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रामायणी सम्मान-2026: काशी में 19 अगस्त को 28 विभूतियों का होगा सम्मान, बीएचयू में सजेगा राष्ट्रीय समारोह
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, August 8, 2026
Last Updated On: Saturday, August 8, 2026
Ramayani Samman 2026: काशी में तुलसी जयंती के अवसर पर 19 अगस्त को बीएचयू में ‘रामायणी सम्मान-2026’ समारोह आयोजित होगा. रामायण रिसर्च काउंसिल ने देशभर से 250 से अधिक नामांकनों में से 28 विभूतियों का चयन किया है. सात अलग-अलग श्रेणियों में मिलने वाले इस सम्मान में साहित्य, संगीत, शोध, रामकथा और राष्ट्रसेवा से जुड़े व्यक्तित्व शामिल हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, August 8, 2026
Ramayani Samman 2026: गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर काशी में रामायण, साहित्य, अध्यात्म, संगीत और भारतीय संस्कृति से जुड़े विशिष्ट लोगों का सम्मान किया जाएगा. रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से दिए जाने वाले ‘रामायणी सम्मान-2026’ के लिए देशभर से 28 विभूतियों का चयन किया गया है. इन सभी को 19 अगस्त 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाएगा. कार्यक्रम भारतीय अध्ययन केंद्र के सहयोग से आयोजित होगा.
250 से अधिक नामांकन के बाद हुआ चयन
इस वर्ष ‘रामायणी सम्मान’ के लिए नामांकन प्रक्रिया 9 जुलाई से 26 जुलाई 2026 तक चली. इस दौरान गूगल फॉर्म, ई-मेल और कूरियर के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों से 250 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए. चयन समिति ने सभी नामांकनों की निर्धारित मानकों के आधार पर गहन समीक्षा की. विस्तृत विचार-विमर्श के बाद रामायण और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े कार्यों के आधार पर 28 विभूतियों का चयन किया गया.
रामायण रिसर्च काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि यह सम्मान केवल किसी व्यक्ति के कार्य का अभिनंदन नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, साहित्य, शोध, रामकथा, संगीत और सामाजिक जागरण में रामायण आधारित योगदान को पहचान देने का प्रयास है. उनके अनुसार रामायण और श्रीरामचरितमानस के आदर्श आज भी समाज में शांति, मर्यादा, धैर्य और पारिवारिक सौहार्द को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
सात विधाओं में दिया जाएगा सम्मान
इस वर्ष ‘रामायणी सम्मान’ के लिए सात श्रेणियां निर्धारित की गई हैं. इनमें रामायण शोध सम्मान, रामकथा वाचन सम्मान, रामायण साहित्य सम्मान, रामायण संगीत सम्मान, बाल रामायणी सम्मान, राष्ट्रसेवा रामायणी सम्मान और श्रीसीताराम-पथिक सम्मान शामिल हैं. चयन समिति में संतों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, संस्कृत विद्वानों, वरिष्ठ पत्रकारों, अधिवक्ताओं और अन्य प्रबुद्ध लोगों को शामिल किया गया था.
सम्मान के संयोजक एवं काउंसिल के ट्रस्टी डॉ. देव दत्त शर्मा ने निर्णायक मंडल और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार जताया. वहीं चयन समिति के सदस्य एडवोकेट भरत नागर ने कहा कि सम्मानित होने वाली विभूतियों के कार्य रामायण परंपरा के संरक्षण और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार को नई ऊर्जा देंगे.
