Child Heart Attack : क्यों छोटी उम्र में हो रही है बच्चों की हार्ट अटैक से मौत

Authored By: स्मिता

Published On: Thursday, July 17, 2025

Last Updated On: Thursday, July 17, 2025

बच्चा सीने में दर्द के साथ हार्ट अटैक की स्थिति में – Child Heart Attack
बच्चा सीने में दर्द के साथ हार्ट अटैक की स्थिति में – Child Heart Attack

राजस्थान के सीकर में नौ साल की एक बच्ची की स्कूल में लंच बॉक्स खोलते समय दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. इन दिनों छोटी उम्र में बच्चों के हार्ट अटैक से मौत होने की कई घटना सामने आ रही है. जानते हैं इसकी वजह और बचाव के उपाय.

Authored By: स्मिता

Last Updated On: Thursday, July 17, 2025

Child Heart Attack: राजस्थान के सीकर में कक्षा 4 की छात्रा नौ साल की प्राची कुमावत की हाल में मौत हो गई. स्कूल प्रबंधन के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 11 बजे उसका लंच बॉक्स गिर गया और वह बेहोश हो गई. उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका. बाद में उसे सीकर के एक अस्पताल में रेफर कर दिया गया. उसे फिर से दौरा पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई. डॉक्टरों के अनुसार, उसे स्कूल में अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ था, जबकि प्राची को जन्मजात हृदय रोग का कोई इतिहास नहीं था.

दुर्लभ है बच्चों में दिल का दौरा (Cardiac Arrest)

अमेरिका में भी इन दिनों बच्चों के अचानक कार्डिएक अरेस्ट से मौत की खबरें आने लगी हैं. इसलिए अमेरिका के चिकित्सा और जीव विज्ञान से संबंधित डिजिटल जर्नल पबमेड जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, बच्चों में दिल का दौरा दुर्लभ है. इसके कई कारक हो सकते हैं. इनमें जन्मजात हृदय दोष, कावासाकी रोग और कुछ संक्रमण भी शामिल हैं. बच्चों में कावासाकी रोग एक दुर्लभ बीमारी है, जो ब्लड वेसल्स में सूजन का कारण बनती है. अचानक हृदय गति रुकना घातक हो सकता है. प्रति 100,000 बच्चों में लगभग 1-3 मामले ऐसे होते हैं. लक्षणों की तुरंत पहचान और सीपीआर और एईडी का लाभ लेने के साथ-साथ तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप परिणामों में सुधार कर सकता है.

जन्मजात हृदय दोष बन सकता है कारण (Congenital Heart Disease)

बच्चों में हृदय गति रुकने का सबसे आम कारण जन्मजात हृदय दोष है. बच्चों में सामान्य लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, थकान और विकास में कमी भी हो सकती है. उपचार में दोष को ठीक करना, दवा लेना या किसी हार्ट मशीन का उपयोग करना शामिल हो सकता है. बच्चों में दिल का दौरा दुर्लभ है, लेकिन हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी, मायोकार्डिटिस, वायरल या फंगल संक्रमण और ट्रामा शामिल हैं. ये स्थितियां रक्त प्रवाह, हृदय की मांसपेशियों के कार्य या हृदय ताल को प्रभावित कर सकती हैं. इससे संभावित रूप से दिल का दौरा पड़ सकता है.

कैसे करें बचाव (Heart Disease Prevention)

पब मेड सेन्ट्रल के अनुसार, बच्चों में दिल के दौरे को रोकने में मदद के लिए स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना चाहिए. इसमें संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और धूम्रपान से बचना शामिल है. हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लडप्रेशर जैसी स्थितियों का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है. खासकर यदि हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास रहा हो.

  • नियमित स्वास्थ्य जांच: यदि बच्चे में किसी प्रकार की परेशानी दिखती है, तो नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर की निगरानी में इससे मदद मिल सकती है.
  • अन्य स्थितियों का प्रबंधन: संक्रमण, बुखार और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों का तुरंत पता लगाएं और उनका इलाज करें जो हृदय को प्रभावित कर सकती हैं.
  • पारिवारिक इतिहास जानें: हृदय रोग के किसी भी पारिवारिक इतिहास के बारे में जागरूक रहें, क्योंकि इससे बच्चे में जोखिम बढ़ सकता है।
  • स्वस्थ नींद की आदतों को बढ़ावा दें: सुनिश्चित करें कि बच्चों को पर्याप्त नींद मिले, क्योंकि नींद की कमी हृदय स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है.

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About the Author: स्मिता
स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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