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सत्ता बदलाव के साथ ही अमेरिकी कंपनियों की पसंद बनकर सामने आया भारत
Authored By: सतीश झा
Published On: Thursday, November 14, 2024
Last Updated On: Thursday, November 14, 2024
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के परिणामों और वैश्विक राजनीति में आए बदलावों के साथ ही भारत, अमेरिकी कंपनियों के लिए एक आकर्षक निवेश गंतव्य बनकर उभर रहा है। मूडीज जैसी प्रमुख रेटिंग एजेंसी के हालिया विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी नीतियों में बदलाव और चीन के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के चलते कई अमेरिकी कंपनियां अब भारत को अपने निवेश का केंद्र बनाने की योजना बना रही हैं।
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Thursday, November 14, 2024
हाल ही में, मूडीज (Moody’s) ने अपने विश्लेषण में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखा है, विशेषकर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के परिणामों के परिप्रेक्ष्य में। मूडीज का कहना है कि अमेरिकी नीतियों में बदलाव के कारण कई अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश को प्राथमिकता दे सकती हैं। वर्तमान में भारत 3.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ वैश्विक स्तर पर पाँचवें स्थान पर है और आने वाले वर्षों में 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।
क्या कहती है मूडीज की रिपोर्ट?
मूडीज का मानना है कि अमेरिकी सरकार के बदलाव के बाद आने वाली नीतियों से भारत को विशेष रूप से फायदा हो सकता है। चीन के प्रति ट्रंप का कड़ा रुख, भारतीय बाजार के लिए एक नया अवसर उत्पन्न कर सकता है। मूडीज के अनुसार, ट्रंप के फिर से सत्ता में आने पर भारत के साथ सामरिक और आर्थिक साझेदारी और मजबूत हो सकती है, जिससे रक्षा, टेक्नोलॉजी, और उद्योग क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को लाभ मिलेगा।
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
मूडीज के अनुसार, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव का लाभ भारत को मिल सकता है। अमेरिकी कंपनियां अब चीन के बजाय एशिया में भारत को विकल्प के रूप में देख रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के कारण, जो चीन पर उच्च टैरिफ लगाने के संकेत दे चुके हैं, भारत में मेटल, केमिकल, टेक्सटाइल और टाइल्स जैसे क्षेत्रों के लिए निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय मिडकैप आईटी कंपनियों और रक्षा क्षेत्र में भी कई अवसर पैदा होने की संभावना है।
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अमेरिकी समर्थन का आश्वासन
डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का भारत के प्रति एक सकारात्मक रुख पहले भी देखने को मिला है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद और पुलवामा हमले के समय ट्रंप का भारत के लिए ‘राइट टू सेल्फ डिफेंस’ का समर्थन, भारतीय हितों के पक्ष में उनका रुख दर्शाता है। मूडीज के अनुसार, ट्रंप का पुनः सत्ता में आना दक्षिण एशिया में स्थिरता लाने और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने में सहायक हो सकता है, जिसका सीधा लाभ भारत को मिल सकता है।
भारत के लिए ट्रंप का समर्थन
डोनाल्ड ट्रंप का भारत के प्रति रुख पिछले कार्यकाल में भी सकारात्मक था। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर ट्रंप ने खुलकर भारत का समर्थन किया था। साथ ही, आतंकवाद के खिलाफ भारत के कदमों को भी अमेरिका ने खुलकर समर्थन दिया। अब, ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी कंपनियों द्वारा भारत में निवेश और व्यापारिक संबंधों के और भी मजबूत होने की उम्मीद है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि भारत इसी गति से अपने आर्थिक सुधारों को जारी रखता है और अमेरिकी कंपनियों को आकर्षित करता है, तो वह 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य को और जल्दी प्राप्त कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत निवेश का एक प्रमुख विकल्प बनकर उभरेगा, जिससे आने वाले समय में देश की आर्थिक विकास दर और मजबूत होगी।
(हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के इनपुट के साथ)














