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सपा सांसद बाबूलाल कुशवाहा की जब्त संपत्ति को ईडी ने कराया कब्जामुक्त, विपक्ष हुआ लाल
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Saturday, August 3, 2024
Last Updated On: Sunday, August 4, 2024
जौनपुर के सपा सांसद बाबूलाल कुशवाहा की लखनऊ स्थित एक संपत्ति को ईडी ने कब्जा मुक्त कराने के लिए बुलडोजर चलवाया है। सूत्रों की मानें तो सांसद ने अपने ही लोगों से ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्ति पर कब्जा करवाया था।
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Sunday, August 4, 2024
जुलाई की 30 तारीख को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जौनपुर से सांसद बाबूलाल कुशवाहा को लोकसभा का उपनेता बनाया था। उनके समर्थक जय-जयकार करने लगे। लेकिन दो दिन बाद ही ईडी ने ऐसा नकेल कसा कि उनके समर्थक छटपटाने लगे। दरअसल, वर्ष 2014 में कुशवाहा की लखनऊ में स्थित करोड़ों की संपत्ति (40 बीघा जमीन) ईडी ने जब्त किया था। कुछ वर्षों बाद कानपुर रोड पर स्थित उक्त जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा होने लगा। कई तो पक्का निर्माण भी कर लिया था। कुछ समय पहले ईडी को इसकी भनक लगी। अब ईडी ने उस जमीन से कब्जा हटाया है। वहां हुए पक्का निर्माण पर बुलडोजर चलाकर ईडी ने उसे फिर से अपने कब्जे में लिया है।
ईडी(ED) की इस कार्रवाई पर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष ने माहौल ऐसा बनाया कि उससे संदेश गया कि जांच एजेंसी ने सांसद की संपत्ति अभी जब्त की है। जबकि उक्त संपत्ति को 2014 में ही ईडी ने जब्त किया था। सूत्रों की मानें तो जमीन पर कब्जा सांसद सदस्य ने ही अपने लोगों से करवाया था। जब ईडी को इसकी जानकारी मिली तो वहां से कब्जा हटाया गया। विपक्ष के नेता ईडी की इस कार्रवाई को भी राजनीतिक से प्रेरित बताने से नहीं चुके। लेकिन आरोप लगाने वाले नेता शायद वर्ष 2012 का एनआरएचएम (NHRM) घोटाला भूल गए। या फिर भूलने का नाटक कर रहे हैं। तब एनआरएचएम घोटाला देश का सबसे बाद घोटाला था।
जब्त संपत्ति को कब्जा मुक्त कराया
बाबूलाल कुशवाहा सपा के मुखिया अखिलेश यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं। कहा जाता है इसलिए अखिलेश लोकसभा में पार्टी के नेता हैं तो उन्हें उपनेता बनाया। अब ईडी ने उनके करीबी सांसद कुशवाहा पर बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ईडी ने बाबूलाल कुशवाहा के लखनऊ स्थित कानपुर रोड पर स्कूटर इंडिया स्थित करोड़ों की संपत्ति (40 बीघा जमीन) को वर्ष 2014 में जब्त किया था। उस जब्त जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था। उस कब्जे को ईडी ने हटाया तो उत्तर प्रदेश में राजनीति गरमा गई है। कुशवाहा पर कार्रवाई कोई पहली बार नहीं हुई है। पिछले 12 सालों से उनके खिलाफ कई बार कार्रवाई हो चुकी है। वे लंबे समय तक जेल में भी रह चुके हैं। उनके लखनऊ, जौनपुर और दिल्ली स्थित उनकी संपत्ति पर छापेमारी हुई थी। इनके खिलाफ भी पीएमएलए के तहत कार्रवाई हो रही है।
बसपा से सपा में आए थे कुशवाहा
कुशवाहा ने बसपा से राजनीति शुरू की थी। वे कांशीराम राम के साथ जुड़े थे। संगठन में जिला अध्यक्ष सहित कई पदों पर कांशीरम के जरिए ही वे मायावती के संपर्क में आए। इसलिए मायावती ने इन्हें विधान परिषद में भेजा। दो बार ये मायावती की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। परिवार कल्याण मंत्री बनने के बाद इनका नाम एनआरएचएम घोटाले के साथ जुड़ा। यह कई हजार करोड़ का घोटाला था। तब सपा सहित भाजपा और कांग्रेस ने एनआरएचएम घोटाले के खूब उछाला था। जिस कारण 2012 विधानसभा चुनाव से पहले मायावती ने इन्हें पार्टी से निकाल दिया। इसके बाद वे 24 घंटे से भी भाजपा में रहे लेकिन आरोप लगाने वाले अखिलेश यादव ने इन्हें और इनके परिवार को राजनीतिक संरक्षण दिया। कुशवाहा के जेल जाने पर इनकी पत्नी को टिकट दिया। इस तरह मायावती के करीबी आज अखिलेश यादव के करीबी बने हुए हैं।
एनआरएचएम (NRHM) घोटाला बना चुनावी मुद्दा
कुशवाहा के परिवार को राजनीतिक संरक्षण देने के बाद भी 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा ने एनआरएचएम घोटाला को मुद्दा बनाया। इसका नुकसान मायावती को हुआ भी। मायावती वह चुनाव हार गई और सपा पूर्ण बहुमत में आई। अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने। उस चुनाव में कांग्रेस सांसद राहुल का कुशवाहा को लेकर एक बयान बहुत चर्चित हुआ था। राहुल गांधी ने तब कहा था कि कुशवाहा पहले कांग्रेस में शामिल होने के लिए उनके नेताओं के चक्कर लगा रहे थे। लेकिन पार्टी ने एक भ्रष्ट नेता को सही रास्ता बता दिया। आज वही राहुल गांधी और अखिलेश यादव उसी एनआरएचएम घोटाले पर हुई कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। जबकि इस घोटाले में ईडी ने 14 फरवरी 2012 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत कुशवाहा और उनके सहयोगियों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
क्या है एनआरएचएम घोटाला (What is NRHM Scam)
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनने के लिए शुरू किया गया था। तब केन्द्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को एनआरएचएम के तहत 10 हजार करोड़ रुपए दी थी। इससे ग्रामीण इलाकों में 133 अस्पतालों का ढांचागत विकास, दवाइयाँ, आरओ आदि आपूर्ति के नाम पर पांच हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला सामने आया था। इसकी जांच सीबीआई ने शुरू की। बाद में इसकी जांच ईडी भी करने लगी। यह सब सामने आया, लखनऊ में दो सीएमओ की हत्या और जेल में एक डिप्टी सीएमओ की संदिग्ध मौत ने कई राज खोले। बताया जाता है की सीएमओ और डिप्टी सीएमओ ईमानदार अधिकारी था। वे कुशवाहा की बातों को मानने से इंकार कर दिया था









