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दिल्ली एम्स (Delhi AIIMS) को क्यों अलविदा कह रहे हैं सीनियर डॉक्टर्स
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Saturday, July 20, 2024
Last Updated On: Saturday, July 20, 2024
दिल्ली एम्स न केवल अस्पताल के रूप में बल्कि मेडिकल कॉलेज के मामले में भी नंबर एक है। यहां डॉक्टरों की पढ़ाई पर सरकार लाखों खर्च करती है। वहीं यहां के कई डॉक्टर संस्थान छोड़ रहे हैं।
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Saturday, July 20, 2024
एक तरफ देश भर में नए एम्स खोले जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देश के सबसे पुराने दिल्ली एम्स में लगातार सीनियर डॉक्टर्स संस्थान छोड़ रहे हैं। सीनियर डॉक्टरों के संस्थान छोड़ने से कहीं न कहीं इसका प्रतिकूल असर दिल्ली एम्स पर पड़ना लाजमी है। हालांकि एम्स प्रशासन इसका प्रभाव संस्थान पर पड़ने को सिरे से खारिज करते हैं। इससे इतर सवाल यही उठता है कि आखिर विशेषज्ञ डॉक्टर एम्स को क्यों अलविदा कह रहे हैं। क्या उन पर कार्य का दबाव है या फिर निजी अस्पतालों से मोटे पैकेज की पेशकश इन्हें एम्स जैसे संस्थान छोड़ने को मजबूर कर रहा है।
कई सर्जन डॉक्टरों ने छोड़ा एम्स
एम्स छोड़ने का सबसे ताजा उदाहरण डॉक्टर संदीप अग्रवाल और डॉक्टर वी सीनू हैं। ये दोनों ही डॉक्टर सर्जन हैं। डॉक्टर संदीप अग्रवाल दिल्ली एम्स में मोटापे की सर्जरी शुरू करने वाले डॉक्टरों में शामिल रहे हैं। इन दोनों डॉक्टरों के छोड़ने से कुछ दिन पहले ही दो कार्डिएक सर्जन ने भी एम्स को अलविदा कह दिया था। ये कार्डिएक सर्जन हैं, डॉक्टर शिव चौधरी और डॉक्टर मिलिंद होते। बताया जाता है कि डॉ शिव चौधरी और डॉ होते दोनों ने एक निजी अस्पताल को जॉइन किया है। न्यूरो सर्जन डॉक्टर मनमोहन सिंह ने भी कुछ समय पहले एम्स को अलविदा कह चुके हैं।
निजी अस्पतालों में मोटा वेतन
बेशक आज देश में दर्जनों बड़े एवं चर्चित अस्पताल हैं लेकिन अभी भी सबका भरोसा एम्स पर ही टीका है। उद्योगपति हों या फिर अमीर लोग भीड़ के कारण एम्स में दिखाने नहीं आते पर उनका विश्वास निजी अस्पतालों के डॉक्टरों से कहीं ज्यादा एम्स के डॉक्टरों पर रहता है। शायद यही कारण है कि बड़े निजी अस्पताल एम्स के डॉक्टरों को मोटा वेतन का लोभ देकर अपने संस्थान के साथ जोड़ने की कोशिश लगातार करता है। इसमें कई बार वह कामयाब भी होता है।
एम्स में डॉक्टर की पढ़ाई सबसे सस्ती
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली देश की सबसे बेहतरीन मेडिकल कॉलेज है। देश भर में इसका रैंक एक है। भले ही निजी मेडिकल कॉलेज लाखों-करोड़ों फीस ले रहे हों लेकिन आज भी हर मेडिकल छात्रों का एक ही सपना होता है, एम्स में पढ़ाई करना। इसका कारण सिर्फ सबसे कम फीस होना नहीं है। बल्कि यहां देश की टॉप सुविधाएं केंद्र सरकार उपलब्ध करती है। दिल्ली एम्स की फीस आज भी निजी मेडिकल कॉलेज तो दूर अन्य सरकारी संस्थानों की तुलना में भी काफी कम है। यहां के एमबीबीएस की एक साल की फीस मात्र 1648 रुपए है। सरकार इतने पैसे खर्च कर देश-दुनिया की बेहतरीन डॉक्टर तैयारी कराती है। वहीं जब डॉक्टर अनुभवी हो जाते हैं तो एम्स पैसे की खातिर संस्थान छोड़ने को तैयार हो जाते हैं।
हाल में एम्स छोड़ने वाले डॉक्टर
| डॉक्टर के नाम | विभाग |
|---|---|
| डॉक्टर संदीप अग्रवाल | सर्जन |
| डॉक्टर वी सीनू | सर्जन |
| डॉक्टर शिव चौधरी | कार्डिएक सर्जन |
| डॉक्टर मिलिंद होते | कार्डिएक सर्जन |
| डॉक्टर मनमोहन सिंह | न्यूरो सर्जन |
| डॉक्टर रणदीप गुलेरिया | लंग्स स्पेशलिस्ट और पूर्व निदेशक |
| डॉक्टर राजेश मल्होत्रा | एचओडी आर्थोपीडिक, ट्रामा सेंटर प्रमुख |
| डॉक्टर एम पी पदमा | न्यूरोलॉजी विभाग, प्रमुख |
| डॉक्टर संदीप मिश्रा | कार्डियोलॉजिस्ट |
| डॉक्टर अतुल शर्मा | मेडिकल ऑंकोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) |
| डॉक्टर एस वी एस देव | कैंसर सर्जन |














