बाद अखिलेश के परिसर में पहुंचने की तस्वीरें भी खूब चर्चा में रहीं.

असली मुद्दा सिर्फ इमारत नहीं

JPNIC पर मौजूदा विवाद को केवल संपत्ति की लीज से जोड़कर देखना अधूरा होगा. जयप्रकाश नारायण की समाजवादी विरासत का उत्तर प्रदेश की राजनीति में खास स्थान है. अखिलेश यादव इसे अपने विकास मॉडल और जेपी की विचारधारा से जोड़ते हैं, जबकि बीजेपी इसे पिछली सरकार की अधूरी परियोजना बताती है.

अब निजी कंपनियों को लीज देने का फैसला दोनों दलों को नया राजनीतिक मुद्दा दे चुका है. सरकार इसे बंद पड़ी संपत्ति को उपयोगी बनाने का रास्ता बता रही है, जबकि सपा इसे निजीकरण से जोड़ रही है. इसलिए JPNIC अब सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि विकास, विरासत और सियासी पहचान की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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