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प्रदूषण की चपेट में दिल्ली-एनसीआर, स्थिति को देखते हुए ग्रैप का पहला चरण लागू, पराली जलाने की सैकड़ों शिकायतें
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Thursday, October 22, 2026
Last Updated On: Thursday, October 22, 2026
दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई है. इस स्थिति को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) ने बुधवार को इस सीजन में पहली बार ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया. दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) मंगलवार को 179 था, जो बुधवार को दोपहर 2 बजे बढ़कर 244 पहुंच गया. पराली जलाने की बढ़ती घटना ने हालात को और ज्यादा संजीदा बना दिया है.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Thursday, October 22, 2026
Delhi air quality update: सीएक्यूएम की ग्रैप उपसमिति ने स्थिति की समीक्षा के बाद पूरे एनसीआर में पहले चरण के सभी उपाय लागू करने का निर्णय लिया. संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे निगरानी बढ़ाएं और सुनिश्चित करें कि प्रदूषण का स्तर और न बिगड़े. आयोग स्थिति की नियमित समीक्षा करेगा.
ग्रैप-1 के तहत निर्माण एवं तोड़फोड़ स्थलों, सड़कों की धूल और खुले में कचरा जलाने से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय तेज किए जाएंगे. होटल, रेस्तरां और खुले भोजनालयों के तंदूर में ईंधन के रूप में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगाने तथा डीजल जनरेटर के उपयोग को आपातकालीन और आवश्यक परिस्थितियों तक सीमित रखने जैसे उपाय भी शामिल हैं. साथ ही, मेट्रो को छोड़कर सभी पार्किंग की फीस दोगुनी कर दी गई है.
शुक्रवार तक दिल्ली की हवा में बढ़ सकता है पराली के धुएं का असर
मौसम के बदलते मिजाज के साथ हवा की दिशा में भी परिवर्तन हो रहा है. ऐसे हालात में दिल्ली की वायु गुणवत्ता बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है. पिछले कुछ दिनों के पूर्वानुमान भी संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है.
पराली के धुएं ने बढ़ाया प्रदूषण
डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को इस सीजन में पहली बार दिल्ली के प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी चार प्रतिशत के पार पहुंचकर 4.057 प्रतिशत दर्ज की गई. विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, बुधवार से शुक्रवार के बीच इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है तथा इसकी हिस्सेदारी 8 से 13 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है.
छह राज्यों में पराली जलाने की 1,171 घटनाएं
इसरो के निगरानी तंत्र से मिले आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 19 अक्टूबर के बीच छह राज्यों में पराली जलाने की कुल 1,171 घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें मध्य प्रदेश 370 मामलों के साथ सबसे ऊपर रहा. पंजाब में 368, राजस्थान में 197, उत्तर प्रदेश में 175, उत्तराखंड में 51 और हरियाणा में नौ मामले सामने आए.
पिछले साल की समान अवधि में पंजाब में पराली जलाने की 308 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 368 हो गई है. राजस्थान में भी पिछले साल के 174 मामलों की तुलना में इस बार 197 घटनाएं सामने आई हैं. इसी तरह मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामले 241 से बढ़कर 370 हो गए हैं.
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि पराली जलाने की बढ़ती घटनाएं आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता के लिए चुनौती बन सकती हैं. हालांकि, प्रदूषण पर इसका वास्तविक असर हवा की दिशा, गति और मौसम की परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा.
Wriiten By: Rajiv Mandal













