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Onam 2026: केरल में शुरू हुई ओणम की तैयारियां, जानें तारीख, कथा और परंपराएं
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, August 20, 2026
Last Updated On: Thursday, August 20, 2026
Onam 2026: ओणम 2026 की तैयारियां केरल में जोर-शोर से शुरू हो गई हैं. दस दिवसीय यह फसल पर्व 16 अगस्त के अथम से शुरू होकर 26 अगस्त को तिरुवोनम पर मुख्य रूप से मनाया जाएगा. राजा महाबली की कथा से जुड़ा यह उत्सव पुक्कलम, ओणम सध्या, वल्लम कली और पुलिकली जैसी परंपराओं से सजा है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, August 20, 2026
Onam 2026: दक्षिण भारत, खासकर केरल का सबसे बड़ा और रंगारंग त्यौहार ‘ओणम’ इस साल भी अपनी पूरी रौनक के साथ नजदीक आ रहा है. मलयालम पंचांग के चिंगम महीने में मनाया जाने वाला यह दस दिवसीय फसल पर्व समृद्धि, भाईचारे और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. आइए जानते हैं इस साल की मुख्य तारीखें, इससे जुड़ी पौराणिक कथा और उत्सव की परंपराएं.
ओणम 2026 की तारीखें
ओणम की शुरुआत ‘अथम’ से होती है और समापन मुख्य दिन ‘तिरुवोनम’ पर होता है.
- अथम (ओणम की शुरुआत): 16 अगस्त 2026, रविवार
- उथरादम (पहला ओणम): 25 अगस्त 2026, मंगलवार
- तिरुवोनम (मुख्य ओणम): 26 अगस्त 2026, बुधवार
- तीसरा और चौथा ओणम: 27 और 28 अगस्त 2026
केरल में 25 से 28 अगस्त तक ओणम के चलते सार्वजनिक अवकाश रहेगा.
ओणम मनाने के पीछे की कथा
ओणम सिर्फ फसल उत्सव भर नहीं है, बल्कि इसका गहरा नाता भगवान विष्णु के वामन अवतार और दानवीर राजा महाबली की कथा से है.
- मान्यता है कि राजा महाबली का शासन केरल के लिए स्वर्ण युग जैसा था, लेकिन उनके बढ़ते प्रभाव से चिंतित देवताओं के आग्रह पर भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण किया.
- वामन देव ने महाबली से तीन पग भूमि मांगी, दो पग में स्वर्ग-पृथ्वी नाप ली, और तीसरे पग के लिए महाबली ने स्वयं अपना सिर आगे कर दिया.
- प्रसन्न होकर विष्णु ने महाबली को पाताल भेजा, लेकिन साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने का वरदान भी दिया. कहा जाता है कि हर ओणम पर महाबली धरती पर लौटकर प्रजा का हाल जानने आते हैं.
- मुख्य दिन तिरुवोनम को भगवान विष्णु के वामन रूप की जयंती के तौर पर भी मनाया जाता है, जब घरों में मिट्टी से बने ‘ओनाथप्पन’ यानी वामन-महाबली के प्रतीक की स्थापना कर पूजा की जाती है.
दस दिनों तक कैसे मनाया जाता है उत्सव
ओणम के दौरान केरल की संस्कृति अपने सबसे रंगीन रूप में नजर आती है.
- पुक्कलम: पहले दिन से घरों के आंगन में ताजे फूलों की रंगोली सजाई जाती है, जो हर दिन आकार में बड़ी होती जाती है.
- ओणम सध्या: मुख्य दिन केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला पारंपरिक भोज, जिसमें अवियल, सांभर और पायसम समेत 26 से ज्यादा शाकाहारी व्यंजन शामिल होते हैं.
- वल्लम कली: पंपा नदी पर होने वाली प्रसिद्ध स्नेक बोट रेस, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है.
- पुलिकली: त्रिशूर में कलाकार शरीर पर बाघ जैसी पेंटिंग बनाकर पारंपरिक नृत्य पेश करते हैं.
इन सबके साथ ओणम एक बार फिर केरल की सांस्कृतिक विरासत, सामूहिकता और उत्सव की भावना को जीवंत कर देगा.
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