मयनागुड़ी विधानसभा चुनाव 2026: क्या बीजेपी बचाएगी सीट या टीएमसी करेगी दमदार वापसी, जानें सियासी समीकरण

Authored By: Nishant Singh

Published On: Tuesday, March 3, 2026

Last Updated On: Tuesday, March 3, 2026

Maynaguri Assembly Elections 2026 में बीजेपी और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर, जानें ताजा सियासी समीकरण.
Maynaguri Assembly Elections 2026 में बीजेपी और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर, जानें ताजा सियासी समीकरण.

Maynaguri Assembly Election 2026: मयनागुड़ी विधानसभा सीट 2026 में फिर सियासी चर्चा के केंद्र में है. 2021 में बीजेपी ने यहां पहली बार जीत दर्ज की थी, जबकि इससे पहले टीएमसी और वाम दलों का दबदबा रहा. बदलते वोट प्रतिशत, जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दे इस बार भी मुकाबले को बेहद रोचक बना रहे हैं.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Tuesday, March 3, 2026

Maynaguri Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे उत्तर बंगाल की सीटें फिर से चर्चा में हैं. उन्हीं में से एक है मयनागुड़ी विधानसभा सीट. जलपाईगुड़ी जिले में स्थित यह सीट जलपाईगुड़ी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है. यहां की राजनीति हमेशा राज्य की बदलती हवाओं का संकेत देती रही है. 2021 में यहां जो राजनीतिक उलटफेर हुआ, उसने पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया था. अब 2026 में सवाल यही है कि क्या बीजेपी अपना किला बचा पाएगी या फिर टीएमसी वापसी करेगी?

2021: जब पहली बार खिला कमल

2021 के विधानसभा चुनाव मयनागुड़ी के इतिहास में एक बड़ा मोड़ लेकर आए. पहली बार इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की. बीजेपी के उम्मीदवार कौशिक राय ने 1,15,306 वोट हासिल कर 48.84 प्रतिशत मतों के साथ जीत दर्ज की. उनके सामने तृणमूल कांग्रेस के मनोज राय थे, जिन्हें 1,03,395 वोट यानी 43.79 प्रतिशत वोट मिले. जीत का अंतर भले बहुत बड़ा न रहा हो, लेकिन यह प्रतीकात्मक रूप से बेहद अहम था. इस जीत ने यह संकेत दिया कि उत्तर बंगाल में बीजेपी की पकड़ मजबूत हो रही है और पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगी है.

2016: टीएमसी की मजबूत पकड़

अगर हम 2016 के चुनावी नतीजों पर नजर डालें, तो तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है. उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के अनंत देब अधिकारी ने 1,00,837 वोट यानी 47.85 प्रतिशत मतों के साथ जीत दर्ज की थी. उनके मुकाबले रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) की छाया डे (रॉय) को 65,930 वोट मिले थे. बीजेपी उस समय तीसरे स्थान पर रही थी और उसे 30,742 वोट मिले थे. यानी 2016 तक यह सीट टीएमसी के मजबूत प्रभाव में थी, जबकि वाम दलों की भी अच्छी-खासी पकड़ बनी हुई थी.

74 साल का सियासी इतिहास

1951 में स्थापित मयनागुड़ी सीट का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. पिछले 74 वर्षों में यहां 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2014 का उपचुनाव भी शामिल है. शुरुआती दौर में 1951 से 1972 के बीच कांग्रेस और बांग्ला कांग्रेस का दबदबा रहा. कांग्रेस ने पांच बार और बांग्ला कांग्रेस ने दो बार जीत दर्ज की. इसके बाद 1977 से 2011 तक रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने लगातार आठ कार्यकाल तक यहां जीत हासिल कर इसे वामपंथ का गढ़ बना दिया.

लेकिन 2014 के उपचुनाव और फिर 2016 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने इस किले को फतह कर लिया. और फिर 2021 में बीजेपी ने पहली बार जीत दर्ज कर इतिहास बदल दिया. यानी यह सीट हर दशक में नई राजनीतिक कहानी लिखती रही है.

वोट प्रतिशत और बदलाव की कहानी

अगर आंकड़ों की गहराई में जाएं तो 2016 से 2021 के बीच बीजेपी के वोट शेयर में जबरदस्त उछाल देखने को मिला. 2016 में जहां पार्टी को लगभग 14 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं 2021 में यह आंकड़ा 48 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच गया. दूसरी ओर टीएमसी का वोट प्रतिशत मामूली गिरावट के साथ दूसरे स्थान पर चला गया. यह बदलाव बताता है कि मतदाताओं के बीच राजनीतिक झुकाव तेजी से बदला है.

जातीय और सामाजिक समीकरण

मयनागुड़ी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, इसलिए यहां दलित, राजबंशी और चाय बागान मजदूर समुदाय की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. स्थानीय मुद्दों में रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य सुविधाएं, सिंचाई और बाढ़ की समस्या प्रमुख रहती है. सीमावर्ती इलाका होने के कारण सुरक्षा और पहचान की राजनीति भी यहां असर डालती है.

टीएमसी राज्य सरकार की योजनाओं जैसे सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहायता योजनाओं को मुद्दा बनाती है, जबकि बीजेपी केंद्र की योजनाओं और राष्ट्रीय मुद्दों को आगे रखती है. वाम दलों का पारंपरिक वोट बैंक भले कमजोर पड़ा हो, लेकिन त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति में वे निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

2026 में अहम फैक्टर क्या होंगे?

2026 के चुनाव में कुछ प्रमुख फैक्टर असर डाल सकते हैं:

  • उम्मीदवार की छवि और स्थानीय पकड़
  • संगठन की मजबूती और बूथ स्तर की रणनीति
  • युवा मतदाताओं का रुझान
  • चाय बागान और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य
  • राज्य बनाम केंद्र की योजनाओं की तुलना

अगर मुकाबला सीधा बीजेपी और टीएमसी के बीच रहा तो हर प्रतिशत वोट की अहमियत होगी. वहीं अगर वाम दल या अन्य उम्मीदवार मजबूती से मैदान में उतरते हैं, तो समीकरण और रोचक हो सकते हैं.

क्या कहती है जमीनी हवा?

स्थानीय राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मयनागुड़ी में मतदाता बदलाव से परहेज नहीं करते. यहां मुद्दों के आधार पर वोटिंग का रुझान देखा गया है. 2021 में जिस तरह सत्ता परिवर्तन हुआ, उसने यह साफ कर दिया कि यहां कोई भी पार्टी स्थायी रूप से अजेय नहीं है.

अब 2026 में सबकी नजरें इस सीट पर टिकी हैं. क्या बीजेपी अपनी पहली जीत को बरकरार रख पाएगी? क्या टीएमसी वापसी कर अपने पुराने गढ़ को फिर से मजबूत करेगी? या फिर कोई तीसरी ताकत समीकरण बिगाड़ देगी? मयनागुड़ी की जनता ही तय करेगी कि इस बार किसका जादू चलेगा और कौन बनेगा इस सियासी रण का विजेता.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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