मनीष सिसोदिया के फिर से मंत्री बनने में कौन-कौन सी हैं बाधाएं

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Sunday, August 11, 2024

Former Deputy Chief Minister of Delhi Manish Sisodia
Former Deputy Chief Minister of Delhi Manish Sisodia

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया करीब 17 महीने बाद जेल से रिहा हो चुके हैं। जेल से बाहर आने के बाद वे भाजपा पर हमलावर हो चुके हैं। लेकिन लाख टके का सवाल यही है कि वे केजरीवाल कैबिनेट में कब शामिल होंगे।

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Sunday, August 11, 2024

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Former Deputy Chief Minister of Delhi Manish Sisodia) करीब 17 महीने बाद जेल से रिहा हो चुके हैं। जेल से बाहर आने के बाद वे भाजपा पर हमलावर हो चुके हैं। लेकिन लाख टके का सवाल यही है कि वे केजरीवाल कैबिनेट में कब शामिल होंगे। उनकी रिहाई के दो दिन बाद भी अभी तक कम से कम आम आदमी पार्टी की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Rajya Sabha Member of Parliament Sanjay Singh) से भी इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। ऐसे में इस सवाल का जवाब कानूनी विशेषज्ञों एवं राजनीति के जानकारों से ही मिल सकता है।

क्या कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ

कानूनों के विशेषज्ञ का मानना है कि मनीष सिसोदिया के लिए कैबिनेट में स्थान मिलना पहले इतना आसान नहीं है। इसका सबसे बाद कारण है खुद मुख्यमंत्री का जेल में होना। कैबिनेट के सदस्यों का नाम मुख्यमंत्री तय करते हैं। उनके अलावा किसी और के पास यह अधिकार नहीं है। चूंकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अभी जेल में हैं, इसलिए उनकी अनुमति के बिना सिसोदिया मंत्री नहीं बन सकते।

उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता कमलेश जैन कहती है, ‘बेशक कैबिनेट सदस्यों के नाम मुख्यमंत्री तय करते हैं लेकिन अभी मुख्यमंत्री केजरीवाल (Chief Minister Kejriwal) यह कार्य नहीं कर सकते। क्योंकि जेल में सरकार से संबंधित कोई भी निर्णय वे नहीं ले सकते। लोकसभा चुनाव के दौरान जब केजरीवाल अंतरिम जमानत पर बाहर आए थे, तब भी उन पर यही पाबंदियां लगी हुई थी। यहां तक कि वे सचिवालय भी नहीं जा सकते थे।’ वे आगे बताती हैं, ‘इसके लिए केजरीवाल को फिर से कोर्ट जाना होगा और वहां से उन्हें इससे संबंधित अनुमति लेनी होगी। अदालत यदि अनुमति देती है तो फिर वे मनीष को कैबिनेट में शामिल करने वाले पत्र पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। दूसरा, केजरीवाल खुद जमानत पर बाहर आ जाएं और उन पर सरकार चलाने की पाबंदियां हट जाए तो फिर मनीष सिसोदिया मंत्री बन सकते हैं।

अभी नहीं हुए हैं आरोप मुक्त?

वहीं राजनीतिक जानकारों का कुछ और भी कहना है। वे कहते हैं कि यदि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन्हें मंत्रिपरिषद में शामिल करने की मंजूरी से भी देते हैं तब भी मनीष सिसोदिया के मंत्री बनने में एक पेंच है। वह पेंच उपराज्यपाल लगा सकते हैं। इनका मानना है कि मनीष सिसोदिया अभी जमानत पर छूटे हैं। आरोपमुक्त नहीं हुए हैं। इसलिए यदि मुख्यमंत्री इन्हें कैबिनेट में शामिल करने के लिए उपराज्यपाल के पास पत्र भेजते भी हैं तो उपराज्यपाल मनीष सिसोदिया पर घोटाले का आरोपी होने, उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने का हवाला देकर अनुमति न दें। ऐसी स्थिति में मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल को फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है।

राष्ट्रपति की मुहर के बाद मंत्री की नियुक्ति

केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली की व्यवस्था अन्य राज्यों से अलग है। यहां मंत्रिपरिषद के सदस्यों के नाम बेशक मुख्यमंत्री करते हैं लेकिन बिना राष्ट्रपति की मुहर के मंत्री शपथ नहीं ले सकते। यहां मुख्यमंत्री नामों की सूची उपराज्यपाल को भेजते हैं। उपराज्यपाल उन नामों पर अपनी सहमति देकर अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजते हैं। दिल्ली में राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद मंत्री की नियुक्ति से संबंधित नोटिफिकेशन जारी होता है। राष्ट्रपति का पद अभी भी गरिमामयी है। वे एक आरोपी नेता को मंत्री बनने की संस्तुति देने से बच सकती हैं। इसलिए मनीष सिसोदिया का फिर से मंत्री बनना अभी लंबा सफर है।

गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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