क्या है I-PAC और कौन हैं प्रतीक जैन जिन पर ED ने की कार्यवाई, ममता दीदी हुईं आगबबूला
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Thursday, January 8, 2026
Last Updated On: Thursday, January 8, 2026
पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच I-PAC से जुड़े ठिकानों पर ED की रेड ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. ED की कार्रवाई के दौरान खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंच गईं और इसे राजनीतिक साजिश बताया. आखिर I-PAC क्या है, प्रतीक जैन कौन हैं और ED की जांच का TMC से क्या कनेक्शन है जानिए पूरी कहानी.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Thursday, January 8, 2026
Pratik Jain: पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार की सुबह अचानक उस वक्त उबाल आ गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी शुरू की. कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित I-PAC कार्यालय में चल रही इस कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गईं और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. ED की इस रेड ने न सिर्फ चुनावी माहौल को गरमा दिया, बल्कि I-PAC और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन को भी सियासी बहस के केंद्र में ला दिया. सवाल यह है कि I-PAC आखिर है क्या, प्रतीक जैन कौन हैं और इस जांच का तृणमूल कांग्रेस से क्या सीधा रिश्ता है, इन्हीं सभी पहलुओं पर अब देशभर की नजर टिकी हुई है. आइए विस्तार से इन सब के बारे में जानते हैं?
दो नाम और सुर्खियों में चर्चा
हाल ही में सामने आए घटनाक्रमों में दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. पहला नाम है I-PAC और दूसरा है प्रतीक जैन. I-PAC एक बड़ी राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म है, जिसे चुनावी रणनीति और राजनीतिक सलाह देने के लिए जाना जाता है. इसकी शुरुआत प्रशांत किशोर ने की थी, जिन्हें पीके के नाम से भी जाना जाता है.
I-PAC क्या है और इसकी शुरुआत?
I-PAC का पूरा नाम इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी है. इसकी नींव 2013 में Citizens for Accountable Governance (CAG) के रूप में रखी गई थी. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले इसे औपचारिक रूप से I-PAC का रूप दिया गया. I-PAC का मकसद राजनीति और शासन में युवाओं और पेशेवरों की भागीदारी बढ़ाना है. यह किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं है, लेकिन खुद को सिर्फ कंसल्टेंसी नहीं बल्कि एक पॉलिटिकल प्लेटफॉर्म बताती है. इसके जरिए डेटा, टेक्नोलॉजी और जमीनी रणनीति के जरिए चुनावी और राजनीतिक मदद दी जाती है.
प्रशांत किशोर के बाद I-PAC की कमान
प्रशांत किशोर पहले I-PAC के प्रमुख रणनीतिकार थे. उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जन सुराज पार्टी बनाई और सक्रिय राजनीति में भी कदम रखा. हालांकि 2021 में उन्होंने I-PAC से अलग होकर अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखी. अब I-PAC की कमान तीन वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में है, जिनमें प्रतीक जैन मुख्य हैं. इसके अलावा ऋषि राज सिंह (IIT कानपुर), और विनेश चंदेल (NLIU भोपाल) भी फर्म के वरिष्ठ अधिकारी हैं. इनके पास डेटा, टेक्नोलॉजी और ग्राउंड लेवल रणनीति का मजबूत मिश्रण है, जो I-PAC को बाकी कंसल्टेंसी फर्मों से अलग बनाता है.
प्रतीक जैन कौन हैं?
प्रतीक जैन IIT बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और मटेरियल साइंस में पढ़े हैं. पढ़ाई के दौरान उन्होंने एक्सिस म्यूचुअल फंड में इंटर्नशिप भी की. 2012 में वह डेलॉइट में एनालिस्ट रहे. इसके बाद उन्होंने Citizens for Accountable Governance के संस्थापक सदस्यों में से एक के रूप में काम किया, जो बाद में I-PAC बना. आज प्रतीक जैन I-PAC के डायरेक्टर हैं और साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के IT सेल के प्रमुख भी हैं, जिसकी पुष्टि खुद ममता बनर्जी ने की है.
TMC और I-PAC का रिश्ता
2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से I-PAC लगातार TMC के साथ काम कर रहा है. 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की बड़ी जीत में I-PAC की रणनीति अहम मानी गई.
I-PAC सिर्फ चुनावी अभियान में मदद नहीं करता, बल्कि उम्मीदवार चयन, डिजिटल रणनीति और जमीनी फीडबैक में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसका सीधा तालमेल TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और उनके कार्यालय से बताया जाता है. I-PAC आधुनिक भारतीय राजनीति में डेटा और रणनीति के बढ़ते प्रभाव की मिसाल है. ममता बनर्जी की जीत से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक, इसका नाम लगातार चर्चा में रहा है.
ED की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है. आरोप है कि घोटाले का पैसा I-PAC तक पहुंचा. ED के अनुसार, अनूप माझी और उनके साथियों ने कोयला चोरी से मिले काले धन को गोवा भेजा. 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में यह पैसा TMC के प्रचार के लिए I-PAC को दिया गया. ED ने I-PAC से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए.
ममता बनर्जी का बयान
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बताया. उनका कहना है कि एजेंसी उनकी पार्टी के चुनावी दस्तावेज, उम्मीदवारों की सूची और रणनीति से जुड़े डेटा को जब्त करना चाहती थी. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है. ममता बनर्जी ने ED पर आरोप लगाया कि उन्हें उनकी पार्टी और चुनावी रणनीति को कमजोर करने के लिए निशाना बनाया गया है.
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