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Nav sanvatsar 2025 : 30 मार्च से है शुरू है नवसंवत्सर, इस दिन से करें घिसे-पिटे विचारों का त्याग और नए का स्वागत
Authored By: स्मिता
Published On: Wednesday, March 26, 2025
Last Updated On: Wednesday, March 26, 2025
Nav sanvatsar 2025: हिंदी तारीख से साल का पहला दिन यानी नवसंवत्सर चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को पड़ता है. इस वर्ष यह तिथि 30 मार्च (विक्रम संवत 2082) को है। आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के अनुसार, नवसंवत्सर के अवसर पर हम अपने घिसे-पिटे विचारों का त्याग करने और नए तथा सकारात्मक विचारों को अपनाने का प्रयास अवश्य करें.
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Wednesday, March 26, 2025
Nav sanvatsar 2025 : हिंदू नववर्ष को नव संवत्सर के अलावा, गुड़ी पड़वा और चेटी चांद के नाम से भी जाना जाता है. ग्रेगोरियन यानी अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, 1 जनवरी नए साल के आगमन का प्रतीक है. यह आधुनिक कैलेंडर की पहली तारीख है. हिंदू धर्म में नया साल 1 जनवरी को नहीं, बल्कि हिंदू परंपराओं के अनुसार चैत्र शुक्ल की पहली तारीख को मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार हिंदू नववर्ष यानी चैत्र माह से नवसंवत्सर (Nav sanvatsar 2025) शुरू हो रहा है.
विक्रम संवत 2082 (Vikram Samvat 2082)
जिस तरह ग्रेगोरियन कैलेंडर में 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है, उसी तरह हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष के पहले दिन मनाया जाता है. इस वर्ष यह तिथि 30 मार्च को पड़ रही है. यह विक्रम संवत 2082 (Vikram Samvat 2082) कैलेंडर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है. हिंदू नव वर्ष 30 मार्च 2025 रविवार को शुरू होगा. यह दिन चैत्र नवरात्रि का पहला दिन होता है. पूरे भारत में इस दिन को हिंदू नववर्ष, नव संवत्सर, गुड़ी पड़वा और चेटी चंद जैसे विभिन्न नामों से मनाया जाता है. इस अवसर पर लोग नए साल का स्वागत करने के लिए अनुष्ठान और प्रार्थना करते हैं.
नव संवत्सर और ग्रेगोरियन कैलेंडर के बीच अंतर (Difference between Nav Sanvatsar & Gregorian Calendar)
हिंदू पंचांग के अनुसार नए साल को नव संवत्सर (Nav Sanvatsar) कहा जाता है. यह हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. इसके विपरीत पश्चिमी परंपराएं 1 जनवरी को नए साल के दिन के रूप में चिह्नित करती हैं, जो हर साल एक ही तारीख को मनाया जाता है. नव संवत्सर और अंग्रेजी नव वर्ष न केवल अपनी तिथियों में बल्कि अपने संबंधित वर्षों में भी भिन्न होते हैं. वर्तमान में ग्रेगोरियन कैलेंडर वर्ष को 2025 के रूप में चिह्नित करता है, जबकि हिंदू पंचांग वर्ष को 2082 के रूप में मान्यता देता है. दोनों कैलेंडर के बीच 57 साल का अंतर है, हिंदू कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian Calendar) से 57 साल आगे है.
हिंदू नव वर्ष का इतिहास (Nav Sanvatsar History)
धार्मिक मान्यताओं और ब्रह्मांड पुराण के अनुसार, ब्रह्मांड के पालनहार भगवान विष्णु ने भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का कार्य सौंपा था. ऐसा माना जाता है कि जिस दिन भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना शुरू की थी, वह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा थी. इसलिए इस दिन को हिंदू परंपरा में वर्ष का पहला दिन माना जाता है.
नकारात्मक विचारों का करें त्याग (Give up Negative Thoughts)
नवसंवत्सर, यानी पुराने को खत्म कर नए का सृजन करना. आध्य्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर कहते हैं, ‘ नवसंवत्सर के अवसर पर हम अपनी घिसी-पिटी सोच को खत्म कर दें. ऐसे नकारात्मक विचार जो अपने मेंटल हेल्थ को तो बिगाड़ते ही हैं, दूसरे लोगों का भी मन अशांत कर देते हैं. यदि जीवन में खुशी लाना चाहते हैं, तो अपने नकारात्मक विचारों का त्याग करें और नए विचारों का मन में संचार करें. नया हमेशा सुंदर होता है. इसलिए स्वयं का भी नवीनीकरण करें. स्वयं में सकारात्मक विचारों और ऊर्जा का संचार करें.
स्वयं के नवीनीकरण के लिए क्या करें (Self Renewal)
हमेशा लोगों की अच्छाई पर ध्यान दें। नियमित रूप से लोगों के प्रति आभार (Gratitude) व्यक्त करने की आदत डालें। नियमित रूप से दूसरे लोगों की प्रशंसा भी करें। अपनी सांस पर ध्यान दें। स्वयं में करुणा भाव (Self Improvement) विकसित करें। चुनौतियों से उबरें।
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