द बंगाल फिल्मस का क्या है सियासी बवाल, पश्चिम बंगाल में क्यों हो रहा है इसका विरोध

Authored By: सतीश झा

Published On: Saturday, September 6, 2025

Last Updated On: Saturday, September 6, 2025

फिल्म ‘The Bengal Files’ पर पश्चिम बंगाल में सियासी बवाल मचा है, जानें क्यों हो रहा है विरोध और इसके पीछे की राजनीतिक वजहें.
फिल्म ‘The Bengal Files’ पर पश्चिम बंगाल में सियासी बवाल मचा है, जानें क्यों हो रहा है विरोध और इसके पीछे की राजनीतिक वजहें.

विवेक रंजन अग्निहोत्री (Vivek Ranjan Agnihotri) की फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ (The Bengal Files) रिलीज होते ही राजनीतिक बवाल में घिर गई है. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में इस फिल्म का जमकर विरोध हो रहा है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं का कहना है कि यह फिल्म तथ्यों पर आधारित नहीं, बल्कि “चुनावी प्रचार” का हिस्सा है. वहीं, BJP इस फिल्म को “सच्चाई दिखाने वाला साहसिक प्रयास” बता रही है. पार्टी का कहना है कि ‘द बंगाल फाइल्स’ उन दर्दनाक घटनाओं को सामने लाती है, जिन्हें लंबे समय से दबाने की कोशिश की गई.

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Saturday, September 6, 2025

फिल्म (The Bengal Files) में 1946 के नोआखली दंगे और बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि को दर्शाया गया है. विरोधियों का आरोप है कि फिल्म के जरिए राज्य में “ध्रुवीकरण की राजनीति” को बढ़ावा दिया जा रहा है. राज्य (West Bengal) के कई हिस्सों में फिल्म के पोस्टर फाड़े गए और हॉल मालिकों पर दबाव बनाए जाने की भी खबरें हैं. हालांकि, फिल्म के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री का कहना है कि उनकी फिल्म “सत्य को उजागर करने की कोशिश” है और दर्शकों को खुद तय करने दिया जाना चाहिए कि वह क्या देखना चाहते हैं.

बहरहाल, फिल्म द बंगाल फाइल्स (The Bengal Files) को लेकर पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सियासत तेज़ हो गई है. इसी कड़ी में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष (Kunal Ghosh) ने इस मुद्दे पर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल एक लोकतांत्रिक राज्य है और यहां हर किसी को अपने फैसले लेने की आज़ादी है.

शामिल न होना हॉल मालिकों का फैसला

TMC के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष (Kunal Ghosh) ने कहा, “ये पूरी तरह हॉल मालिकों का फैसला है. अगर वे तय करते हैं कि तथ्यहीन प्रचार वाली फिल्म को जगह नहीं देंगे, तो ये उनका अधिकार है. इसका सरकार या पार्टी से कोई संबंध नहीं है. ”

टीएमसी नेता ने निर्देशक विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) पर भी तंज कसते हुए कहा, “विवेक जी का विवेक चुनिंदा विवेक होता है.”

द बंगाल फाइल्स को लेकर लंबे समय से विवाद

फिल्म द बंगाल फाइल्स (The Bengal Files) को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. विरोधियों का आरोप है कि फिल्म तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है, जबकि समर्थकों का कहना है कि यह बंगाल की असलियत को सामने लाती है. बहरहाल, टीएमसी नेता कुणाल घोष के बयान से साफ है कि पार्टी इस विवाद से दूरी बनाए हुए है और हॉल मालिकों के फैसले को ही अंतिम मान रही है.

बहुचर्चित फिल्म द बंगाल फाइल्स को विवेक रंजन अग्निहोत्री ने खुद लिखा और डायरेक्ट किया है. फिल्म के प्रोड्यूसर अभिषेक अग्रवाल, पल्लवी जोशी और विवेक रंजन अग्निहोत्री हैं. इसमें मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी, अनुपम खेर और दर्शन कुमार जैसे दिग्गज कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं. द बंगाल फाइल्स को तेज नारायण अग्रवाल और आई एम बुद्धा प्रोडक्शंस द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है. फिल्म से जुड़ी टीम का दावा है कि यह ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित सच्चाई को सामने लाने वाली एक सशक्त कड़ी साबित होगी.

ये है द बंगाल फिल्मस की कहानी

निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की नई फिल्म द बंगाल फाइल्स (The Bengal Files) इन दिनों चर्चा में है. फिल्म की कहानी कश्मीरी पंडित अफसर शिवा पंडित (दर्शन कुमार) के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिन्हें बंगाल में किडनैप की गई एक लड़की को खोजने के मिशन पर भेजा जाता है.

किडनैप हुई लड़की का नाम भारती बनर्जी (सिमरत कौर) है, जिसकी कहानी में एक और अहम किरदार जुड़ता है – अमरजीत अरोड़ा (एकलव्य सूद), एक सिख युवक जो भारती का प्रेमी है.

फिल्म की पटकथा कई चौंकाने वाले ट्विस्ट और टर्न्स के साथ उस दौर की सच्ची और दर्दनाक घटनाओं को दर्शकों के सामने लाती है. यह सिर्फ एक मिशन की कहानी नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों का बयान है जिसने समाज को गहरे जख्म दिए.

फिल्म द बंगाल फाइल्स की सबसे बड़ी ताकत इसका विज़ुअल ट्रीटमेंट माना जा रहा है. फिल्म में नोआखली में हुए बंगालियों और सिखों के नरसंहार को बेहद ग्राफिक और भावनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है. सड़कों पर पड़ी लाशें, चारों ओर फैला खून, खंभों से लटकते शव और सामूहिक हत्याओं के दृश्य दर्शकों को गहराई तक झकझोर देते हैं.

फिल्म न सिर्फ इन दर्दनाक घटनाओं का चित्रण करती है, बल्कि दर्शकों को उन्हें महसूस कराने का भी काम करती है. राजनीतिक पृष्ठभूमि और जमीनी सच्चाइयों को जोड़ते हुए निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने इसे आज की पीढ़ी को एक भुला दी गई त्रासदी से परिचित कराने का प्रयास बताया है.

निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने फिल्म को अपने अनूठे डायरेक्शन और विजुअल ट्रीटमेंट से खास बनाया है. डर और बेचैनी पैदा करने वाले दृश्य दर्शकों को झकझोर देते हैं और उन्हें अंत तक सीट से बांधे रखते हैं.

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About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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