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ट्रंप के हाथ आया नोबेल का शांति मेडल: वेनेजुएला में अब शुरू हुआ असली सत्ता संग्राम
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Friday, January 16, 2026
Last Updated On: Friday, January 16, 2026
वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप को देकर उनके अधूरे सपने को पूरा कर दिया है. यहां सवाल यह खड़ा हो जाता है कि क्या मचाडो ने सच में ट्रंप का सम्मान दिया है या उन्होंने अपने शांति मेडल को वेनेजुएला की सत्ता पाने का हथियार बनाया है.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Friday, January 16, 2026
Trump Gets Nobel Medal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति में उनका एक सपना हमेशा साफ़ झलकता रहा है. उनका सपना नोबेल शांति पुरस्कार पाने का रहा है. राष्ट्रपति रहते हुए और उसके बाद भी ट्रंप ने बार-बार दावा किया कि मध्य पूर्व समझौतों से लेकर उत्तर कोरिया और अफ़ग़ानिस्तान तक, उन्होंने शांति के लिए असाधारण काम किया.
उन्होंने कई बार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शांति पुरस्कार की मांग तक की. लेकिन नोबेल समिति ने उन्हें अभी तक वह सम्मान नहीं दिया. कई बार उनके दावों में घमंड, गुरूर और धमकियां भी साफ तौर पर दिखाई देती रही है.
ट्रंप का अधूरा सपना
भले ही औपचारिक तौर पर उन्हें यह पुरस्कार अब तक न मिला हो, लेकिन वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने उनके सपने को पूरा कर दिया है. उसने ट्रंप की इस अधूरी इच्छा को एक नए राजनीतिक अर्थ से भर दिया है.
15 जनवरी को व्हाइट हाउस में हुई एक अहम लंच मीटिंग के दौरान मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार का स्वर्ण पदक ट्रंप को भेंट कर किया. यह केवल एक व्यक्तिगत उपहार नहीं था, बल्कि एक गहरी राजनीतिक, रणनीति और प्रतीकात्मक संदेश था. यह एक तरह से वेनेजुएला के भविष्य में निर्णायक भूमिका निभाने वाले व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश भी है.
नोबेल शांति पुरस्कार मिलना शानदार: ट्रंप
ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार को तुरंत ग्रहण किया. नोबेल पुरस्कार लेकर ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘मारिया ने मुझे मेरे काम के लिए अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया. यह आपसी सम्मान का शानदार तरीका है.’
राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास व्हाइट हाउस ने भी इस क्षण को प्रचारित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. व्हाइट हाउस से जारी की गई तस्वीर में ट्रंप सुनहरे फ्रेम में जड़े मेडल को दिखाते नज़र आ रहे हैं. साथ में संदेश लिखा, ‘ताकत के ज़रिए शांति को बढ़ावा देने वाले असाधारण नेतृत्व के लिए धन्यवाद.’
- वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को दिया.
- इससे ट्रंप का अधूरा सपना हुआ पूरा.
- नोबेल शांति पुरस्कार पाने के बाद मचाडो की आलोचना करने वाले ट्रंप ने उनकी तारीफ़ की.
- विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटनाक्रम शांति का प्रतीक नहीं बल्कि वेनेजुएला का सत्ता संघर्ष है.
नोबेल पुरस्कार ट्रांसफर नहीं हो सकता
दूसरे को मिले नोबेल शांति पुरस्कार लेकर बेशक राष्ट्रपति ट्रंप का अधूरा सपना पूरा हो गया हो, लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं हो सकता. क्योंकि नोबेल शांति पुरस्कार ट्रांसफर नहीं किया जा सकता. नॉर्वेजियन नोबेल संस्थान पहले ही स्पष्ट कर चुका है. नोबेल संस्थान और समिति के अनुसार, ‘पुरस्कार व्यक्तिगत होता है. इसे न तो साझा किया जा सकता है. न किसी अन्य को सौंपा जा सकता है और न ही रद्द किया जा सकता.’