इन 28 विभूतियों को मिलेगा ‘रामायणी सम्मान’
- अनूप जलोटा – भजन-सम्राट
- अनुराधा पौडवाल – सुप्रसिद्ध गायिका
- आर.के. सिन्हा – बिहार
- स्व. किशोर कुणाल – पटना, बिहार; मरणोपरांत सम्मान, प्राप्तकर्ता उनके सुपुत्र सायन कुणाल
- डॉ. अर्चना प्रकाश – लखनऊ
- भगवान दास – दिल्ली
- डॉ. उदय प्रताप सिंह – वाराणसी
- डॉ. अवधि हरि – लखनऊ
- योगेश्वर प्रसाद देवरानी – नैनीताल, उत्तराखंड
- आदित्य जैन – नीमच, मध्य प्रदेश
- अभय माणके – इंदौर, मध्य प्रदेश
- संत श्री हरिओम – हाथरस, उत्तर प्रदेश
- नरेंद्रनाथ गगन – बिहार
- योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ – आगरा, उत्तर प्रदेश
- संजीव – बिहार
- डॉ. आशा ओझा – बिहार
- मदगुल्ला प्रफुल्ला – आंध्र प्रदेश
- बिनोद कुमार तिवारी – झारखंड
- डॉ. चंद्र प्रभा मदान – हरियाणा
- आचार्य संतोष पांडेय – राजस्थान
- अजय याग्निक – दिल्ली
- विंध्याचल मणि त्रिपाठी – उत्तर प्रदेश
- राजराधे कृष्ण शर्मा – महाराष्ट्र
- प्रेम प्रकाश दुबे – महाराष्ट्र
- त्रिलोकी नाथ पांडेय – उत्तर प्रदेश
- रामधनी द्विवेदी – उत्तर प्रदेश
- डॉ. रविशंकर पांडेय – उत्तर प्रदेश
- रेखा मेहरा – नई दिल्ली
‘हनुमत कौतुक’ के लिए रामधनी द्विवेदी भी सम्मानित

वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी को उनकी पुस्तक ‘हनुमत कौतुक: सुंदरकांड एक पुनर्पाठ’ के लिए सम्मानित किया जाएगा. दैनिक जागरण से जुड़े रहे द्विवेदी की यह पुस्तक प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित हुई है. उन्होंने यात्रा-वृत्तांत, संस्मरण और संगीत जैसे विषयों पर पांच पुस्तकें लिखी हैं. ब्राह्मी लिपि पर उनकी एक अन्य पुस्तक भी जल्द प्रकाशित होने वाली है.
काशी में आयोजन का विशेष महत्व
साध्वी प्रज्ञा भारती ने कहा कि तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस की रचना का महत्वपूर्ण हिस्सा काशी की पवित्र धरती पर किया था. ऐसे में तुलसी जयंती पर इसी नगरी में रामायण से जुड़े साधकों का सम्मान होना गौरव का विषय है. बाबा विश्वनाथ की नगरी, मां गंगा का तट और सावन का महीना इस आयोजन को और विशेष बनाते हैं.
रामायण परंपरा को आगे बढ़ाने की पहल
अजय भट्ट ने बताया कि रामायण रिसर्च काउंसिल ने कोरोना काल में देशभर में डिजिटल रामलीला का आयोजन किया. अयोध्या के राम मंदिर संघर्ष पर आधारित ‘श्रीरामलला-मन से मंदिर तक’ नामक 1250 पृष्ठों का ग्रंथ तैयार किया गया. संस्कृत और रामायण परंपरा को बढ़ावा देने के लिए ‘रामायण वार्ता’ पाक्षिक पत्रिका का प्रकाशन भी किया जा रहा है.
काउंसिल सीतामढ़ी में मां सीता से जुड़े सांस्कृतिक कार्यों को भी आगे बढ़ा रही है. यहां श्रीरामजानकी स्थान पर 12 एकड़ भूमि आवंटित किए जाने की जानकारी दी गई है. प्रस्तावित योजनाओं में 51 शक्तिपीठों की मिट्टी और ज्योत से अखंड ज्योत की स्थापना तथा चतुर्भुजा महालक्ष्मी की स्थापना शामिल है. काउंसिल का लक्ष्य रामायण के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और भारतीय ज्ञान परंपरा को मजबूत करने का है.
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