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महंगाई की आग में झुलसता ईरान: क्या ईरान आर्थिक संकट से राजनीतिक विस्फोट की ओर बढ़ रहा है?
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Friday, January 2, 2026
Last Updated On: Friday, January 2, 2026
ईरान में जारी यह आंदोलन कोई पहला नहीं है. हाल के वर्षों में महंगाई, सूखा, महिलाओं के अधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन हो रहे हैं. इनको अक्सर कठोर दमन और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों के जरिए दबाया गया है. मौजूदा हालात में सवाल यही है कि क्या सरकार सिर्फ बल प्रयोग से इस आंदोलन को थाम पाएगी? या आर्थिक संकट को जड़ से खत्म करना होगा.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Friday, January 2, 2026
Iran Inflation Crisis: ईरान एक बार फिर उबाल पर है. बिगड़ती अर्थव्यवस्था, गिरती मुद्रा और आसमान छूती महंगाई के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब खुले टकराव में बदलते दिख रहे हैं. पिछले तीन वर्षों में यह इस्लामिक गणराज्य का सबसे व्यापक और उग्र जनआंदोलन है. इस आंदोलन में अब तक कई प्रांत हिंसा की चपेट में आ चुके हैं. साथ ही अलग-अलग प्रांतों से कई लोगों की मौत की खबरें भी सामने आ रही हैं.
- हालांकि किसी ने अभी तक मौत की आधिकारिक संख्या नहीं बताया है.
लोरेस्तान से इस्फ़हान तक अशांति
अर्ध-सरकारी फ़ार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, पश्चिमी प्रांत लोरेस्तान में गुरुवार (एक जनवरी) को हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस स्टेशन पर धावा बोल दिया. इस समाचार एजेंसी ने दावा किया है कि झड़प के दौरान तीन प्रदर्शनकारी मारे गए. 17 लोग घायल हुए हैं. फ़ार्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस मुख्यालय में घुसकर सुरक्षाबलों से भिड़ंत की और कई पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया.
इस घटना से पहले चारमहल और बख्तियारी प्रांत के लोरदेगान शहर में भी मौतों की सूचना मिली थी. मानवाधिकार समूह हेंगाओ का कहना है कि इन दोनों प्रांतों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी मारे गए. और कई घायल भी हुए हैं. सरकारी मीडिया इस पर ज्यादा जानकारी नहीं दे रही है. वह सीमित जानकारी ही साझा कर रही है.
मौतों पर विरोधाभासी दावे
पश्चिमी शहर कुहदाश्त में एक मौत की आधिकारिक पुष्टि की गई है. इस आंकड़ें पर भी मतभेद है. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उनकी संबद्ध बासिज स्वयंसेवी अर्धसैनिक इकाई का एक सदस्य अशांति के दौरान मारा गया. वहीं 13 अन्य घायल हुए हैं. वहीं हेंगाओ का आरोप है कि जिस व्यक्ति को गार्ड्स ने अपना सदस्य बताया है, वह वास्तव में प्रदर्शन में शामिल था. सुरक्षा बलों की गोली से ही उसकी जान गई है.
मानवाधिकार समूह ने यह भी दावा किया है कि मध्य ईरान के इस्फ़हान प्रांत में साल के अंतिम दिन एक प्रदर्शनकारी को गोली मार दी गई थी. दक्षिणी फ़ार्स प्रांत के मरवदश्त, साथ ही केरमंशाह, खुज़ेस्तान और हमदान में भी विरोध प्रदर्शनों और गिरफ्तारियों की खबरें आ रही हैं.
कैसे भड़का आंदोलन
इस ताजा उथल-पुथल की शुरुआत 28 दिसंबर को हुई. तब दुकानदारों और व्यापारियों ने सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई थी. ईरानी रियाल की तेज गिरावट, रोज़मर्रा की चीज़ों की बढ़ती कीमतें और आम लोगों की क्रयशक्ति में आई भारी गिरावट ने गुस्से को सड़कों पर ला दिया. देखते ही देखते यह आंदोलन विश्वविद्यालयों, बाज़ारों और औद्योगिक इलाकों तक फैल गया.
कई शहरों में बड़े बाज़ार बंद कर दिए गए हैं. छात्रों ने भी प्रदर्शन तेज कर दिए हैं. हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने ठंड का हवाला देते हुए देश के अधिकांश हिस्सों में छुट्टी घोषित कर दी. सरकार की यह घोषणा विरोध को रोकने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
- पिछले तीन वर्षों से यह इस्लामिक गणराज्य उग्र जनआंदोलन झेल रहा है.
- हाल के आंदोलन में अब तक कई मौतें होने की खबर है.
- आर्थिक मुश्किलों और गिरती मुद्रा को लेकर यह आंदोलन शुरू हुआ है.
- वर्तमान आंदोलन लोरेस्तान से इस्फ़हान तक फैल गया है.
सत्ता के लिए नाजुक घड़ी
ईरान की मौलवी सत्ता ऐसे समय में इस संकट से जूझ रही है, जब देश पहले ही पश्चिमी प्रतिबंधों से दबा हुआ है. 40 प्रतिशत से अधिक मुद्रास्फीति ने आम जनता की कमर तोड़ दी है. ऊपर से जून में इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु, बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों और सैन्य नेतृत्व पर किए गए हवाई हमलों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं.
इन क्षेत्रीय तनावों के कारण इज़राइल के साथ हुआ 12 दिनों का हवाई संघर्ष भी ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ा. नतीजा यह हुआ कि 2025 में ईरानी रियाल ने डॉलर के मुकाबले लगभग आधे से ज्यादा गिर गया. दिसंबर में आधिकारिक मुद्रास्फीति 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई.
सरकार की दोहरी रणनीति
तेहरान ने एक ओर सख्त सुरक्षा कार्रवाई तेज की है, तो दूसरी ओर बातचीत का संकेत भी दिया है. सरकारी प्रवक्ता फातिमा मोहजरानी ने कहा है कि अधिकारी ट्रेड यूनियनों और व्यापारियों के प्रतिनिधियों से सीधी बातचीत करेंगे. हालांकि इस बातचीत के स्वरूप और समयसीमा पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है.
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और बासिज ने प्रदर्शनकारियों पर विरोध प्रदर्शनों के माहौल का लाभ उठाने का आरोप लगाया है. बासिज ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के प्रति वफादार माना जाता है. पहले भी कई आंदोलनों को कुचलने में खामनेई अहम भूमिका निभा चुके हैं.
फिलहाल, ईरान की सड़कों पर पसरा तनाव साफ संकेत दे रहा है कि यह महज़ एक अस्थायी विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था के लिए एक गहरी चेतावनी है.
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