बेशक इस साल का शांति पुरस्कार का मेडल ट्रंप को दिया गया हो लेकिन यह सम्मान मचाडो के पास ही बना रहेगा. समिति के एक सदस्य ने कहा, ‘ट्रंप के पास अब उसका सिर्फ भौतिक प्रतीक है.’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में प्रतीकों की ताकत अक्सर औपचारिक नियमों से कहीं अधिक होती है.
शांति मेडल और वेनेजुएला की सत्ता
मचाडो की यह चाल ऐसे समय आई है, जब उन्होंने हाल ही में अमेरिका द्वारा निकोलस मादुरो को एक ऑपरेशन में पकड़े जाने के बाद उभरे सत्ता-संघर्ष में अपनी जगह पक्की करने की कोशिश तेज़ की है. ट्रंप प्रशासन ने पहले ही संकेत दे दिया था कि मचाडो के पास फिलहाल वेनेजुएला का नेतृत्व संभालने के लिए पर्याप्त समर्थन नहीं है.
मचाडो अपना मेडल देकर वेनेजुएला की सत्ता पक्की करना चाहती है. कई विश्लेषक ऐसा ही मान रहे हैं. यानी, नोबेल मेडल देना केवल आभार नहीं था, यह ट्रंप को प्रभावित करने की सीधी कोशिश थी. वहीं व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने इसे एक यथार्थवादी आकलन बताया है.
मचाडो की आलोचना
विडंबना यह है कि ट्रंप ने खुद पहले मचाडो के नोबेल के लिए खुलकर अपना प्रचार किया था. जब उन्हें यह पुरस्कार मिला और ट्रंप को नहीं, तो ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से नाराज़गी भी जताई थी. अब वही मेडल ट्रंप के हाथ में है. बिना नोबेल समिति की मुहर के. फिर भी इसने वैश्विक सुर्खियों जरूर बंटोरी.
इस बीच, वेनेजुएला की सत्ता की तस्वीर और जटिल हो गई है. मादुरो के पकड़े जाने के बाद उनकी करीबी सहयोगी डेल्सी रोड्रिग्ज अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में उभरी हैं. ट्रंप ने खुद रोड्रिग्ज की तारीफ करते हुए कहा कि उनके साथ काम करना बहुत अच्छा रहा है.
कार्यवाहक राष्ट्रपति रोड्रिग्ज
डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी का मानना है कि रोड्रिग्ज एक ‘चालाक व्यक्तित्व हैं. साथ ही ट्रंप का समर्थन उन्हें और मजबूत कर रहा है. उनके अनुसार, चुनावों की संभावना तो है, लेकिन उन पर भरोसा करना मुश्किल है.
वेनेजुएला में सत्ता संघर्ष
वहीं मचाडो की स्थिति भी विरोधाभासी है. एक तरफ बाहरी पर्यवेक्षक मानते हैं कि उनके समर्थित उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज ने 2024 का चुनाव जीता था. दूसरी तरफ सत्ता संरचना अब भी उन्हीं ताकतों के हाथ में है, जिन्होंने वर्षों तक दमन किया. मादुरो के बाद कुछ राजनीतिक कैदियों की रिहाई हुई है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सरकार ने इसके पैमाने को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है. इसलिए बेनेजुएला में सत्ता संघर्ष अब और तेज हो गया है.
शांति का प्रतीक या सत्ता की चाबी
मचाडो द्वारा ट्रंप को दिया गया, अपना नोबेल मेडल एक सवाल जरूर खड़ा करता हैकि क्या यह शांति का प्रतीक है, या सत्ता तक पहुंचने का एक सुनहरा औज़ार. ट्रंप को शायद नोबेल समिति से कभी पुरस्कार न मिले, लेकिन इस मेडल ने उन्हें वह कहानी दे दी है, जिसे वे सालों से सुनाना चाहते थे. उन्हें लगता है कि दुनिया ने भले ही औपचारिक रूप से नहीं पर प्रतीकात्मक रूप से उनकी ‘शांति की राजनीति’ को मान्यता दे दी है.
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