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साल 2025 की 7 बड़ी राजनीतिक घटनाएं, जिन्होंने भारत की राजनीति को झकझोर दिया
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, December 23, 2025
Last Updated On: Tuesday, December 23, 2025
साल 2025 भारतीय राजनीति के लिए उथल-पुथल और बड़े फैसलों का साल रहा. आतंकवाद पर करारा जवाब देने वाले ऑपरेशन सिंदूर से लेकर चौंकाने वाले चुनावी नतीजे, वक्फ कानून, उपराष्ट्रपति का इस्तीफा, वोट-चोरी विवाद और न्यायपालिका से जुड़े सवालों तक- हर घटना ने देश की राजनीति को झकझोर दिया. इन फैसलों का असर आने वाले सालों तक दिखेगा. जानिए कौन-कौन सी 7 बड़ी राजनीतिक घटनाएं रहीं चर्चा में.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, December 23, 2025
India 2025 Politics: साल 2025 भारतीय राजनीति के लिए किसी तूफानी दौर से कम नहीं रहा. यह साल ऐसा रहा, जब सत्ता, विपक्ष, संस्थाएं और समाज सब कुछ सवालों के घेरे में आया. कभी देश एकजुट दिखा, तो कभी तीखी राजनीतिक खींचतान ने माहौल गर्म किया. कई फैसले ऐसे रहे, जिनका असर 2026 तक महसूस किया जाएगा. आइए जानते हैं उन सात बड़ी राजनीतिक घटनाओं के बारे में, जिन्होंने 2025 को यादगार ही नहीं, बल्कि विवादास्पद भी बना दिया.
1. ऑपरेशन सिंदूर: जब देश एक सुर में बोला
2025 की सबसे बड़ी और निर्णायक घटना ऑपरेशन सिंदूर रही. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंक के ठिकानों पर बड़ा एक्शन लिया. 6 और 7 फरवरी की रात हुई इस कार्रवाई में 125 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए. यह उरी और बालाकोट के बाद भारत की तीसरी बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक थी. खास बात यह रही कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, इस मुद्दे पर देश एकजुट नजर आया. बाद में सीजफायर को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे ने नई बहस छेड़ दी, लेकिन भारत सरकार ने किसी भी बाहरी मध्यस्थता से साफ इनकार कर दिया.
2. दुनिया में भारत की बात: डिप्लोमैटिक स्ट्राइक
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी आक्रामक रुख अपनाया. अलग-अलग दलों के सांसदों की टीम बनाकर उन्हें विदेश भेजा गया, ताकि भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखा जा सके. हालांकि, कांग्रेस नेता शशि थरूर का सरकार के पक्ष में खुलकर खड़ा होना उनकी पार्टी को रास नहीं आया. यह घटना दिखाती है कि विदेश नीति के मुद्दे पर राजनीति कितनी जटिल हो चुकी है.
3. दो चुनाव, दो बड़े झटके
2025 में दिल्ली और बिहार दोनों राज्यों के विधानसभा चुनावों ने चौंकाने वाले नतीजे दिए. दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार और बीजेपी की सत्ता में वापसी ने सियासी समीकरण बदल दिए. रेखा गुप्ता के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की हार चर्चा का केंद्र बनी. वहीं बिहार में नीतीश कुमार की वापसी से ज्यादा चौंकाने वाला आरजेडी का सिर्फ 25 सीटों पर सिमटना रहा, जिसने विपक्ष की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए.
4. ट्रंप टैरिफ और विदेश नीति की परीक्षा
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने से विदेश नीति पर बहस तेज हो गई. वजह बताई गई भारत का रूसी तेल आयात. विपक्ष ने इसे मोदी-ट्रंप दोस्ती की विफलता बताया, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर भारत को खास नुकसान नहीं हुआ. उल्टा, साल के अंत तक निर्यात में बढ़ोतरी और रूसी तेल आयात में कमी देखी गई, जिससे सरकार को राहत मिली.
5. वक्फ संशोधन कानून: सुधार या विवाद?
अप्रैल 2025 में लागू हुआ वक्फ (संशोधन) अधिनियम एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना. सरकार ने इसे पारदर्शिता और सुधार की दिशा में कदम बताया, जबकि विपक्ष और कुछ मुस्लिम संगठनों ने विरोध किया. सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हुईं, लेकिन अदालत ने कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. नए प्रावधानों ने वक्फ बोर्ड की शक्तियों और संरचना में बड़ा बदलाव किया.
6. जगदीप धनखड़ का इस्तीफा: अचानक और रहस्यमय
21 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का अचानक इस्तीफा राजनीतिक गलियारों में भूचाल ले आया. स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर दिया गया इस्तीफा लंबे समय तक चर्चा में रहा. विपक्ष ने उनकी गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाए, लेकिन सितंबर में नए उपराष्ट्रपति के कार्यभार संभालते ही मामला शांत हो गया.
7. वोट चोरी और न्यायपालिका पर सवाल
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर बिहार से शुरू हुआ विवाद पूरे देश में फैल गया. राहुल गांधी ने इसे ‘वोट चोरी’ करार देते हुए बड़ा अभियान छेड़ा. इसी साल न्यायपालिका भी कई विवादों में घिरी, कभी सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की घटना, तो कभी हाई कोर्ट के जजों पर लगे गंभीर आरोप. इन घटनाओं ने न्यायिक व्यवस्था की छवि और उसकी निष्पक्षता पर बहस छेड़ दी.
निष्कर्ष
साल 2025 भारतीय राजनीति के लिए परीक्षा का साल रहा. यह साल बताता है कि लोकतंत्र सिर्फ चुनावों से नहीं, बल्कि संस्थाओं की मजबूती, पारदर्शिता और संवाद से चलता है. 2025 की घटनाएं आने वाले वर्षों की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी.
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