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December Vrat-Tyohar 2025: मोक्षदा से वैकुंठ एकादशी तक दिसंबर में कौन-कौन से व्रत और पूजा आने वाले हैं? जानिए पूरी लिस्ट
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, December 5, 2025
Last Updated On: Friday, December 5, 2025
दिसंबर 2025… साल का आखिरी महीना, लेकिन भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का सबसे रोशन अध्याय. इस महीने में व्रत-त्योहारों की ऐसी पवित्र लड़ी सजती है, जो पूरे माह को शुभता और सकारात्मकता से भर देती है. कहीं उपवास की शांति, कहीं पूजा की महिमा और कहीं भक्तिभाव का अद्भुत संगम- दिसंबर भारत की सांस्कृतिक धड़कन को तेज कर देता है। लेख में देखिए इस महीने आने वाली सारी पूजा और व्रत की तिथियाँ.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, December 5, 2025
December Vrat-Tyohar 2025: दिसंबर 2025 आने ही वाला है, और हर साल की तरह इस बार भी यह महीना धार्मिक महत्व, व्रत-उपवास और शुभ त्योहारों से भरपूर रहेगा. साल के अंतिम महीने को हिंदू पंचांग में हमेशा विशेष माना जाता है, क्योंकि इस दौरान कई महत्वपूर्ण एकादशियाँ, पूर्णिमा, अमावस्या और प्रमुख पर्व आते हैं. इस साल की शुरुआत मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती जैसे अत्यंत पावन अवसर से होगी और समापन होगा वैकुंठ एकादशी जैसे महापर्व पर. आइए पूरे महीने की व्रत-त्योहार लिस्ट को सरल भाषा में समझते हैं.
दिसंबर की पवित्र शुरुआत: मोक्ष और धर्म का संदेश
दिसंबर 2025 का पहला ही दिन दो बड़े आध्यात्मिक अवसर लेकर आएगा- मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था. मोक्षदा एकादशी को व्रत करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है और मनुष्य के दुख दूर होते हैं. महीने की शुरुआत ही जब इतनी शुभ हो, तो पूरे माह की ऊर्जा कितनी सकारात्मक होगी, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
शुभ व्रतों की कड़ी: प्रदोष, अन्नपूर्णा जयंती और दत्तात्रेय जयंती
मोक्षदा एकादशी के तुरंत बाद महीने का दूसरा महत्वपूर्ण व्रत आता है- प्रदोष व्रत. यह व्रत मंगलवार के दिन पड़ने के कारण भौम प्रदोष कहलाएगा और भगवान शिव की कृपा प्राप्ति का उत्तम अवसर होगा.
इसके बाद दिसंबर में वह दिन आएगा जिसका इंतज़ार भक्त पूरे साल करते हैं- अन्नपूर्णा जयंती, दत्तात्रेय जयंती और मार्गशीर्ष पूर्णिमा. इस एक ही दिन पर तीन-तीन प्रमुख पर्व पड़ने के कारण पूरा देश आध्यात्मिक रंग में रंग जाता है. इस पूर्णिमा को दान-पुण्य के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है। इसी के बाद शुरू होगा पौष मास, जिसे तप और अनुशासन का महीना माना जाता है.
संकष्टी, एकादशी और संक्रांति का पवित्र काल
महीने के मध्य तक आते-आते कई शुभ तिथियाँ एक के बाद एक दस्तक देती हैं. इनमें प्रमुख है अखुरथ संकष्टी चतुर्थी, जिसे भगवान गणेश के विशेष स्वरूप की पूजा के लिए मनाया जाता है. इसके बाद 15 दिसंबर को आता है सफला एकादशी, जो मनोकामना पूर्ति और शुभ फल देने वाली मानी गई है.
इसी सप्ताह का सबसे बड़ा खगोलीय परिवर्तन है- धनु संक्रांति. सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास की शुरुआत हो जाती है. इस अवधि में शुभ कार्यों को रोक दिया जाता है, लेकिन पूजा-पाठ, जप-तप और आध्यात्मिक साधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है.
शिव आराधना और अमावस्या की तपस्या
संक्रांति के ठीक बाद आता है प्रदोष व्रत, जिसे बुधवार को करने से विशेष फल मिलता है. फिर आती है पौष अमावस्या, जिसे साधना और पितरों के तर्पण का अद्भुत दिन माना जाता है. यह रात आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए बेहद प्रभावशाली मानी जाती है, और इसलिए भक्त इस दिन दीपदान, दान-पुण्य और स्नान-तप को सर्वोत्तम बताते हैं.
गणेश, सिख परंपरा और पुत्रदा एकादशी
अमावस्या के बाद 24 दिसंबर को पड़ने वाली विनायक चतुर्थी भक्तों को गणेश जी की आराधना का अवसर देती है। इसी माह 27 दिसंबर को मनाई जाएगी गुरु गोविंद सिंह जयंती, जो वीरता, धर्मनिष्ठा और सदाचार का पर्व है। सिख पंथ के दसवें गुरु के जन्मदिवस पर देशभर में प्रभात फेरियों और कीर्तन का आयोजन होता है.
इसके बाद 30 दिसंबर को आती है पौष पुत्रदा एकादशी, जिसे विशेष रूप से संतान की उन्नति और परिवार की समृद्धि के लिए किया जाता है. इस व्रत का वर्णन पुराणों में अत्यंत फलदायी बताया गया है.
साल का अंतिम और सबसे बड़ा व्रत – वैकुंठ एकादशी
साल के बिल्कुल अंतिम दिन आता है वह व्रत जिसका इंतज़ार भक्त पूरे वर्ष करते हैं- वैकुंठ एकादशी. इसे “स्वर्ग के द्वार खुलने का दिन” भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान श्रीविष्णु अपने भक्तों के लिए ‘वैकुंठ द्वार’ खोलते हैं. दक्षिण भारतीय मंदिरों में इस दिन विशेष दर्शन का आयोजन होता है और लाखों भक्त प्रभु की कृपा पाने के लिए लाइन लगाते हैं.
दिसंबर 2025 के सभी व्रत-त्योहार
| व्रत-त्योहार | तारीख / विवरण |
|---|---|
| मोक्षदा एकादशी, गीता जयंती | 1 दिसंबर |
| प्रदोष व्रत | 2 दिसंबर |
| अन्नपूर्णा जयंती, दत्तात्रेय जयंती, मार्गशीर्ष पूर्णिमा | 4 दिसंबर |
| पौष मास प्रारंभ | 5 दिसंबर |
| अखुरथ संकष्टी चतुर्थी | 7 दिसंबर |
| सफला एकादशी | 15 दिसंबर |
| धनु संक्रांति, खरमास शुरू | 16 दिसंबर |
| प्रदोष व्रत | 17 दिसंबर |
| पौष अमावस्या | 19 दिसंबर |
| विनायक चतुर्थी | 24 दिसंबर |
| गुरु गोविंद सिंह जयंती | 27 दिसंबर |
| पौष पुत्रदा एकादशी | 30 दिसंबर |
| वैकुंठ एकादशी | 31 दिसंबर |
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