Mokshada Ekadashi 2024: जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाती है मोक्षदा एकादशी

Authored By: स्मिता

Published On: Tuesday, December 10, 2024

Last Updated On: Tuesday, December 10, 2024

mokshda ekadasi significance
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माना जाता है कि भगवान विष्णु की पूजा करने वाले भक्तों को शांति, समृद्धि और जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। भगवान उनकी आध्यात्मिक इच्छाओं को पूर्ण करते हैं। यह एकादशी विशेष रूप से मोक्ष प्राप्त करने का अंतिम लक्ष्य रखती है।

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मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है। इस वर्ष यह शुभ तिथि 11 दिसंबर 2024 को है। भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi 2024)। इस अवसर पर भक्तगण पूजा-उपासना और व्रत- उपवास रखते हैं। श्री हरि के सहस्त्रनाम दिन भर भजते हैं। श्रीविष्णु का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिरों में भी जाते हैं।

मोक्षदा एकादशी 2024: तिथि और समय ( Mokshada Ekadashi 2024 Date & Time)

पूरे वर्ष में 24 एकादशी मनाई जाती है। एकादशी तिथि महीने में दो बार शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों में आती है। इस बार मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष के दौरान मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 11 दिसंबर को सुबह 03:42 मिनट से शुरू हो जाएगी। एकादशी तिथि 12 दिसंबर को सुबह 01:09 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसके बाद 12 दिसंबर को सुबह 07:04 बजे से शुरू हो जाएगा। जैसा कि नाम से पता चलता है, मोक्षदा एकादशी मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। यह भक्तों को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाती है।

वैकुंठ धाम में मिलता है स्थान (Vaikuntha Dham)

एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत शुभ होता है। भगवान विष्णु की पूजा करने वाले भक्तों को शांति, समृद्धि और जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। भगवान उनकी आध्यात्मिक इच्छाओं को पूर्ण करते हैं। यह एकादशी विशेष रूप से मोक्ष प्राप्त करने का अंतिम लक्ष्य रखती है। माना जाता है कि जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं, उनके पाप धुल जाते हैं और उन्हें भगवान विष्णु के शाश्वत निवास, वैकुंठ धाम में स्थान मिलता है।

मोक्षदा एकादशी पर क्या करें (Mokshada Ekadashi Rituals)

मोक्षदा एकादशी के अवसर पर भक्तगण को सुबह जल्दी उठना चाहिए। उन्हें पवित्र स्नान भी करना चाहिए। भक्तगण अपने घर और पूजा कक्ष को साफ करें। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण और लड्डू गोपाल जी की मूर्ति रखें और उन्हें स्नान कराएं। मूर्ति नहीं होने पर काष्ठ पर भगवान विष्णु की तस्वीर और श्री यंत्र रखा जा सकता है।

मूर्ति के सामने देसी घी का दीपक जलाएं और तुलसी के पत्ते चढ़ाएं। माला, मिठाई, फल और पान, लौंग, इलायची और सुपारी जैसी पूजन सामग्री चढाएं। भगवान विष्णु से जुड़े मंत्रों का जाप करके उनकी उपस्थिति का आह्वान करें। विष्णु सहस्रनाम और श्री हरि स्तोत्र का पाठ करें। शाम को फिर से भगवान विष्णु की पूजा करें और उनकी कथा सुनें और सुनाएं। भगवान विष्णु की आरती करें और उनका आशीर्वाद लें।

कैसे करें पारण (Mokshada Ekadashi Paran)

भक्तगण दिन भर “ओम नमो भगवते वासुदेवाय..” मंत्र जाप कर सकते हैं।
व्रती फलों के साथ अपना व्रत तोड़ सकते हैं और ताजा जूस या नारियल पानी जैसे स्वस्थ पेय का सेवन कर सकते हैं। जो लोग सख्त उपवास नहीं कर सकते हैं, वे उपवास के अनुकूल भोजन ले सकते हैं। अगले दिन द्वादशी तिथि को पारण कर उपवास तोड़ा जा सकता है।

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About the Author: स्मिता
स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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