फर्जी डिग्री पर मिली सरकारी नौकरी अब पड़ेगी भारी, बिहार में 3,035 शिक्षकों की होगी छुट्टी, वेतन भी लौटाना पड़ेगा

Authored By: Nishant Singh

Published On: Thursday, July 9, 2026

Last Updated On: Thursday, July 9, 2026

Bihar Fake Teacher Degree Case. बिहार में फर्जी डिग्री वाले 3,035 शिक्षकों की नौकरी खत्म होने और वेतन वापसी की कार्रवाई से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर
Bihar Fake Teacher Degree Case. बिहार में फर्जी डिग्री वाले 3,035 शिक्षकों की नौकरी खत्म होने और वेतन वापसी की कार्रवाई से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर

बिहार में फर्जी डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले 3,035 शिक्षकों पर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. सेवा समाप्ति, 1,830 एफआईआर, ब्याज सहित वेतन वसूली और इस्तीफों की बढ़ती संख्या ने पूरे मामले को राज्य की सबसे बड़ी शिक्षक भर्ती जांचों में शामिल कर दिया है.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Thursday, July 9, 2026

Bihar Fake Teacher Degree Case: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. वर्षों से फर्जी डिग्री और जाली प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी स्कूलों में नौकरी कर रहे शिक्षकों पर अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है. शिक्षा विभाग ने 3,035 ऐसे शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिनकी नियुक्ति जांच में संदिग्ध या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पाई गई. इतना ही नहीं, इन शिक्षकों से अब तक मिला वेतन और मानदेय भी ब्याज सहित वापस लेने की तैयारी की जा रही है.

निगरानी ब्यूरो की जांच से खुला बड़ा फर्जीवाड़ा

इस पूरे मामले का खुलासा निगरानी ब्यूरो की विस्तृत जांच के बाद हुआ. जांच एजेंसी ने नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर शिक्षा विभाग को संदिग्ध शिक्षकों की सूची सौंपी. रिपोर्ट में सामने आया कि बड़ी संख्या में नियुक्तियां ऐसे प्रमाणपत्रों के आधार पर हुई थीं, जिनकी सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हुए. इसके बाद विभाग ने कानूनी कार्रवाई शुरू करते हुए अब तक 1,830 एफआईआर दर्ज कराई हैं, जिनमें कुल 3,035 शिक्षकों को आरोपी बनाया गया है.

2006 से 2015 की नियुक्तियां जांच के दायरे में

जांच के अनुसार यह मामला मुख्य रूप से वर्ष 2006 से 2015 के बीच हुई शिक्षक बहाली से जुड़ा है. कई अभ्यर्थियों ने ऐसे कॉलेजों की डिग्रियां प्रस्तुत कीं, जो अस्तित्व में ही नहीं थे. वहीं कुछ मामलों में संस्थान तो मान्य थे, लेकिन जमा किए गए प्रमाणपत्र और अंकपत्र जाली पाए गए. इन खुलासों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कार्रवाई के डर से बढ़े इस्तीफे

जैसे-जैसे शिक्षा विभाग की कार्रवाई तेज हुई, वैसे-वैसे कई संदिग्ध शिक्षकों ने खुद ही नौकरी छोड़नी शुरू कर दी. बताया जा रहा है कि कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी और वेतन वसूली के डर से कई लोगों ने चुपचाप इस्तीफा दे दिया है. हालांकि विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल इस्तीफा देने से किसी को राहत नहीं मिलेगी. यदि जांच में दोष साबित होता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और सरकारी धन की वसूली भी की जाएगी.

भर्ती व्यवस्था पर उठे नए सवाल

इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है. सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. आने वाले समय में जांच और तेज होने की संभावना है, जिससे अन्य संदिग्ध नियुक्तियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं. इससे साफ संकेत मिल रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वालों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं होगा.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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