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अखिलेश यादव की धीरेंद्र शास्त्री को खुली चुनौती, यूपी में एंट्री पर रोक की मांग, तेजस्वी से पप्पू यादव तक ने उठाए सवाल
Authored By: Mazhar Pathan
Published On: Wednesday, November 4, 2026
Last Updated On: Wednesday, November 4, 2026
भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम को लेकर धीरेंद्र शास्त्री की कथित टिप्पणियों पर विवाद बढ़ता जा रहा है. अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में उनके प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है. वहीं तेजस्वी यादव, पप्पू यादव और दिग्विजय सिंह ने भी आपत्ति जताई है. विवाद के बीच धीरेंद्र शास्त्री माफी मांग चुके हैं. जानिए आखिर पूरा मामला क्या है और दूसरे नेताओं ने क्या कहा.
Authored By: Mazhar Pathan
Last Updated On: Wednesday, November 4, 2026
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने बयान को लेकर राजनीतिक और धार्मिक विवादों के केंद्र में हैं. इस बार मामला भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम के स्वरूप की तुलना से शुरू हुआ और अब उत्तर प्रदेश की राजनीति तक पहुंच गया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उनके उत्तर प्रदेश में प्रवेश पर रोक लगाने जैसी मांग की है.
उन्होंने यहां तक कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर ऐसा बोर्ड लगा देना चाहिए, जिस पर उनके प्रवेश को प्रतिबंधित करने की बात लिखी हो. हालांकि, इस विवाद में केवल अखिलेश यादव ही नहीं, बल्कि बिहार के नेता तेजस्वी यादव, सांसद पप्पू यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं. दूसरी तरफ धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी टिप्पणी पर सफाई देते हुए माफी भी मांगी है. ऐसे में सवाल है कि आखिर कथा के दौरान उन्होंने ऐसा क्या कहा, जिस पर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया?
भगवान राम-कृष्ण पर बयान से कैसे छिड़ा विवाद?
विवाद की शुरुआत मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान हुई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 29 अक्टूबर 2026 को कथा वाचन के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप, उनके खड़े होने के तरीके और उनकी लीलाओं को लेकर तुलना की थी. सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा का जिक्र करते हुए कहते सुनाई देते हैं कि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े दिखाई देते हैं. उन्होंने भगवान श्रीराम को सीधे खड़े होने वाला बताते हुए दोनों के स्वरूप की तुलना की. इसी दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण की बांसुरी बजाने की कला और भगवान श्रीराम के धनुष चलाने का भी जिक्र किया.
वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने उनकी भाषा और तुलना पर सवाल उठाए. खासतौर पर मथुरा-वृंदावन और ब्रज क्षेत्र के संतों तथा कृष्ण भक्तों ने नाराजगी जताई. उनका कहना था कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही श्रद्धा के केंद्र हैं और उनके बीच इस तरह की तुलना करना उचित नहीं है.
अखिलेश यादव ने क्यों की यूपी में एंट्री रोकने की मांग?
इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम को लेकर इस तरह की टिप्पणियां समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकती हैं.
अखिलेश यादव ने कहा कि जिन लोगों ने धर्म और मजहब को लेकर इस तरह की छींटाकशी की है, वे आगे दूसरे संप्रदायों को लेकर भी ऐसी टिप्पणियां कर सकते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि धार्मिक और राजनीतिक विवादों में भगवान को क्यों लाया जा रहा है.
अपने ताजा बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री का न तो कोई सच्चा यदुवंशी स्वागत करेगा और न ही कोई सच्चा रघुवंशी. उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर नाकेबंदी का बोर्ड लगाने की बात कही. उनके अनुसार, बोर्ड पर लिखा होना चाहिए कि ईशनिंदा करने वालों का उत्तर प्रदेश की धर्मभूमि पर प्रवेश वर्जित है.
अखिलेश ने यह आशंका भी जताई कि उत्तर प्रदेश में किसी बाहरी व्यक्ति के इशारे पर राजनीतिक और धार्मिक सत्ता को चुनौती देने की कोशिश हो रही है. हालांकि, इसके पीछे किसी व्यक्ति या संगठन की भूमिका को लेकर उन्होंने कोई सार्वजनिक प्रमाण पेश नहीं किया है.
पहले भी कार्रवाई की मांग कर चुके हैं अखिलेश
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर कड़ा बयान दिया हो. इससे पहले उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रमों को रद्द करने और भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति नहीं देने की मांग उठाई थी.
उन्होंने कहा था कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले बयानों पर केवल माफी मांग लेना पर्याप्त नहीं होना चाहिए और मामले में वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए.
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही सनातन परंपरा के पूजनीय स्वरूप हैं. ऐसे में उनके बीच श्रेष्ठता की तुलना करने का कोई औचित्य नहीं है. इस विवाद के दौरान अखिलेश ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का भी जिक्र किया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर ऐसे बयान देने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती तो मध्य प्रदेश सरकार को इस मामले पर गंभीरता दिखानी चाहिए.
तेजस्वी यादव ने भी धीरेंद्र शास्त्री पर जताई नाराजगी
इस विवाद में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे अनुचित और मर्यादा के खिलाफ बताया. तेजस्वी यादव ने अपने बयान में भगवान श्रीकृष्ण को सामाजिक एकता और लोककल्याण का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण केवल किसी एक धार्मिक या सामाजिक समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं. तेजस्वी ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह की भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती. इस तरह अब यह विवाद उत्तर प्रदेश से निकलकर बिहार की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है.
