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बांग्लादेश की सियासत एक बार फिर चौराहे पर, यूनुस की कुर्सी, बीएनपी की बढ़त और जमात की चुनौती, चौंकाने वाला सर्वे
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, February 10, 2026
Last Updated On: Tuesday, February 10, 2026
Bangladesh Election 2026 Shocking Survey: बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमा गया है. आवामी लीग पर बैन के बाद मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सिमट गया है. सर्वे में बीएनपी को बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि मोहम्मद यूनुस जनमत संग्रह और 84-सूत्रीय सुधार एजेंडे के जरिए देश को नई दिशा देने की कोशिश में हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, February 10, 2026
Bangladesh Election 2026 Shocking Survey: बांग्लादेश एक बार फिर बड़े राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है. आम चुनाव से पहले देश का माहौल बेहद गर्म और तनावपूर्ण हो चुका है. सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बार हो रहे इस चुनाव में न केवल सरकार चुनने की होड़ है, बल्कि यह भी तय होना है कि देश की आगे की दिशा क्या होगी. अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार देश चला रही है. अब सवाल है कि क्या यूनुस की कुर्सी जाएगी या फिर उनकी भूमिका किसी नए रूप में जारी रहेगी?
आवामी लीग पर बैन और बदले समीकरण
शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लगने के बाद बांग्लादेश की राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है. दशकों तक सत्ता में रही पार्टी के बाहर होते ही राजनीतिक मैदान विपक्षी दलों के हाथ में चला गया. इस फैसले ने न केवल आंतरिक राजनीति को प्रभावित किया, बल्कि भारत-बांग्लादेश रिश्तों को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है. आवामी लीग के बिना चुनाव होना अपने आप में ऐतिहासिक माना जा रहा है.
बीएनपी बनाम जमात: असली मुकाबला
इस बार चुनाव का असली संघर्ष बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के बीच माना जा रहा है. बीएनपी की कमान पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के हाथ में है, जबकि जमात का नेतृत्व शफीकुर्रहमान कर रहे हैं. जमात लंबे समय से कट्टरपंथी और भारत-विरोधी राजनीति के लिए जानी जाती है, वहीं बीएनपी भी भारत के प्रति नरम रुख के लिए मशहूर नहीं रही है. ऐसे में चुनाव का असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है.
चौंकाने वाला सर्वे और बीएनपी की बढ़त
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रथोम आलो द्वारा कराए गए सर्वे ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. सर्वे के मुताबिक बीएनपी को 200 से अधिक सीटें मिलने का अनुमान है, जो उसे पूर्ण बहुमत के बेहद करीब पहुंचा सकता है. अगर यह अनुमान सच साबित होता है, तो लंबे समय बाद ब्रिटेन से लौटे तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं. यह बदलाव देश की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ सकता है.
कमजोर जमात, लेकिन प्रभावी विपक्ष
सर्वे यह भी संकेत देता है कि जमात-ए-इस्लामी को करीब 50 सीटें मिल सकती हैं. हालांकि यह संख्या सरकार बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन संसद में एक मजबूत विपक्ष के रूप में जमात की भूमिका अहम हो सकती है. खासकर अल्पसंख्यक मुद्दों और विदेश नीति पर उसकी सख्त लाइन आने वाले समय में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है.
संसद की सीटों का पूरा गणित
बांग्लादेश की संसद में कुल 350 सीटें हैं. इनमें से 300 सीटों पर जनता सीधे मतदान करती है, जबकि 50 सीटें अप्रत्यक्ष रूप से चुनी जाती हैं. सर्वे के अनुसार बांग्लादेश जातीय पार्टी को केवल 3 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि बाकी सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में जा सकती हैं. सांसदों का कार्यकाल भारत की तरह ही पांच साल का होता है.
यूनुस का दांव: चुनाव के साथ जनमत संग्रह
अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने इस चुनाव को सिर्फ सत्ता चयन तक सीमित नहीं रखा है. उन्होंने 12 फरवरी को चुनाव के साथ-साथ जनमत संग्रह को भी बेहद अहम बताया है. यूनुस देशवासियों से अपील कर रहे हैं कि वे जनमत संग्रह में ‘हां’ में वोट देकर उनके सुधार एजेंडे का समर्थन करें.
84-सूत्रीय सुधार पैकेज और भविष्य की राह
यूनुस प्रशासन पिछले कई हफ्तों से 84-सूत्रीय सुधार पैकेज को लेकर अभियान चला रहा है. यूनुस का दावा है कि अगर जनता का समर्थन मिला तो इससे कुशासन पर लगाम लगेगी और बांग्लादेश एक नई, सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगा. अब देखना यह है कि जनता किसे चुनती है- पुरानी राजनीति या सुधारों का नया रास्ता.
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