Lifestyle News
Lalbaugcha Raja 2026 First Look: महादेव की थीम में सजा लालबागचा राजा, जानें बप्पा के दरबार की खासियत
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, September 12, 2026
Last Updated On: Saturday, September 12, 2026
Lalbaugcha Raja 2026: मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा का 2026 का पहला लुक सामने आ गया है. इस बार बप्पा का दरबार भगवान शिव की थीम पर सजाया गया है. त्रिशूल और मंदिर शैली की सजावट आकर्षण बढ़ा रही है. 14 सितंबर से शुरू होने वाला यह 93वां गणेशोत्सव श्रद्धालुओं के लिए खास रहेगा.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, September 12, 2026
Lalbaugcha Raja 2026: मुंबई के सबसे लोकप्रिय गणपति उत्सवों में शामिल लालबागचा राजा के 2026 के पहले दर्शन सामने आ गए हैं. 11 सितंबर को जारी हुए फर्स्ट लुक और वीडियो में बप्पा का भव्य स्वरूप देखने को मिला. इस बार लालबागचा राजा का पूरा दरबार भगवान शिव की थीम पर तैयार किया गया है. पहली झलक सामने आते ही भक्तों के बीच उत्साह बढ़ गया है.
इस बार महादेव के रंग में सजा बप्पा का दरबार
2026 में लालबागचा राजा की सजावट का मुख्य आधार भगवान शिव हैं. पंडाल के प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य मंडप तक शिव से जुड़े प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है. विशाल त्रिशूल और मंदिर शैली की सजावट पूरे परिसर को अलग धार्मिक रूप देती नजर आती है. बप्पा की पारंपरिक और राजसी प्रतिमा के साथ शिव तत्वों को जोड़कर इस बार दर्शन का अनुभव और खास बनाया गया है.
भक्तों को यहां केवल गणपति की प्रतिमा के दर्शन नहीं होंगे, बल्कि गणेश और महादेव की आस्था को एक साथ दर्शाती भव्य प्रस्तुति भी देखने को मिलेगी. यही वजह है कि इस साल की थीम को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्सुकता है.
14 सितंबर से शुरू होगा गणेशोत्सव
मुंबई में गणेश चतुर्थी का उत्सव 14 सितंबर 2026 से शुरू होगा. लालबागचा राजा का गणेशोत्सव 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ संपन्न होगा. मंडल के अनुसार, इस वर्ष लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल का 93वां गणेशोत्सव है. हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है.
संकट के समय लिया था बप्पा का संकल्प
लालबागचा राजा की लोकप्रियता के पीछे केवल भव्य प्रतिमा या पंडाल नहीं, बल्कि करीब नौ दशक पुरानी आस्था की कहानी भी जुड़ी है. 1932 में लालबाग इलाके में पेरू चॉल का बाजार बंद होने से स्थानीय मछुआरों और छोटे व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था.
स्थायी बाजार की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने भगवान गणेश के सामने संकल्प लिया. बाद में जब उनकी मांग पूरी हुई और बाजार के लिए जगह मिली, तो 1934 में यहां गणपति की प्रतिमा स्थापित की गई. इसी परंपरा ने आगे चलकर लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल का रूप लिया.
इसलिए कहलाते हैं ‘नवसाचा गणपति’
लालबागचा राजा को भक्त प्यार और श्रद्धा से ‘नवसाचा गणपति’ कहते हैं. मान्यता है कि श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना पूरी होने की उम्मीद से नवस यानी संकल्प करते हैं. इसी आस्था ने लालबागचा राजा को मुंबई के सबसे प्रसिद्ध गणपति पंडालों में विशेष स्थान दिलाया है. 2026 की शिव-आधारित थीम इस धार्मिक परंपरा में एक नया आकर्षण जोड़ रही है.
यह भी पढ़ें :- शी जिनपिंग का भारत दौरा कंफर्म, BRICS समिट में पीएम मोदी से मुलाकात पर नजर














