ITBP डीजी के बयान से सियासी तूफान: खरगे बोले, चीन को क्लीन चिट देना बंद कीजिए, देश को सच बताइए

Authored By: Galgotias Times Bureau

Published On: Friday, October 23, 2026

Updated On: Friday, October 23, 2026

ITBP DG के चीन सीमा पर टकराव वाले बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा

ITBP के डीजी ने अरुणाचल में चीनी सैनिकों से टकराव जारी रहने की बात कही तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से तीन सवाल पूछ लिए. राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और कूटनीतिक जवाबदेही पर उठे इन सवालों पर क्या हैं दावे और क्या है पूरा मामला.

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Updated On: Friday, October 23, 2026

अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीन के साथ तनाव अब सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है. ITBP के महानिदेशक के बयान (ITBP DG statement) के बाद खरगे ने सरकार पर चीन को “क्लीन चिट” देने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री से देश को सच बताने की मांग की.

ITBP डीजी के एक बयान से मचा बवाल

इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई बार चीनी सैनिकों से आमना-सामना हुआ, और यह स्थिति अब भी जारी है. रिपोर्ट्स इसे इस मामले की पहली आधिकारिक पुष्टि बता रही हैं. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक यह आमने-सामने की स्थिति जुलाई से बनी हुई है. बयान के अगले ही दिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार से तीन सवाल पूछ डाले.

पहला सवाल: राष्ट्रीय सुरक्षा

खरगे ने एक्स पर लिखा कि चीन को क्लीन चिट देना बंद होना चाहिए और प्रधानमंत्री मोदी को देश के सामने सच रखना चाहिए. राष्ट्रीय सुरक्षा पर उन्होंने पूछा कि क्या डोकलाम और गलवान के बाद एक और गंभीर टकराव चल रहा है. उन्होंने अगस्त में तक्सिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरों का जिक्र किया और कहा कि वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत को 47 दिन बीत चुके हैं, फिर भी टकराव जारी है. उन्होंने पूछा कि क्या भारत के गश्त करने के अधिकार से समझौता हुआ है. खरगे ने यह भी कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है.

दूसरा सवाल: आर्थिक सुरक्षा

खरगे का दावा है कि गलवान में 20 जवानों के बलिदान (वित्त वर्ष 2020-21) के बाद से चीन से आयात 102 फीसदी बढ़ा है, जबकि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 155 फीसदी बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया है. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण खुद मानती हैं कि चीन भारतीय निर्यात में रुकावट डालता है, फिर भी सरकार चीनी निवेश पर पाबंदियां ढीली कर रही है और चीन से जुड़ी योग्य कंपनियों को PLI लाभ देने पर विचार कर रही है. उनका सवाल था कि क्या ‘मेक इन इंडिया’ अब ‘इम्पोर्ट फ्रॉम चाइना’ बन गया है.

तीसरा सवाल: कूटनीति का नतीजा क्या

तीसरे सवाल में खरगे ने गिनाया कि कम से कम 23 बार मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात या बातचीत हुई, विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर एनएसए अजीत डोभाल की भागीदारी वाले 25 दौर हुए, और डब्ल्यूएमसीसी की 36 बैठकें हुईं. साथ ही एससीओ और ब्रिक्स के कई शिखर सम्मेलन भी हुए. उन्होंने पूछा कि इन सबसे ठोस नतीजा क्या निकला, और क्या मई 2020 से पहले वाले गश्त के अधिकार पूरी तरह बहाल हो गए हैं. उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों पर पूरा भरोसा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा में जवाबदेही चाहिए, सिर्फ फोटो अवसर नहीं.

जयराम रमेश का हमला

इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी एक्स पर सरकार को घेरा था. उन्होंने कहा कि तक्सिंग के टकराव के बाद पिछले महीने वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई, फिर भी स्थानीय लोगों के मुताबिक गश्त के कुछ बिंदु फिर खो दिए गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि चीन अरुणाचल के कस्बों के नाम बदल रहा है और 60,000 मेगावाट का एक बांध बना रहा है, जो पर्यावरण और जल सुरक्षा के लिए खतरा है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री और उनके तंत्र की ‘कानफोड़ू चुप्पी’ है.

ITBP में क्या बदल रहा है

डीजी शत्रुजीत कपूर ने कहा कि चीन वाला मोर्चा सबसे कठिन सीमा है, जहां पारंपरिक तरीकों से काम नहीं चलेगा. उन्होंने ITBP की नई शौर्य कमांडो टीमों की तारीफ की, जो रिपोर्ट्स के मुताबिक इन आमने-सामने की स्थितियों में अहम रहीं. ये कमांडो अब हर बॉर्डर बटालियन में तैनात किए जाएंगे. रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्रोन प्लाटून बनाई गई हैं और एलएसी पर भूमिगत शेल्टर तैयार किए जा रहे हैं. कपूर 31 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं.

सरकार का पक्ष और आगे क्या

हमने जो रिपोर्ट्स देखीं, उनमें विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय या प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से इस बयान या खरगे के सवालों पर कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला. दूसरी तरफ ITBP डीजी के बयान में जवानों की तैयारी और क्षमता की तारीफ है. अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या सफाई देती है और अरुणाचल के हालात पर आधिकारिक ब्योरा कब सामने आता है.

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