क्या है ‘सिम बाइंडिंग’ नियम जिसके तहत बिना सिम कार्ड बंद हो सकते हैं Whatsapp और Telegram?

Authored By: Ranjan Gupta

Published On: Wednesday, December 3, 2025

Updated On: Wednesday, December 3, 2025

SIM Binding नियम के तहत बिना रजिस्टर्ड सिम पर WhatsApp और Telegram जैसे ऐप बंद हो सकते हैं - जानें पूरा नियम.

भारत सरकार ने साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सभी प्रमुख मैसेजिंग ऐप्स के लिए ‘सिम बाइंडिंग’ नियम अनिवार्य कर दिया है. नए नियम के तहत अब कोई भी मैसेजिंग ऐप केवल उसी डिवाइस में चलेगा, जिसमें वह रजिस्टर्ड सिम मौजूद होगी. सिम हटते ही ऐप अपने आप लॉग आउट हो जाएगा. 90 दिनों के भीतर यह नियम देशभर में लागू हो जाएगा और ऐप्स को हर छह घंटे में सिम की मौजूदगी की ऑटो-चेकिंग करनी होगी. सरकार का दावा है कि इससे सीमा पार से होने वाले डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम पर बड़ी रोक लगेगी.

Authored By: Ranjan Gupta

Updated On: Wednesday, December 3, 2025

SIM Binding: भारत में बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड को देखते हुए केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती बढ़ानी शुरू कर दी है. इसी के तहत व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट और अन्य सभी मैसेजिंग ऐप्स के लिए ‘सिम बाइंडिंग’ नियम लागू कर दिया गया है. यह बदलाव आम यूज़र्स के लिए बेहद अहम है, क्योंकि अब आप जिस सिम से किसी ऐप में लॉग इन करेंगे, ऐप केवल उसी डिवाइस में चलेगा. सिम हटते ही ऐप खुद-ब-खुद लॉग आउट हो जाएगा और दोबारा इस्तेमाल के लिए सिम का होना अनिवार्य होगा. वहीं, 90 दिन के बाद ऐप खुद-ब-खुद हर 6 घंटे में ऑटोमैटिक लॉग इन करेंगे, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सिम अभी भी डिवाइस में मौजूद है.

सरकार ने दूरसंचार विभाग (DoT) के जरिए स्पष्ट किया है कि 90 दिनों के भीतर यह नियम पूरे देश में लागू हो जाएगा. इसके बाद हर ऐप को अपने यूज़र्स के डिवाइस में सिम की मौजूदगी को हर छह घंटे में ऑटोमैटिक तरीके से चेक करना होगा. सरकार का मानना है कि यह कदम सीमापार से हो रहे डिजिटल फ्रॉड, फेक अकाउंट, स्कैम कॉल और साइबर ठगी जैसे मामलों को रोकने में बड़ी भूमिका निभाएगा. 2024 में साइबर अपराध से देश को 22,800 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. ऐसे में यह नियम डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में

दूरसंचार विभाग ने दी नई चेतावनी

दूरसंचार विभाग ने मैसेजिंग ऐप चलाने वाली सभी कंपनियों को सख्त आदेश जारी किए हैं. विभाग ने साफ कहा है कि सभी कंपनियों को नए दिशानिर्देशों का पालन करना ही होगा. इसके साथ कंपनियों को अगले 120 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट जमा करनी होगी. विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कोई कंपनी नियमों का पालन नहीं करती है, तो उसके खिलाफ दूरसंचार अधिनियम 2023, साइबर सुरक्षा नियमों और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी. यानी नियम तोड़े, तो सीधी कानूनी कार्रवाई तय है.

कौन-कौन से ऐप्स आएंगे नियमों की जद में?

सरकार का यह आदेश भारत में चल रहे सभी मैसेजिंग ऐप पर लागू होगा. इसमें व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे बड़े ऐप भी शामिल हैं. इसके अलावा अराटाई, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट और जोश जैसे ऐप्स को भी सिम बाइंडिंग नियम मानना होगा. मतलब, चाहे ऐप छोटा हो या बड़ा, सभी को एक ही नियम का पालन करना है.

सिम बाइंडिंग नियम क्या कहता है?

सिम बाइंडिंग का मतलब है कि जिस सिम कार्ड से आपने ऐप में रजिस्ट्रेशन किया है, वही सिम उसी फोन में रहना चाहिए. ऐप उसी डिवाइस पर खुलेगा, जिसमें वह सिम लगी हुई है. अगर आप वह सिम निकाल देते हैं, तो कुछ समय बाद ऐप खुद लॉग आउट हो जाएगा. यानी ऐप को दूसरी डिवाइस में खोलना या बिना सिम के इस्तेमाल करना संभव नहीं रहेगा. यह सुरक्षा के लिए किया गया एक तकनीकी लॉक है.

सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?

सरकार का दावा है कि सिम बाइंडिंग से साइबर अपराध को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी. खासकर सीमा पार बैठकर होने वाले डिजिटल फ्रॉड पर इससे काबू पाया जा सकेगा. आंकड़े बताते हैं कि साल 2024 में साइबर धोखाधड़ी की वजह से देश को 22,800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. यह बेहद चौंकाने वाला आंकड़ा है.

कई साइबर अपराधी मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों को फंसाते हैं और पैसों की ठगी करते हैं. वे अपनी पहचान छिपाकर दूसरे देशों से भी धोखाधड़ी कर लेते हैं. ऐसे मामलों में सिम बाइंडिंग बड़ा सुरक्षा कवच बन सकती है. इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपका ऐप प्रोफाइल सिर्फ उसी डिवाइस में खुले, जिसमें आपकी सिम लगी हो. कोई भी व्यक्ति आपकी प्रोफाइल को अपने फोन में खोल नहीं सकेगा. इससे डिजिटल अपराधियों की चालें काफी हद तक धीमी पड़ सकती हैं.

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About the Author: Ranjan Gupta
रंजन कुमार गुप्ता डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें डिजिटल न्यूज चैनल में तीन वर्ष से अधिक का अनुभव प्राप्त है. वे कंटेंट राइटिंग, गहन रिसर्च और SEO ऑप्टिमाइजेशन में माहिर हैं. शब्दों से असर डालना उनकी कला है और कंटेंट को गूगल पर रैंक कराना उनका जुनून! वो न केवल पाठकों के लिए उपयोगी और रोचक लेख तैयार करते हैं, बल्कि गूगल के एल्गोरिदम को भी ध्यान में रखते हुए SEO-बेस्ड कंटेंट तैयार करते हैं. रंजन का मानना है कि "हर जानकारी अगर सही रूप में दी जाए, तो वह लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है." यही सोच उन्हें हर लेख में निखरने का अवसर देती है.
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