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1 अप्रैल से बदलेंगे इनकम टैक्स के बड़े नियम, निवेश, शेयर बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा कितना असर?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, February 7, 2026
Last Updated On: Saturday, February 7, 2026
Income Tax Rules Change: नया वित्तीय वर्ष 2026-27 टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े बदलाव लेकर आ रहा है. 1 अप्रैल से शेयर बायबैक, शेयर ट्रेडिंग, डिविडेंड, म्यूचुअल फंड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, TDS-TCS, ITR डेडलाइन और प्रॉपर्टी से जुड़े नियम बदल जाएंगे. जानें आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर?
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, February 7, 2026
Income Tax Rules Change: नया कारोबारी साल 2026-27 एक अप्रैल से शुरू होने जा रहा है और इसके साथ ही इनकम टैक्स एक्ट, 2025 भी लागू हो जाएगा. इस नए कानून के तहत टैक्स, निवेश, शेयर बाजार, टीडीएस-टीसीएस, प्रॉपर्टी और कंपनियों से जुड़े कई अहम नियमों में बदलाव किए गए हैं. इन बदलावों का असर सिर्फ बड़े निवेशकों पर नहीं, बल्कि सैलरी पाने वाले लोगों, छोटे निवेशकों, बिजनेस करने वालों और आम टैक्सपेयर्स की जेब पर भी साफ दिखाई देगा. इसलिए जरूरी है कि आप इन नए नियमों को समय रहते समझ लें.
शेयर बायबैक पर बदला टैक्स का खेल
अब तक कंपनियों के शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को डिविडेंड इनकम माना जाता था और उस पर टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता था. लेकिन 1 अप्रैल, 2026 से शेयर बायबैक से होने वाली कमाई को कैपिटल गेन माना जाएगा. यानी अब टैक्स की गणना शेयर की खरीद कीमत और होल्डिंग पीरियड के आधार पर होगी. इससे उन निवेशकों पर असर पड़ेगा जो लंबे समय तक शेयर होल्ड करते हैं.
STT में बढ़ोतरी से ट्रेडिंग होगी महंगी
शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए यह बदलाव थोड़ा भारी पड़ सकता है. फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है. वहीं, ऑप्शंस ट्रेडिंग में भी राहत नहीं दी गई है और ऑप्शन प्रीमियम पर STT 0.10% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है. इसका मतलब है कि ज्यादा ट्रेडिंग करने वालों की लागत बढ़ेगी.
डिविडेंड और म्यूचुअल फंड इनकम पर झटका
अब डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से मिलने वाली इनकम पर ब्याज खर्च के लिए कोई टैक्स डिडक्शन नहीं मिलेगा, भले ही आपने निवेश उधार के पैसे से किया हो. पहले इस खर्च पर टैक्स में राहत मिलती थी, लेकिन 1 अप्रैल, 2026 से यह सुविधा खत्म हो जाएगी.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के नियम हुए सख्त
नए नियमों के तहत टैक्स छूट सिर्फ उन्हीं SGB पर मिलेगी जो सीधे सरकार से खरीदे गए हों. सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए बॉन्ड्स पर रिडेम्पशन के समय कैपिटल गेन टैक्स देना होगा. यानी टैक्स-फ्री रिटर्न के लिए निवेशकों को मैच्योरिटी तक इंतजार करना जरूरी होगा.
एक ही डिक्लेरेशन से मिलेगा TDS से छुटकारा
अब टैक्सपेयर्स को बार-बार अलग-अलग फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी. म्यूचुअल फंड, डिविडेंड और बॉन्ड जैसी इनकम के लिए एक ही डिक्लेरेशन सबमिट करके TDS से बचा जा सकेगा. इससे पेपरवर्क कम होगा और कंप्लायंस आसान बनेगा.
NRI से प्रॉपर्टी खरीदना हुआ आसान
अब NRI से प्रॉपर्टी खरीदते समय TAN लेने की जरूरत नहीं होगी. खरीदार सिर्फ PAN के जरिए TDS काट सकेंगे. इससे क्रॉस-बॉर्डर प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन काफी सरल हो जाएंगे.
विदेश खर्च पर TCS में राहत
विदेशी टूर पैकेज पर TCS घटाकर 2% कर दिया गया है. वहीं, LRS के तहत विदेश में पढ़ाई और मेडिकल खर्चों पर TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है. इससे विदेश यात्रा और इलाज सस्ता पड़ेगा.
PF-ESI, मुआवजा और पेंशन पर राहत
अब PF और ESI में एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन पर ITR डेडलाइन तक टैक्स डिडक्शन मिलेगा. वहीं, मोटर दुर्घटना मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री होगा. इसके अलावा, सशस्त्र बलों के जवानों की पूरी विकलांगता पेंशन टैक्स-फ्री कर दी गई है.
ITR डेडलाइन और MAT में बदलाव
बिना ऑडिट वाले बिजनेस अब 31 अगस्त तक ITR फाइल कर सकेंगे, जबकि रिवाइज्ड रिटर्न की डेडलाइन 31 मार्च कर दी गई है. कंपनियों के लिए 14% MAT को फाइनल टैक्स घोषित किया गया है, हालांकि पुराने MAT क्रेडिट का इस्तेमाल 31 मार्च, 2026 तक किया जा सकेगा.
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