अन्ना आंदोलन के 15 साल: कोई बना मुख्यमंत्री, कोई राज्यपाल, तो कोई आज भी लड़ रहा है जनहित की लड़ाई, केजरीवाल-सिसोदिया से किरण बेदी तक, 10 चेहरे आज कहां हैं?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, July 22, 2026
Updated On: Wednesday, July 22, 2026
अन्ना हजारे आंदोलन को 15 साल पूरे हो चुके हैं. इस आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरे आज अलग-अलग राहों पर हैं. कोई मुख्यमंत्री बना, कोई राज्यपाल, कोई सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय है, तो कुछ राजनीति से दूर हो चुके हैं. जानिए आज कहां हैं आंदोलन के ये चर्चित चेहरे.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Wednesday, July 22, 2026
Anna Andolan 15 Years: साल 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ अन्ना हजारे का आंदोलन देश के सबसे बड़े जनआंदोलनों में गिना जाता है. दिल्ली के रामलीला मैदान से उठी इस मुहिम ने लाखों लोगों को एक मंच पर ला दिया. इस आंदोलन से कई ऐसे चेहरे उभरे, जिन्होंने बाद में राजनीति, सामाजिक आंदोलनों और सार्वजनिक जीवन में अलग-अलग राह चुनी. 15 साल बाद इन नेताओं की यात्रा बिल्कुल अलग दिशा में पहुंच चुकी है.
अन्ना हजारे: आज भी जनहित के मुद्दों पर अडिग
अन्ना हजारे ने आंदोलन के बाद राजनीति में आने से हमेशा इनकार किया. वे महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि में रहकर ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और लोकायुक्त जैसे मुद्दों पर लगातार आवाज उठाते रहे हैं. हाल के वर्षों में उन्होंने महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून लागू करने की मांग को लेकर फिर से अनशन की चेतावनी दी. 87 वर्ष की उम्र में भी वे सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं.
अरविंद केजरीवाल: आंदोलन से सत्ता तक, फिर विपक्ष की भूमिका
अरविंद केजरीवाल ने आंदोलन के बाद आम आदमी पार्टी बनाई और दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव लाया. कई वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद 2026 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. अब वे विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं. हाल के वर्षों में कानूनी चुनौतियों और राजनीतिक विवादों के बावजूद वे पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में सक्रिय हैं.
मनीष सिसोदिया: शिक्षा मॉडल से कानूनी लड़ाई तक
मनीष सिसोदिया ने दिल्ली में शिक्षा सुधारों के जरिए अलग पहचान बनाई. उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के रूप में उनका काम काफी चर्चा में रहा. हालांकि आबकारी नीति मामले में गिरफ्तारी और लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण उनका राजनीतिक सफर मुश्किल दौर से गुजरा. जमानत मिलने के बाद वे फिर से सक्रिय राजनीति में लौटने की कोशिश कर रहे हैं.
किरण बेदी: आंदोलन से प्रशासनिक और सामाजिक भूमिका तक
देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में थीं. बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का साथ दिया और पुडुचेरी की उपराज्यपाल बनीं. वर्तमान में वे प्रशासनिक अनुभव और सामाजिक कार्यों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं तथा विभिन्न मंचों पर सुशासन और नेतृत्व पर अपने विचार रखती हैं.
कुमार विश्वास: राजनीति से दूरी, साहित्य से जुड़ाव
कुमार विश्वास ने आंदोलन के दौरान अपने भाषणों और कविताओं से लोगों का ध्यान खींचा था. आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली. आज वे देश-विदेश में कवि सम्मेलनों, मोटिवेशनल कार्यक्रमों और सामाजिक विषयों पर अपने विचार रखने के लिए जाने जाते हैं. समय-समय पर वे राजनीतिक घटनाओं पर भी टिप्पणी करते रहते हैं.
योगेंद्र यादव: किसानों और लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज
योगेंद्र यादव ने आंदोलन के बाद राजनीति में कदम रखा, लेकिन बाद में अलग होकर ‘स्वराज अभियान’ की शुरुआत की. वे किसानों, ग्रामीण विकास, स्थानीय स्वशासन और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में लगातार सक्रिय हैं. आज भी वे विभिन्न जन अभियानों और यात्राओं के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को उठाते रहते हैं.
प्रशांत भूषण: अदालत से लेकर जनहित तक सक्रिय
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण आंदोलन के कानूनी रणनीतिकारों में शामिल थे. आम आदमी पार्टी से अलग होने के बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान जनहित याचिकाओं, न्यायपालिका में पारदर्शिता और संवैधानिक मामलों पर केंद्रित किया. वे आज भी कई महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
बाबा रामदेव: योग और स्वदेशी अभियान पर पूरा फोकस
बाबा रामदेव आंदोलन के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर सामने आए थे. बाद के वर्षों में उन्होंने योग, आयुर्वेद और स्वदेशी उत्पादों के विस्तार पर अपना पूरा ध्यान लगाया. पतंजलि के माध्यम से वे शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं.
मेधा पाटकर: आज भी संघर्ष की राह पर कायम
मेधा पाटकर ने हमेशा सामाजिक न्याय, पर्यावरण और विस्थापितों के अधिकारों को अपनी प्राथमिकता बनाया. आंदोलन के बाद भी उन्होंने नर्मदा बचाओ आंदोलन सहित कई जन आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई. आज भी वे किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और गरीब वर्ग के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठा रही हैं.
शांति भूषण: कानूनी सोच की अमिट विरासत
अन्ना आंदोलन के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण ने जनलोकपाल कानून के मसौदे को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वर्ष 2023 में उनके निधन के साथ भारतीय न्याय व्यवस्था और जन आंदोलनों ने एक अनुभवी मार्गदर्शक खो दिया. आज भी उनके कानूनी योगदान और जनहित के प्रति समर्पण को सम्मान के साथ याद किया जाता है.
यह भी पढ़ें
news via inbox
समाचार जगत की हर खबर, सीधे आपके इनबॉक्स में - आज ही हमारे न्यूजलेटर को सब्सक्राइब करें।
[newsletter_form]













