Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज पर कौन से योग का बन रहा संयोग

Authored By: स्मिता

Published On: Tuesday, August 19, 2025

Last Updated On: Tuesday, August 19, 2025

Hartalika Teej 2025 पर शुभ योग और धार्मिक महत्व की जानकारी.
Hartalika Teej 2025 पर शुभ योग और धार्मिक महत्व की जानकारी.

Hartalika Teej 2025 : भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी 26 अगस्त को हरतालिका तीज व्रत मनाया जाएगा. इस बार कई योग लगने से हरतालिका तीज अति विशिष्ट और फलदायी होगी.

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Last Updated On: Tuesday, August 19, 2025

Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज में भगवान शिव, माता गौरी और गणेशजी की पूजा का विशेष महत्व है. पति से मान-सम्मान पाने और बदले में पति की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन का वर ईश्वर से मांगने के लिए हरतालिका तीज मनाई जाती हैं. जानते हैं इस वर्ष कौन-कौन सा योग (Hartalika Teej 2025) लगेगा.

कब है हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2025 Date & Time)

ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल शास्त्री के अनुसार, हरतालिका व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हस्त नक्षत्र में मनाया जाता है. तृतीया तिथि 25 अगस्त, सोमवार को सुबह 11.39 बजे शुरू होगी. यह 26 अगस्त, मंगलवार को रात 12.39 बजे समाप्त होगी. 26 तारीख को पूरे दिन हस्त नक्षत्र रहेगा. 26 तारीख को सूर्योदय के समय तृतीया होने के कारण हरतालिका तीज इसी दिन मनाई जाएगी.

हरतालिका तीज पर कौन सा योग बन रहा है (Hartalika Teej 2025 Yog)

ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल शास्त्री के अनुसार, इस बार हरतालिका तीज के अवसर पर रवि योग, भौम जया सिद्ध योग और लक्ष्मी योग का संयोग बन रहा है. सौभाग्यवती स्त्रियां अपने सौभाग्य की प्राप्ति के लिए और अविवाहित कन्या अपने भावी जीवनसाथी और सुखी वैवाहिक जीवन की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखेंगी.

क्या है पर्व से जुड़ी मान्यता (Hartalika Teej)

  • मान्यता है कि यह व्रत देवी पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए किया था. इस दिन भगवान शिव और पार्वती के विवाह की कथा सुनने का बहुत महत्व है. इस अवसर पर भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाएगी. हरतालिका तीज व्रत प्रदोषकाल में मनाया जाता है. सूर्यास्त के बाद के 3 मुहूर्त को प्रदोषकाल कहते हैं. यह दिन और रात के मिलन का समय होता है.
  • विवाहित महिलाएं शिवालय जाकर देवी पार्वती, शिवजी और गणेश की पूजा करती हैं. जो विवाहित महिलाएं मंदिर नहीं जा सकतीं, वे घर पर ही मिट्टी या रेत की भगवान शिव और देवी पार्वती की मूर्ति बनाकर उनकी पूजा करती हैं.

क्या हैं हरतालिका तीज के अनुष्ठान (Hartalika Teej 2025 Rituals)

इस अवसर पर पूजा स्थल को बेलपत्र, झालर, रंगोली और फूलों से सजाकर देवी पार्वती का श्रृंगार किया जाता है. देवताओं का आह्वान कर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की षोडशोपचार विधि से पूजा की जाती है.

हरतालिका तीज की पौराणिक कथा (Hartalika Teej Mythological Story)

भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने हिमालय में गंगा तट पर बाल्यकाल में कठोर तपस्या की थी. इस दौरान उन्होंने अन्न ग्रहण नहीं किया था. भाद्रपद तृतीया शुक्ल पक्ष के दिन हस्त नक्षत्र में देवी पार्वती ने रेत से शिवलिंग बनाया और भोलेनाथ की स्तुति में लीन होकर रात्रि जागरण किया.

माता की इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके समक्ष प्रकट हुए और उनकी इच्छानुसार उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया. इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है.

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स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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