पप्पू यादव पहुंचे थाने, FIR दर्ज कराने की मांग
धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर सबसे अहम प्रतिक्रियाओं में से एक पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की रही. उन्होंने केवल सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दी. पप्पू यादव ने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताई और धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की. उनका कहना था कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले बयानों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. इस मामले में अभी शिकायत और एफआईआर दर्ज होने के बीच अंतर समझना जरूरी है. उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पप्पू यादव शिकायत लेकर थाने पहुंचे थे. इसे एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि नहीं माना जा सकता.
दिग्विजय सिंह ने भी साधा निशाना, कांग्रेस नेताओं ने जताई आपत्ति
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी की आलोचना करते हुए उनके लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया. वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी इस मामले पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण को बांटने वाली भाषा का विरोध होना चाहिए.
इस तरह इस विवाद में समाजवादी पार्टी और आरजेडी के नेताओं के साथ कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं.
ब्रज के संतों और कृष्ण भक्तों ने भी जताया विरोध
इस पूरे विवाद में मथुरा और वृंदावन के संतों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण रही. भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और लीलास्थली माने जाने वाले ब्रज क्षेत्र में कई धार्मिक लोगों ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर नाराजगी जताई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कथावाचक कौशल किशोर ने इस तरह की तुलना पर सवाल उठाए. वहीं साध्वी इंदुलेखा ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की.
ब्रज क्षेत्र के संतों का कहना था कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही पूजनीय हैं. किसी एक स्वरूप को दूसरे से कमतर बताने वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. इस बीच यादव समाज के संगठनों ने भी आपत्ति जताई. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में यादव समाज के एक संगठन ने ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत देकर जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की.
धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी, कहा- मेरी बात का गलत अर्थ निकाला गया
लगातार बढ़ते विरोध के बीच धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी टिप्पणी पर सफाई दी और माफी मांगी. उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उनका उद्देश्य भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के बीच किसी तरह का अंतर पैदा करना नहीं था. उन्होंने बताया कि कथा के दौरान उनकी टिप्पणी एक भक्तिपूर्ण पद और ब्रज की प्रेमपूर्ण परंपरा के संदर्भ में थी. उनका कहना था कि गोपियां भी भगवान श्रीकृष्ण से प्रेमपूर्वक उलाहना देती थीं और संतों की रचनाओं में भी इस तरह की अभिव्यक्तियां मिलती हैं. धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने पूरे वीडियो को देखने के बजाय उसका एक हिस्सा देखकर अलग अर्थ निकाल लिया.
उन्होंने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का भक्त बताते हुए कहा कि वे कृष्ण जन्मभूमि के विषय पर भी आवाज उठाते रहे हैं. अगर उनके शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं.
NDTV और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी इस सफाई के बावजूद विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी रहीं.
विवाद में भगवान श्रीराम को लेकर एक और वीडियो की चर्चा
इस मामले में एक और घटनाक्रम सामने आया, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया. इंडिया टुडे की 3 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर धीरेंद्र शास्त्री का एक दूसरा वीडियो भी सामने आया, जिसमें भगवान श्रीराम के पिता को लेकर कथित टिप्पणी सुनाई देने का दावा किया गया. अखिलेश यादव ने इस वीडियो को साझा करते हुए सवाल उठाया कि आखिर ऐसे बयान देने वाले लोग किसके इशारे पर सक्रिय हैं. उन्होंने इसे सामाजिक सौहार्द से जुड़ा गंभीर विषय बताया और कार्यक्रमों को रद्द करने की मांग दोहराई.
हालांकि, इस दूसरे वीडियो के संदर्भ और पूरी बातचीत को समझना जरूरी है. वायरल क्लिप के आधार पर किसी बयान का अंतिम अर्थ तय करना उचित नहीं होगा. धीरेंद्र शास्त्री की ओर से इस पर भी सफाई दिए जाने की खबरें सामने आई हैं.
क्या उत्तर प्रदेश में धीरेंद्र शास्त्री की एंट्री पर लगेगा प्रतिबंध?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अखिलेश यादव की मांग के बाद उत्तर प्रदेश में धीरेंद्र शास्त्री के प्रवेश पर रोक लग सकती है? फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है, जिसमें धीरेंद्र शास्त्री के प्रदेश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई हो. अखिलेश यादव की बात फिलहाल एक राजनीतिक मांग और बयान के रूप में सामने आई है.
किसी व्यक्ति के कार्यक्रम पर रोक लगाने या उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए संबंधित प्रशासन और कानून के तहत प्रक्रिया अपनानी होती है. केवल राजनीतिक बयान के आधार पर किसी प्रतिबंध को लागू नहीं माना जा सकता. दूसरी तरफ, इस विवाद ने धार्मिक मंचों पर दिए जाने वाले बयानों की जिम्मेदारी और सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा को लेकर नई बहस जरूर शुरू कर दी है.
आखिर क्या है पूरे विवाद का निष्कर्ष?
धीरेंद्र शास्त्री का भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम को लेकर दिया गया बयान अब केवल धार्मिक बहस तक सीमित नहीं रहा. इस मामले में अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, पप्पू यादव और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ चुकी हैं. ब्रज क्षेत्र के संतों और कृष्ण भक्तों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है.
धीरेंद्र शास्त्री अपनी ओर से सफाई देते हुए माफी मांग चुके हैं, लेकिन विरोध और राजनीतिक बयानबाजी जारी है. अब देखना होगा कि इस मामले में कोई औपचारिक कानूनी कार्रवाई होती है या विवाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तक ही सीमित रहता है.









