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पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच 31 अगस्त को होगी मुलाकात
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Thursday, August 28, 2025
Last Updated On: Thursday, August 28, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 31 अगस्त को तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात करेंगे. गलवान घाटी विवाद के बाद यह पहली बार है जब पीएम मोदी चीन की यात्रा कर रहे हैं. इस द्विपक्षीय बैठक को भारत-चीन संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Thursday, August 28, 2025
PM Modi Xi Jinping Meeting 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 31 अगस्त को तियानजिन में होने वाली मुलाकात पर दुनिया की नज़रें टिकी हैं. शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के अवसर पर होने वाली यह द्विपक्षीय बैठक दोनों देशों के रिश्तों में अहम पड़ाव साबित हो सकती है. खास बात यह है कि जून 2020 में गलवान घाटी में एलएसी पर हुए तनाव के बाद यह पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी.
कजान (रूस) में पिछले साल हुई मुलाकात के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में सकारात्मक प्रगति देखी गई है, जिसमें सीमा विवाद पर समझौता और कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली शामिल है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बैठक न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करेगी बल्कि क्षेत्रीय शांति और वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण होगी.
तियानजिन यात्रा से भारत-चीन रिश्ते सुधरेंगे ?
21 अगस्त को भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तियानजिन यात्रा भारत-चीन रिश्तों में नई ऊर्जा लाएगी और आपसी विकास को बढ़ावा देगी. नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा केवल एससीओ के लिए ही नहीं बल्कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी बेहद अहम है.
भारत और चीन का संयुक्त कार्यदल इस यात्रा को सफल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. हमें विश्वास है कि यह दौरा बेहद सार्थक और सफल रहेगा.”
चीनी विदेश मंत्री की पीएम मोदी से मुलाकात
इससे पहले, 19 अगस्त को चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग का संदेश और 31 अगस्त से शुरू होने वाले दो दिवसीय एससीओ शिखर सम्मेलन का औपचारिक निमंत्रण सौंपा था.
मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था, “विदेश मंत्री वांग यी से मिलकर खुशी हुई. पिछले वर्ष कजान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मेरी बातचीत के बाद से भारत-चीन संबंध आपसी सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर आगे बढ़े हैं. मैं एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान तियानजिन में होने वाली अगली मुलाकात को लेकर उत्साहित हूं. भारत और चीन के बीच स्थिर और भरोसेमंद रिश्ते क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व समृद्धि के लिए अहम भूमिका निभाएंगे.”
सीमा पर शांति और स्थिरता बनाने पर जोर
- बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया. साथ ही उन्होंने सीमा विवाद का न्यायपूर्ण, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान निकालने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई.
- प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई पिछली मुलाकात का जिक्र करते हुए आपसी सम्मान और हितों के आधार पर रिश्तों में सकारात्मक प्रगति का स्वागत किया. बयान में यह भी बताया गया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती का एक अहम कदम है.
राष्ट्रपति शी से मुलाकात अहम
पीएमओ ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शी द्वारा भेजे गए निमंत्रण को स्वीकार करते हुए धन्यवाद दिया और चीन की एससीओ अध्यक्षता का समर्थन जताया. उन्होंने कहा कि वह तियानजिन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए उत्सुक हैं. प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत और चीन के बीच स्थिर और रचनात्मक संबंध न केवल क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया की शांति और समृद्धि के लिए आवश्यक हैं.
गौरतलब है कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को शंघाई में हुई थी. इस संगठन के सदस्य देशों में चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं.
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