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बांग्लादेश चुनाव से पहले हिंसा चरम पर, 72 घंटे बाकी, पटुआखाली में BNP-जमात समर्थकों के बीच खूनी झड़प
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, February 9, 2026
Last Updated On: Monday, February 9, 2026
Bangladesh Elections: बांग्लादेश में आम चुनाव से सिर्फ 72 घंटे पहले चुनावी माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है. पटुआखाली के भंडारिया बाज़ार में बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प में महिलाओं सहित 40 से ज्यादा लोग घायल हो गए. पैसे बांटने के आरोप से शुरू हुआ विवाद अब पूरे चुनाव की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, February 9, 2026
Bangladesh Elections: बांग्लादेश में आम चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है. 12 फरवरी को होने वाले मतदान से ठीक 72 घंटे पहले देश का राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है. चुनावी प्रचार के अंतिम दौर में जहां नेता वोटरों को साधने में जुटे हैं, वहीं कई इलाकों में हिंसा ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. खासकर पटुआखाली जिले में हुई ताज़ा घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
पटुआखाली में आधी रात का बवाल
सोमवार आधी रात को पटुआखाली के भंडारिया बाज़ार में हालात अचानक बिगड़ गए. यहां बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हो गई. इस टकराव में महिलाओं सहित 40 से ज़्यादा लोग घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. चश्मदीदों के मुताबिक, कुछ घायलों की हालत गंभीर भी बताई जा रही है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है.
पैसे बांटने के आरोप से भड़की चिंगारी
हिंसा की जड़ उस वक्त पड़ी, जब जमात-ए-इस्लामी के एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को पैसे दिए जाने के आरोप सामने आए. बीएनपी कार्यकर्ताओं ने इसे चुनावी आचार संहिता का खुला उल्लंघन बताया और मौके पर पहुंचकर विरोध दर्ज कराया. शुरू में बहस और नोकझोंक हुई, लेकिन देखते ही देखते हालात हाथ से निकल गए. पत्थरबाज़ी शुरू हुई, लाठी-डंडे चले और बाजार इलाका युद्ध का मैदान बन गया.
डेढ़ महीने की घटनाओं में सबसे हिंसक टकराव
पिछले डेढ़ महीने से बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों में चुनावी हिंसा की छिटपुट घटनाएं सामने आती रही हैं. इन घटनाओं में कई लोग घायल हुए, लेकिन बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच पटुआखाली की झड़प को अब तक का सबसे बड़ा और हिंसक टकराव माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आता जा रहा है, टकराव की तीव्रता भी बढ़ती जा रही है.
‘बाइपोलर’ मुकाबला और बढ़ता तनाव
इस चुनाव को बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा और बाइपोलर मुकाबला माना जा रहा है. प्रचार खत्म होने से ठीक पहले हुई इस हिंसा ने साफ कर दिया है कि दोनों दल किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. घायलों में महिलाओं की मौजूदगी ने इस घटना को और गंभीर बना दिया है. सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ा अलार्म माना जा रहा है.
प्रचार पर लगेगा विराम, लेकिन चुनौती बरकरार
चुनाव आयोग के अनुसार 10 फरवरी की सुबह साढ़े सात बजे चुनाव प्रचार आधिकारिक तौर पर थम जाएगा. इससे पहले दोनों पार्टियां अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं. चुनाव आयोग और प्रशासन ने पटुआखाली समेत संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं. पुलिस और अर्धसैनिक बलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके.
12 फरवरी की परीक्षा: शांतिपूर्ण मतदान
अब सबसे बड़ी चुनौती 12 फरवरी को शांतिपूर्ण मतदान कराना है. अधिकारी मानते हैं कि मौजूदा हालात में यह आसान नहीं होगा, क्योंकि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अब सड़कों पर हिंसा में बदल चुकी है. लोकतंत्र की असली परीक्षा मतदान के दिन होगी, जब यह तय होगा कि बांग्लादेश अपने चुनावी तनाव के बावजूद शांति और व्यवस्था बनाए रख पाता है या नहीं.
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