PSLV-C62 का अंतरिक्ष हादसा: आखिर अंतरिक्ष में कैसे खो गया ISRO का PSLV-C62? अन्वेषा समेत 16 सैटेलाइट खोने से ISRO और भारत को भारी झटका
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, January 13, 2026
Updated On: Tuesday, January 13, 2026
PSLV-C62 : जनवरी 2026 में ISRO का PSLV-C62 मिशन अंतरिक्ष में तीसरे स्टेज में फेल हो गया. इस असफलता में DRDO का अन्वेषा सैटेलाइट और 15 अन्य सैटेलाइट खो गए, जिससे भारत को करीब 800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. PSLV के लगातार दो मिशन फेल होने से ISRO की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं. अब मिशन की पूरी जांच कर भविष्य की तैयारी की जा रही है.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Tuesday, January 13, 2026
PSLV-C62 : जनवरी 2026 की शुरुआत भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रही. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से ISRO ने PSLV-C62 लॉन्च किया था, जिसमें कुल 16 सैटेलाइट थे. इनमें सबसे महत्वपूर्ण था DRDO का EOS-N1 सैटेलाइट, जिसे आम फहम भाषा में ‘अन्वेषा’ कहा जाता है. यह सैटेलाइट भारतीय सेना के लिए बेहद जरूरी था, जो दुश्मन देशों की निगरानी कर सकता था और खुफिया जानकारी जुटा सकता था. पहले दो स्टेज तक सब सही था, लेकिन तीसरे स्टेज में गड़बड़ी के कारण रॉकेट रास्ता भटक गया और सभी सैटेलाइट अंतरिक्ष में खो गए.
PSLV की मिसाल: विश्वभर में विश्वसनीय रॉकेट
PSLV यानी पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल, ISRO का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाता है. इसके सफलता का औसत 95% से भी ज्यादा है. PSLV ने 63 मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया है. चाहे चंद्रयान-1, मंगलयान, आदित्य-L1 या एस्ट्रोसैट की बात हो, PSLV ने हर बार मिशन सफल किया. साल 2017 में इसने एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च करके वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया था. इसलिए PSLV-C62 की असफलता ने सभी को चौंका दिया.
अन्वेषा और 16 सैटेलाइट्स का मिशन
PSLV-C62 के साथ कुल 16 सैटेलाइट्स लॉन्च होने थे. इसमें DRDO का EOS-N1 (अन्वेषा) शामिल था, जो भारतीय सेना के लिए अहम था. यह सैटेलाइट 600 किलोमीटर की ऊंचाई से दुश्मन देशों की निगरानी कर सकता था, तस्वीरें खींच सकता था और सेना के लिए रणनीति तय करने में मदद करता. इसके अलावा बाकी 14 सैटेलाइट्स को 512 किलोमीटर की ऊंचाई पर Sun-Synchronous Orbit (SSO) में स्थापित किया जाना था. इन सभी सैटेलाइट्स की खो जाने से भारत को भारी झटका लगा.
मिशन कहां हुआ फेल?
PSLV-C62 मिशन कुल 6485 सेकेंड का था और इसमें चार स्टेज थे. पहले दो स्टेज ठीक काम कर रहे थे, लेकिन तीसरे स्टेज में 494 सेकेंड के आसपास गड़बड़ी आ गई. ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि इसी वजह से रॉकेट रास्ता भटक गया और मिशन फेल हो गया. इस असफलता के कारण अन्वेषा समेत सभी 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में खो गए.
भारत को हुए आर्थिक और रणनीतिक नुकसान
इस असफलता की वजह से भारत को करीब 800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. अन्वेषा सैटेलाइट भारतीय सेना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था. इससे पाकिस्तान और चीन की निगरानी करने की योजना अधूरी रह गई. इससे पहले 18 मई 2025 को PSLV-C61 मिशन भी इसी तरह फेल हुआ था, जब तीसरे स्टेज में गड़बड़ी आ गई थी.
लगातार दो फेल मिशन: PSLV की विश्वसनीयता पर सवाल
PSLV के लगातार दो मिशन फेल होने के बाद ISRO पर सवाल उठने लगे हैं. PSLV हमेशा विश्वसनीय माना जाता रहा है, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय साझेदार इसकी विश्वसनीयता पर फिर से सोच सकते हैं. इसके अलावा इस साल Gaganyaan और Chandrayaan जैसे मिशन भी हैं, जिन पर इस असफलता का असर पड़ सकता है.
भविष्य की योजना और सुधार की दिशा
ISRO ने पहले ही घोषणा कर दी है कि PSLV-C62 की असफलता की पूरी जांच की जा रही है. रॉकेट के तीसरे स्टेज में क्या गड़बड़ी हुई, इसे समझकर भविष्य के मिशनों को सुरक्षित बनाने की योजना बनाई जाएगी. ISRO का लक्ष्य अब अगले मिशनों को और अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बनी रहे.
निष्कर्ष: भारत के लिए एक सीख
PSLV-C62 की असफलता एक बड़ा झटका है, लेकिन यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक सीख भी है. तकनीकी चुनौतियों को पहचानना और सुधार करना ही किसी भी स्पेस एजेंसी की मजबूती का संकेत है. भारत ने पहले भी कई बार अंतरिक्ष में चुनौतियों का सामना किया है और हर बार आगे बढ़ा है. उम्मीद है कि ISRO अगली बार PSLV और अन्य मिशनों को और भी सफल बनाएगा.
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