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दिल्ली PG हादसा: 7 मौतों के बाद हाईकोर्ट सख्त, अब मालिक के साथ MCD और DU की भी जवाबदेही तय होगी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, September 8, 2026
Last Updated On: Tuesday, September 8, 2026
दिल्ली के सत्य निकेतन PG हादसे में सात लोगों की मौत के बाद हाईकोर्ट ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है. अदालत ने सिर्फ मालिक ही नहीं, MCD और DU की भूमिका पर भी सवाल उठाए. दिल्ली के PG और हॉस्टल की सुरक्षा जांच के साथ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, September 8, 2026
Delhi PG Accident: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की इमारत ढहने से हुई मौतों ने राजधानी में छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. राहत और बचाव अभियान करीब 27 घंटे तक चला, जिसके बाद सोमवार शाम मलबा हटाने का काम पूरा हुआ. इस हादसे में सात लोगों की जान चली गई, जबकि पांच लोग घायल हैं और इनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. कुल 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया.
हादसे के बाद कोर्ट में उठा सबसे बड़ा सवाल- आखिर जिम्मेदार कौन?
मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा तो सुनवाई के दौरान तस्वीर सिर्फ PG संचालक तक सीमित नहीं रही. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के लिए केवल भवन मालिक को जिम्मेदार मानना पर्याप्त नहीं है. अदालत ने MCD और दिल्ली विश्वविद्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए. खास तौर पर बाहर से दिल्ली आकर पढ़ने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध न होने की स्थिति को भी अदालत ने गंभीरता से लिया.
कोर्ट ने MCD को इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने का निर्देश दिया है. जांच में यह देखा जाएगा कि इमारत को निर्माण की वैध अनुमति मिली थी या नहीं, भवन नियमों का पालन हुआ था या नहीं और यदि किसी स्तर पर सरकारी निगरानी में चूक हुई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है. संबंधित विभागों को अदालत के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी.
अब दिल्ली के PG और हॉस्टल भी जांच के घेरे में
सत्य निकेतन की घटना के बाद कार्रवाई केवल इसी इमारत तक सीमित नहीं रहने वाली है. हाईकोर्ट ने दिल्ली के PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था की जांच के निर्देश दिए हैं. MCD को निर्धारित समय में इन जगहों का निरीक्षण कर यह जानकारी जुटानी होगी कि भवनों के पास जरूरी मंजूरियां हैं या नहीं और वे निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हो रहे हैं या नहीं.
अदालत ने DU से भी बाहर से आने वाले छात्रों और उपलब्ध हॉस्टल सुविधाओं की जानकारी मांगी है. दरअसल, बड़ी संख्या में विद्यार्थी विश्वविद्यालय के आसपास निजी PG में रहते हैं. ऐसे में सवाल केवल भवन की मजबूती का नहीं, बल्कि छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की उपलब्धता का भी है. हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद छात्र आवास की पूरी व्यवस्था पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है.
PG चलाने वाले परिवार पर भी पुलिस की कार्रवाई
हादसे के मामले में पुलिस ने संपत्ति से जुड़े परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इनमें हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटा महेश गुप्ता शामिल हैं. पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक संपत्ति पत्नी के नाम थी, जबकि परिवार के सदस्य PG के संचालन से जुड़े हुए थे. निर्माण कार्य और PG चलाने वाले अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
MCD के पांच अधिकारी निलंबित, विभागीय जांच शुरू
हादसे के बाद MCD ने दक्षिण जोन के पांच अधिकारियों पर भी कार्रवाई की है. इनमें उपायुक्त राकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता रणवीर सिंह, कार्यकारी अभियंता ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार शामिल हैं. इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है.
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हादसे के बाद भवनों की निगरानी और समय पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं. अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि संबंधित इमारत की स्थिति के बारे में प्रशासन को पहले से कोई जानकारी थी या नहीं और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में क्या कदम उठाए गए थे.
असली चुनौती अब जांच के बाद शुरू होगी
सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली के उन हजारों छात्रों की चिंता बढ़ा दी है जो पढ़ाई के लिए राजधानी आते हैं और निजी PG में रहते हैं. केवल दोष तय कर देने से समस्या खत्म नहीं होगी. जरूरत ऐसी व्यवस्था की है जिसमें PG की अनुमति, निर्माण सुरक्षा, क्षमता और समय-समय पर होने वाले तकनीकी निरीक्षण की स्पष्ट निगरानी हो.
हाईकोर्ट की सुनवाई ने इस हादसे को एक व्यापक मुद्दे में बदल दिया है. अब सवाल यह नहीं है कि इमारत क्यों गिरी, बल्कि यह भी है कि उसे गिरने से पहले पहचानने और रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी. आने वाले दिनों में MCD की जांच, PG ऑडिट और सरकारी जवाबों से यह साफ होगा कि इस त्रासदी के पीछे केवल निर्माण संबंधी चूक थी या निगरानी की पूरी व्यवस्था में कहीं बड़ी कमी रह गई.
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