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रूस-यूक्रेन शांति समझौता: अब दावोस की मेज पर यूक्रेन की किस्मत
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Saturday, January 17, 2026
Last Updated On: Saturday, January 17, 2026
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने संकेत दिया है कि यूक्रेन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका रवाना हो रहा है. यूक्रेनी अधिकारी वहां, युद्ध के बाद की रिकवरी और भविष्य की सुरक्षा गारंटी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के साथ अहम बातचीत करेंगे.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Saturday, January 17, 2026
Russia-Ukraine Peace Agreement: कीव से लेकर वॉशिंगटन और दावोस तक, यूक्रेन की कूटनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने संकेत दिया है कि यूक्रेन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका रवाना हो रहा है. यूक्रेनी अधिकारी वहां, युद्ध के बाद की रिकवरी और भविष्य की सुरक्षा गारंटी को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के साथ अहम बातचीत करेंगे.
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को उम्मीद है कि उनके यहां समझौतों के लिए तैयार दस्तावेजों पर अगले हफ्ते स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान हस्ताक्षर हो सकते हैं.
चेक गणराज्य के राष्ट्रपति पेट्र पावेल के साथ कीव में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज़ेलेंस्की ने साफ कहा कि यह दौरा सिर्फ आर्थिक मदद के लिए नहीं है. इसका एक बड़ा मकसद रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका समर्थित कूटनीतिक प्रयासों पर मॉस्को की असली मंशा को समझना भी है.
अमेरिका से सहमति पर एकराय नहीं
ज़ेलेंस्की ने वाशिंगटन के साथ रिश्तों को लेकर सकारात्मक लहजा अपनाया है. उनका स्पष्ट कहना था कि हमने अमेरिकी पक्ष के साथ अच्छा काम किया है. फिर भी कुछ मुद्दों पर हमारी सोच पूरी तरह मेल नहीं खाती.
जेलेंस्की का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुले तौर पर कह चुके हैं कि वे दावोस में ज़ेलेंस्की से मिल सकते हैं. यह मुलाक़ात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि ट्रंप कई मौकों पर ज़ेलेंस्की की आलोचना कर चुके हैं. हाल में ट्रंप ने यूक्रेनी नेतृत्व पर शांति प्रक्रिया में बाधा डालने का भी आरोप लगाया है.
‘समृद्धि पैकेज’: युद्ध के बाद यूक्रेन की नई लड़ाई
यूक्रेन ने जिन दस्तावेजों को अंतिम रूप देने का दावा किया है, उनमें एक बड़ा हिस्सा युद्ध के बाद देश के पुनर्निर्माण से जुड़ा है. कीव इसे ‘समृद्धि पैकेज’ कह रहा है. ‘समृद्धि पैकेज’ में एक ऐसा आर्थिक रोडमैप है, जिसके ज़रिए यूक्रेन में तबाह हो चुके शहरों, ऊर्जा ढांचे और बुनियादी सुविधाओं को दोबारा खड़ा किया जा सकता है.
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, इस पुनर्निर्माण के लिए लगभग 800 अरब डॉलर की ज़रूरत होगी. यह राशि सिर्फ इमारतें खड़ी करने के लिए नहीं, बल्कि यूक्रेन को दोबारा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए अहम मानी जा रही है.
सुरक्षा गारंटी की मांग अहम
आर्थिक मदद के साथ-साथ यूक्रेन का ज़ोर अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर भी है. ज़ेलेंस्की और उनके सहयोगी चाहते हैं कि कोई भी शांति समझौता इस बात की ठोस व्यवस्था करे कि रूस भविष्य में दोबारा हमला न कर सके.
यही मुद्दा कीव और वाशिंगटन के बीच सबसे संवेदनशील माना जा रहा है. इसका एक सबसे बड़ा कारण यह है कि भविष्य में रूस हमला नहीं करेगा, इसकी गारंटी अमेरिका कैसे दे सकता है.
अमेरिका यूक्रेन पर एक शांति फ्रेमवर्क पर सहमत होने का दबाव बना रहा है. यूक्रेन के सहमत होने के बाद ही उसे रूस के सामने रखा जा सकता है. जबकि यूक्रेन और उसके यूरोपीय साझेदार किसी भी तरह की ‘अस्थायी शांति’ से बचना चाहते हैं.
- यूक्रेन और अमेरिकी अधिकारियों के बीच बातचीत में युद्ध के बाद रिकवरी पैकेज और सुरक्षा गारंटी शामिल होंगी.
- ज़ेलेंस्की ने अमेरिका समर्थित शांति प्रयासों के प्रति रूसी रुख पर स्पष्टता मांगी है.
- अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन को युद्ध के बाद पुनर्निर्माण के लिए $800 बिलियन की ज़रूरत है.
- अगले हफ्ते दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मौके पर यूक्रेन द्वारा तैयार सुरक्षा गारंटी और आर्थिक पैकेज वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं.
अल्टीमेटम लोकतांत्रिक रिश्तों का मॉडल नहीं
यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने प्रत्यक्ष नहीं, अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी दबाव पर भी असहमति जताई है. उन्होंने कहा, ‘मेरी राय में अल्टीमेटम देशों के बीच लोकतांत्रिक संबंधों के लिए काम करने वाला मॉडल नहीं है.’ हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किस प्रस्ताव या किस पक्ष की ओर था. लेकिन उनका यह बयान अमेरिका-यूक्रेन रिश्तों में बढ़ते तनाव की ओर इशारा करता है.
शांति के दावे बनाम मिसाइल हमले
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि रूस शांति समझौते के लिए तैयार है. ट्रंप के इस दावे पर ज़ेलेंस्की पूरी तरह असहमत दिखे. उन्होंने रूस द्वारा यूक्रेन की ऊर्जा प्रणाली पर हालिया हमलों को मॉस्को के असल इरादों का सबूत बताया. ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ये हमले दिखाते हैं कि रूस को समझौतों में नहीं, बल्कि यूक्रेन को और तबाह करने में दिलचस्पी है.’
यूक्रेन में एयर डिफेंस की कमी
पत्रकारों से बात करते हुए ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन की कमजोर होती एयर डिफेंस क्षमता पर भी चिंता जताई है. उनका कहना था कि 16 जनवरी की सुबह एक नया सहायता पैकेज मिलने तक कई एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइलों के बिना ही रह गए थे. उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, ‘हमें इन सहायता पैकेजों के लिए खून से, लोगों की जान से लड़ना पड़ता है.’
दावोस से पहले बड़ा सवाल
अब पूरी दुनिया की निगाहें दावोस पर टिकी हैं. क्या वहां यूक्रेन को वह सुरक्षा गारंटी और आर्थिक भरोसा मिलेगा, जिसकी उसे ज़रूरत है? या फिर शांति के नाम पर कीव पर ऐसे समझौते का दबाव बनेगा, जिसे ज़ेलेंस्की भविष्य के लिए ख़तरनाक मानते हैं? कई विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि अगले हफ्ते दावोस की मेज़ पर सिर्फ दस्तावेज़ नहीं होंगे. बल्कि उस मेज पर यूक्रेन के भविष्य की दिशा भी तय हो सकती है.
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