यूपी में UCC लागू हुआ तो क्या बदलेगा? शादी, तलाक और संपत्ति के नियमों पर पूरी जानकारी.

Authored By: Galgotias Times Bureau

Published On: Saturday, October 31, 2026

Last Updated On: Saturday, October 31, 2026

उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता UCC लागू होने पर शादी तलाक और संपत्ति के नियमों में संभावित बदलाव
उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता UCC लागू होने पर शादी तलाक और संपत्ति के नियमों में संभावित बदलाव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार दोबारा बनने पर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी. इस बयान के बाद शादी, तलाक, बहुविवाह, संपत्ति में हिस्सेदारी और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े संभावित बदलावों पर चर्चा तेज हो गई है. उत्तराखंड में लागू UCC इसके संभावित स्वरूप को समझने का एक उदाहरण है, लेकिन यूपी में लागू होने वाले नियमों का अंतिम स्वरूप अभी तय नहीं है.

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Last Updated On: Saturday, October 31, 2026

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. 30 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अगर बीजेपी दोबारा सत्ता में आती है, तो यूपी में UCC लागू किया जाएगा. इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि अगर ऐसा कानून आता है, तो शादी, तलाक, संपत्ति के बंटवारे और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों में क्या बदलाव हो सकते हैं. उत्तराखंड में 2024 में UCC कानून पारित हुआ और 2025 में इसे लागू किया गया. वहां के कानून से कुछ संभावित बदलावों को समझा जा सकता है, लेकिन यूपी के लिए अलग कानून या नियम बनने पर ही स्पष्ट होगा कि कौन-से प्रावधान लागू होंगे.

UCC क्या है और इसे लागू करने की चर्चा क्यों हो रही है?

समान नागरिक संहिता का मतलब ऐसे नागरिक कानूनों से है, जिनके तहत अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार और परिवार से जुड़े कुछ मामलों में समान नियम बनाए जाते हैं. फिलहाल भारत में इन मामलों पर अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानून भी लागू होते हैं. संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है. हालांकि, इसे लागू करने के लिए संबंधित कानून बनाना जरूरी है.

क्या एक से ज्यादा शादी करने पर लगेगी रोक?

उत्तराखंड के UCC में शादी के समय किसी भी पक्ष का जीवित जीवनसाथी होना विवाह की शर्तों के खिलाफ है. इस प्रावधान से कानून के दायरे में आने वाले लोगों के लिए एक से अधिक विवाह पर रोक लगती है.
अगर यूपी में भी इसी तरह का प्रावधान लागू किया जाता है, तो मुस्लिम पुरुषों समेत संबंधित समुदायों के लोगों के लिए एक से अधिक शादी करने के नियम बदल सकते हैं. लेकिन यह बदलाव यूपी में बनने वाले कानून के वास्तविक प्रावधानों पर निर्भर करेगा.

शादी और तलाक के नियमों में क्या बदलाव हो सकता है?

उत्तराखंड के UCC में पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल निर्धारित है. विवाह का पंजीकरण भी अनिवार्य है और इसके लिए 60 दिनों की समयसीमा दी गई है.
तलाक के मामले में उत्तराखंड का कानून न्यायिक प्रक्रिया के जरिए विवाह समाप्त करने का प्रावधान करता है. यदि यूपी में भी इसी तरह के नियम बनाए जाते हैं, तो तलाक के लिए कानूनी प्रक्रिया सभी संबंधित समुदायों पर समान रूप से लागू हो सकती है.

क्या तलाक के बाद हलाला की जरूरत खत्म हो जाएगी?

यह मुस्लिम समुदाय से जुड़ा एक अहम सवाल है. उत्तराखंड के UCC में विवाह और तलाक को लेकर व्यक्तिगत कानूनों से अलग समान कानूनी प्रावधान बनाए गए हैं. ऐसे कानून के तहत दोबारा विवाह के लिए लागू शर्तें भी संबंधित संहिता के अनुसार तय होती हैं. हालांकि, यूपी में UCC लागू होने की स्थिति में हलाला से जुड़े सवालों पर अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जा सकेगा, जब वहां के कानून का वास्तविक पाठ सामने आएगा. उत्तराखंड के प्रावधानों को बिना जांचे यूपी पर लागू मानना उचित नहीं होगा.

संपत्ति और विरासत में क्या बदलेगा?

UCC का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संपत्ति के उत्तराधिकार से जुड़ा है. उत्तराखंड में विरासत के लिए समान कानूनी व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें संपत्ति पाने वाले उत्तराधिकारियों के वर्ग और उनके अधिकार निर्धारित किए गए हैं. यदि यूपी में भी इसी तरह के प्रावधान लागू होते हैं, तो अलग-अलग समुदायों में संपत्ति के बंटवारे के मौजूदा नियम बदल सकते हैं. वसीयत के जरिए संपत्ति देने के नियमों पर भी असर पड़ सकता है. लेकिन मुस्लिम महिलाओं या अन्य उत्तराधिकारियों को कितना हिस्सा मिलेगा, यह यूपी में प्रस्तावित कानून के प्रावधानों को देखे बिना तय नहीं किया जा सकता.

लिव-इन रिलेशनशिप पर भी लागू हो सकते हैं नियम

उत्तराखंड के UCC में लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का प्रावधान है. इसमें निर्धारित समयसीमा और कानूनी शर्तों का पालन करना होता है. यदि यूपी में ऐसा ही प्रावधान शामिल किया जाता है, तो लिव-इन में रहने वाले जोड़ों पर भी पंजीकरण संबंधी जिम्मेदारियां लागू हो सकती हैं.

यूपी में UCC कब लागू होगा?

फिलहाल अमित शाह का बयान बीजेपी की सरकार दोबारा बनने पर UCC लागू करने की राजनीतिक प्रतिबद्धता है. इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि कानून अभी लागू हो गया है. इसके लिए कानून बनाने और उसे लागू करने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

कुल मिलाकर, यूपी में UCC लागू होने पर शादी, तलाक, बहुविवाह, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों में बदलाव संभव है. लेकिन उत्तराखंड के कानून को यूपी का अंतिम मॉडल मानना जल्दबाजी होगी. असली तस्वीर तभी स्पष्ट होगी, जब उत्तर प्रदेश के लिए प्रस्तावित कानून और उसके नियम सामने आएंगे.

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