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Mauni Amavasya 2026 कब है: मौनी अमावस्या सोमवार या रविवार, जानें सही तिथि
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, January 17, 2026
Last Updated On: Saturday, January 17, 2026
Mauni Amavasya 2026 Kab Hai: मौनी अमावस्या हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है, जिसमें मौन व्रत, गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है. यह दिन आत्मशुद्धि, संयम और ईश्वर साधना का प्रतीक है. मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर मौन रहकर की गई भक्ति से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, पितरों की कृपा मिलती है और मोक्ष का मार्ग सरल बनता है. जानें सही तिथि….
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, January 17, 2026
Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में माघ महीने का सबसे पवित्र और आध्यात्मिक दिन माना जाता है. इस दिन मौन व्रत, गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर किए गए स्नान और संयम से व्यक्ति के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की राह आसान होती है. यही कारण है कि हर साल श्रद्धालु इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं. साल 2026 में भी लोगों के मन में यही सवाल है कि मौनी अमावस्या 18 जनवरी को है या 19 जनवरी को और यह रविवार पड़ेगी या सोमवार.
मौनी अमावस्या 2026 की सही तिथि और दिन
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 18 जनवरी 2026 की रात 12 बजकर 03 मिनट से शुरू होगी और 19 जनवरी की रात 01 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी. शास्त्रों में पर्व और व्रत का निर्धारण उदया तिथि के आधार पर किया जाता है. इसी कारण मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी 2026, दिन रविवार को मनाया जाएगा. यानी 2026 में मौनी अमावस्या रविवार के दिन पड़ेगी, न कि सोमवार को.
मौनी अमावस्या का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
मौनी अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मसंयम का पर्व है. शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन मौन व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है. मौन रहकर की गई साधना ईश्वर से सीधे जुड़ने का माध्यम बनती है. मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत धारण कर भगवान की भक्ति करने से अमंगल दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान का महत्व
अमावस्या तिथि को पितरों की तिथि माना जाता है और जब यह माघ महीने में आती है, तो इसका महत्व और बढ़ जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन गंगा सहित पवित्र नदियों का जल अमृत के समान फल देता है. इसी कारण प्रयागराज संगम, हरिद्वार, काशी जैसे तीर्थ स्थलों पर लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं. माना जाता है कि इस दिन स्नान और दान करने से व्यक्ति को तमाम कष्टों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है.
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत के नियम
मौनी अमावस्या के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और भगवान के सामने दिनभर मौन रहने का संकल्प लेना चाहिए. अपने इष्टदेव की पूजा करते समय मंत्रों का जप मन ही मन करें, मुख से उच्चारण न करें. दिनभर यथासंभव मौन रखें और अपना चित्त ईश्वर की भक्ति में लगाएं. इस दिन केवल बोलने का ही नहीं, बल्कि मन का भी मौन रखना जरूरी माना गया है. नकारात्मक विचारों से बचें और मन को शांत रखें.
मौन व्रत के दौरान क्या करें
मौन व्रत के समय भजन सुनना, धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना, संतों के प्रवचन सुनना अत्यंत फलदायी माना गया है. श्रद्धालु मंदिरों में जाकर दर्शन-पूजन भी कर सकते हैं. इस दिन संयम और शांति का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि मौन व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके.
मौनी अमावस्या का खास दान और पुण्य फल
मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद दान का विशेष महत्व है. शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन जरूरतमंदों को किया गया दान सौ यज्ञों के बराबर पुण्य देता है. अन्न, वस्त्र और दैनिक उपयोग की वस्तुओं का दान करना श्रेष्ठ माना जाता है. साथ ही पशु-पक्षियों को चारा और दाना डालने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है.
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