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Basant Panchami 2026: कब मनाई जाएगी बसंत पंचमी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, January 22, 2026
Last Updated On: Thursday, January 22, 2026
Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी 2026 ज्ञान, प्रकृति और नई ऊर्जा के स्वागत का पर्व है, जिसे मां सरस्वती की आराधना के रूप में मनाया जाता है. माघ शुक्ल पंचमी तिथि के अनुसार यह पर्व 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है और शिक्षा, कला व बुद्धि की कामना के साथ लोग मां सरस्वती से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि…..
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, January 22, 2026
Basant Panchami 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला बसंत पंचमी का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है. यह दिन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, कला, संगीत और प्रकृति के नवजागरण का प्रतीक है. इसी दिन विद्या की देवी मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे सरस्वती पूजा के रूप में भी पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. वर्ष 2026 में भी लोगों के मन में यह सवाल है कि बसंत पंचमी 22 जनवरी को है या 23 जनवरी को, आइए इस भ्रम को पंचांग के अनुसार समझते हैं.
बसंत पंचमी 2026 की तिथि को लेकर कंफ्यूजन क्यों?
हर साल की तरह इस बार भी पंचमी तिथि दो दिनों में पड़ रही है, जिस कारण लोगों में असमंजस बना हुआ है. हिंदू धर्म में किसी भी पर्व को मनाने के लिए उदया तिथि को महत्व दिया जाता है. यानी जिस दिन सूर्योदय के समय संबंधित तिथि हो, उसी दिन त्योहार मनाना शास्त्रसम्मत माना जाता है. यही कारण है कि पंचमी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय जानना जरूरी हो जाता है.
कब है बसंत पंचमी: 22 या 23 जनवरी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पंचमी तिथि का आरंभ 22 जनवरी की शाम 06:15 बजे से हो रहा है. वहीं, पंचमी तिथि का समापन 23 जनवरी की रात 08:30 बजे होगा. चूंकि 23 जनवरी को सूर्योदय के समय पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का पर्व 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को ही मनाया जाएगा. इस दिन पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है.
Saraswati Puja 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त
मां सरस्वती की पूजा के लिए प्रातःकाल का समय सर्वोत्तम माना गया है. 23 जनवरी 2026 को सरस्वती पूजा का शुभ समय सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा. इसके अलावा अमृत काल सुबह 08:45 से 10:20 बजे तक रहेगा, जो विशेष रूप से शुभ माना जाता है. विद्यार्थी, कलाकार और शिक्षक इस समय में पूजा कर मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.
शुभ समय:
- पूजा का समय: सुबह 07:13 से दोपहर 12:33 तक
- अमृत काल: सुबह 08:45 से 10:20 तक
पढ़ाई और कला कार्य शुरू करने का उत्तम समय
सरस्वती पूजा की सरल और प्रभावी विधि
बसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें, क्योंकि पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. घर के पूजा स्थान पर चौकी रखें, उस पर पीला कपड़ा बिछाएं और मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. साथ में भगवान गणेश को भी विराजमान करना शुभ होता है. मां के सामने कलश रखें, दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें.
पूजा की विधि:
- पीले वस्त्र धारण करें
- चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं
- मां सरस्वती और गणेश जी की स्थापना
- धूप-दीप जलाकर पूजा करें
मां सरस्वती को क्या चढ़ाएं और क्या करें?
मां सरस्वती को पीले फूल जैसे गेंदा या सरसों, पीला चंदन, अक्षत और केसर अर्पित करें. इस दिन किताबें, कॉपी, कलम और संगीत वाद्ययंत्र मां के चरणों में रखकर पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है. बच्चों के लिए अक्षर अभ्यास की शुरुआत करने के लिए यह दिन सबसे उत्तम है. भोग में पीले मीठे चावल, बूंदी के लड्डू या केसरिया हलवा अर्पित करें और अंत में मां की आरती करें.
भोग और अर्पण:
- पीले फूल (गेंदा, सरसों)
- पीला चंदन, अक्षत, केसर
- पीले मीठे चावल, बूंदी के लड्डू
- किताबें, कलम और वाद्ययंत्र
बसंत पंचमी का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जड़ता से चेतना की ओर बढ़ने का उत्सव है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की तो चारों ओर मौन था. तभी मां सरस्वती प्रकट हुईं और उनके वीणा वादन से सृष्टि में वाणी, संगीत और ज्ञान का संचार हुआ. यही कारण है कि इस दिन ज्ञान, कला और बुद्धि को मां सरस्वती के चरणों में समर्पित किया जाता है.
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