अमेरिका–ईरान टकराव: क्या मध्य पूर्व एक और युद्ध के मुहाने पर है?

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Thursday, January 15, 2026

Last Updated On: Thursday, January 15, 2026

US-Iran Confrontation: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बढ़ते तनाव ने दुनिया में युद्ध की आशंकाएं बढ़ा दी हैं.
US-Iran Confrontation: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बढ़ते तनाव ने दुनिया में युद्ध की आशंकाएं बढ़ा दी हैं.

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है. एक तरफ ट्रंप प्रशासन सैन्य दबाव बनाकर ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है. वहीं दूसरी तरफ तेहरान भी जवाबी कार्रवाई की खुली चेतावनी देकर पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता.

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Thursday, January 15, 2026

US-Iran Confrontation: मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध की आशंका के साए में है. ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने उस पर हमला किया, तो वह मध्य पूर्व क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा. इसी बीच अमेरिका ने एहतियातन कतर समेत मध्य पूर्व में स्थापित अपने कुछ अहम सैन्य ठिकानों से कर्मचारियों को कम करना शुरू कर दिया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सहित पश्चिमी और यूरोपीय सैन्य अधिकारियों के बयानों ने ईरान पर अमेरिका के हमले की आशंका को और मजबूत कर दिया है. आशंका यही यह है कि अमेरिका, ईरान पर सीमित या व्यापक सैन्य कार्रवाई कभी भी कर सकती है.

एक पश्चिमी सैन्य अधिकारी ने कहा, ‘सभी संकेत यही हैं कि अमेरिकी हमला जल्द हो सकता है. अप्रत्याशितता ट्रंप प्रशासन की रणनीति का हिस्सा है.’ हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से अब तक किसी निर्णायक कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

‘वेट एंड वॉच’ नीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में ईरान के धार्मिक शासन के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में बार-बार बयान दिए हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों को फांसी देती है, तो अमेरिका बहुत कड़ी कार्रवाई करेगा. इसके बावजूद ट्रंप ने यह भी कहा कि वह फिलहाल ‘इंतजार करो और देखो’ की नीति पर चल रहे हैं.

ट्रंप का दावा है कि उन्हें बहुत महत्वपूर्ण सूत्रों से जानकारी मिली है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर की जा रही हिंसक कार्रवाई में कमी आई है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान की ओर से अमेरिका को सकारात्मक संदेश भी मिला है. हालांकि उन्होंने इस संदेश का विवरण साझा नहीं किया.

अमेरिकी ठिकानों से कर्मचारियों की वापसी

क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अमेरिका ने मध्य पूर्व के कुछ प्रमुख सैन्य ठिकानों से अपने गैर-जरूरी कर्मचारियों को हटाना शुरू कर दिया है. कतर के अल उदीद एयर बेस (मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है) से कर्मियों की संख्या घटाई जा रही है. कतर सरकार ने इसे मौजूदा क्षेत्रीय तनावों के जवाब में उठाया गया कदम बताया है.

राजनयिक सूत्रों के अनुसार फिलहाल सैनिकों की बड़े पैमाने पर आपातकालीन निकासी जैसी कोई स्थिति नहीं है. जैसी पिछले वर्ष ईरानी मिसाइल हमले से पहले देखी गई थी. ब्रिटेन के भी कतर में अपने एक एयर बेस से कुछ कर्मचारियों को हटाने की खबरें हैं. हालांकि ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.

  • एक पश्चिमी सैन्य अधिकारी के मुताबिक, सभी संकेत यही हैं कि अमेरिका का हमला जल्द होने वाला है.
  • अधिकारी ने यह भी बताया है कि अमेरिका एहतियात के तौर पर मिडिल ईस्ट में बेस से कुछ कर्मचारियों को हटा रहा है.
  • इज़राइली आकलन के अनुसार अमेरिका दखल जरूर देगा, सिर्फ समय और दायरा अभी साफ नहीं है.
  • ट्रंप का कहना है कि उन्हें लगता है कि प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई कम हो रही है.
  • पश्चिमी अधिकारी के मुताबिक ईरानी सुरक्षा तंत्र अभी भी कंट्रोल में है.

ईरान की पड़ोसी देशों को चेतावनी

एक सीनियर ईरानी अधिकारी के मुताबिक तेहरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और तुर्की समेत कई क्षेत्रीय देशों को चेताया है. ईरान ने इन देशों से कहा है कि यदि अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो वह उन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा. ईरान का कहना है कि वह क्षेत्रीय युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा.

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे बैक चैनल संपर्क भी फिलहाल सस्पेंड कर दिए गए हैं. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच सीधे संवाद ठप पड़ने से कूटनीतिक समाधान की राह और कठिन होती दिख रही है.

संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

उधर, अमेरिका के अनुरोध पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ईरान की स्थिति पर आज आपात बैठक करने जा रही है. फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने इसे ईरान के समकालीन इतिहास में सबसे हिंसक दमन बताया है. यूरोपीय देशों ने भी बढ़ती हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता जताई है.

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ईरान में अब तक 2,400 से अधिक प्रदर्शनकारियों और लगभग 150 सरकार समर्थक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कुछ स्वतंत्र समूह मृतकों की संख्या 2,600 से भी अधिक बता रहे हैं. यह संख्या 2009 और 2022 के आंदोलनों से कहीं ज्यादा है.

ईरानी सरकार की स्थिति

ईरान इस समय 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद की सबसे गंभीर आंतरिक अशांति से गुजर रहा है. खराब आर्थिक हालात, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब धार्मिक शासन की वैधता को चुनौती देने लगे हैं. हालांकि पश्चिमी अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा हालात के बावजूद ईरानी सरकार तत्काल गिरने की स्थिति में नहीं है.

एक पश्चिमी अधिकारी के अनुसार, ‘सुरक्षा तंत्र अभी भी नियंत्रण में है.’ इंटरनेट ब्लैकआउट और सख्त दमन के बावजूद सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसे जनता का समर्थन हासिल है. सरकारी टीवी चैनलों पर अंतिम संस्कार जुलूसों और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के समर्थन में रैलियों के फुटेज लगातार दिखाए जा रहे हैं.

फिलहाल दुनिया की नजरें वाशिंगटन के अगले कदम और तेहरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं. क्योंकि यहां लिया गया फैसला इन दो देशों से आगे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थिरता तय करेगा.

यह भी पढ़ें :- Iran’s Missile: रडार को चकमा, डिफेंस सिस्टम बेकार. ईरान की 5 मिसाइलें क्यों बन रहीं वैश्विक खतरा?

गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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