मानसून की मार से खेती संकट में, 42% कम बारिश पर 315 जिलों के लिए सरकार का बड़ा प्लान

Authored By: Nishant Singh

Published On: Wednesday, June 24, 2026

Categories: Weather

Last Updated On: Wednesday, June 24, 2026

Monsoon Woes के बीच सूखे खेत में खड़ा किसान. 42 प्रतिशत कम बारिश से प्रभावित खेती और 315 जिलों के लिए सरकार की नई योजना.
Monsoon Woes के बीच सूखे खेत में खड़ा किसान. 42 प्रतिशत कम बारिश से प्रभावित खेती और 315 जिलों के लिए सरकार की नई योजना.

Monsoon Woes: देश में मानसून की शुरुआत कमजोर रहने से 42% कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है. सरकार ने 315 प्रभावित जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें वैकल्पिक फसलें, जल संरक्षण, फसल बीमा और किसानों को वैज्ञानिक सलाह देने जैसे उपाय शामिल हैं.

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Last Updated On: Wednesday, June 24, 2026

Monsoon Woes: देश में मानसून की शुरुआत इस बार किसानों के लिए राहत की बजाय चिंता लेकर आई है. जून के आखिरी सप्ताह तक सामान्य से लगभग 42 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खरीफ सीजन की खेती पर दबाव बढ़ गया है. धान, सोयाबीन, दलहन और तिलहन जैसी फसलें समय पर और पर्याप्त बारिश पर निर्भर करती हैं. ऐसे में कम वर्षा ने कई राज्यों में सूखे जैसे हालात पैदा करने की आशंका बढ़ा दी है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून की रफ्तार कमजोर बनी हुई है, जिसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ सकता है.

कम बारिश के बावजूद जारी है बुवाई

हालांकि बारिश की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, फिर भी देश के कई हिस्सों में किसान बुवाई का काम जारी रखे हुए हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जून के तीसरे सप्ताह तक लगभग 12 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है. यह पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा अधिक है. हालांकि सोयाबीन जैसी कुछ प्रमुख फसलों की बुवाई अपेक्षित गति से नहीं हो पाई है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

315 जिलों पर सरकार की विशेष नजर

बारिश की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश के 315 ऐसे जिलों की पहचान की है, जहां खेती पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है. इन जिलों का चयन वर्षा, सिंचाई सुविधाओं और स्थानीय मौसम की परिस्थितियों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने के बाद किया गया है. सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे जिला स्तर पर अलग-अलग कार्ययोजना बनाएं ताकि किसानों को समय रहते मदद मिल सके और उत्पादन में गिरावट को रोका जा सके.

तीन श्रेणियों में बांटे गए जिले

सरकार ने प्रभावित जिलों को उनकी संवेदनशीलता के आधार पर तीन वर्गों में विभाजित किया है.

श्रेणी जिलों की संख्या / स्थिति
उच्च प्राथमिकता 111 – सिंचाई सुविधा 25% से कम
मध्यम प्राथमिकता 76 – सिंचाई सुविधा 25% से 50%
सामान्य संवेदनशील 128 – अपेक्षाकृत बेहतर सिंचाई व्यवस्था

इन जिलों का बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में स्थित है.

किसानों के लिए क्या है सरकार की रणनीति?

कम बारिश की स्थिति से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय और कृषि वैज्ञानिकों ने कई अहम सुझाव तैयार किए हैं. किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी जा रही है. इसके अलावा जल्दी पकने वाली और मौसम के अनुकूल बीजों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थिति में खेत खाली न रहें और किसानों की आय पर ज्यादा असर न पड़े.

दलहन, तिलहन और मोटे अनाज जैसी फसलें कम पानी में भी अच्छी उपज दे सकती हैं. इसलिए राज्यों को इन फसलों के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं.

पानी बचाने पर रहेगा सबसे ज्यादा जोर

सरकार ने राज्यों से जल संरक्षण के उपायों को तेज करने को कहा है. तालाबों, नहरों, खेत तालाबों और चेक डैम की सफाई के जरिए अधिक से अधिक पानी संग्रहित करने की योजना बनाई गई है. जलाशयों में फिलहाल पिछले वर्ष की तुलना में अधिक पानी मौजूद है, लेकिन यदि बारिश में कमी बनी रहती है तो इसका स्तर भी घट सकता है. इसलिए सिंचाई के लिए उपलब्ध जल का समझदारी से उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है.

किसानों तक पहुंचेगी हर जरूरी जानकारी

देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखें. किसानों को मौसम, फसल प्रबंधन और वैकल्पिक खेती से जुड़ी जानकारी एसएमएस, व्हाट्सएप, कॉल सेंटर और अन्य माध्यमों से उपलब्ध कराई जाएगी. इससे किसान समय पर निर्णय ले सकेंगे और नुकसान को कम कर पाएंगे.

फसल बीमा और निगरानी तंत्र भी होगा मजबूत

सरकार ने फसल बीमा योजनाओं और किसान क्रेडिट कार्ड के तहत अधिक से अधिक किसानों का पंजीकरण कराने पर भी जोर दिया है. इसके साथ ही मानसून और फसलों की स्थिति पर नजर रखने के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाया गया है. ‘अल नीनो निगरानी प्रकोष्ठ’ और ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ लगातार मौसम और फसलों की स्थिति का आकलन कर रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जा सकें.

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About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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