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BRICS Summit 2026 से भारतीय कंपनियों और निवेशकों को व्यापार, पूंजी, ऊर्जा, तकनीक और नए बाजारों में मिल सकते हैं अवसर
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, September 12, 2026
Last Updated On: Saturday, September 12, 2026
नई दिल्ली में होने वाला 18वां BRICS शिखर सम्मेलन भारतीय कंपनियों, निवेशकों और कारोबार के लिए नए अवसरों का रास्ता खोल सकता है. व्यापार, निवेश, आसान सीमा पार भुगतान, ऊर्जा, स्टार्टअप, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग बढ़ने से भारतीय उद्योग को नए बाजार, पूंजी और साझेदारियां मिल सकती हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, September 12, 2026
BRICS Summit 2026 : नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाला 18वां BRICS शिखर सम्मेलन केवल कूटनीतिक लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसका असर व्यापार, निवेश और भारतीय कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसरों पर भी पड़ सकता है. विस्तारित BRICS समूह में 11 देश शामिल हैं, जो दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं.
भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा बाजार
BRICS के बढ़ते दायरे से भारतीय कंपनियों को नए बाजारों और विदेशी साझेदारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है. फार्मा, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक और सेवाओं जैसे क्षेत्रों के लिए व्यापार बढ़ाने की संभावनाएं बन सकती हैं. अगर व्यापार प्रक्रियाएं आसान होती हैं, तो भारतीय निर्यातकों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है.
चीन और रूस पर भी रहेगी नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात आर्थिक दृष्टि से भी अहम होगी. दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों पर आगे की दिशा तय हो सकती है. वहीं रूस के साथ ऊर्जा, व्यापार, निवेश और भुगतान व्यवस्था पर सहयोग भारतीय कारोबार के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है.
आसान भुगतान से घट सकती है कारोबारी लागत
सीमा पार भुगतान BRICS के आर्थिक एजेंडे का अहम हिस्सा है. स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और बेहतर भुगतान व्यवस्था पर प्रगति होती है, तो कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय लेनदेन अधिक आसान और कम खर्चीला हो सकता है. इससे BRICS देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलने की संभावना है.
ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला पर फोकस
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक व्यापार मार्गों में जारी चुनौतियों के बीच ऊर्जा सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय है. BRICS में बड़े ऊर्जा उत्पादक और उपभोक्ता देश शामिल हैं. ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति, निवेश और तकनीकी सहयोग भारत की दीर्घकालिक जरूरतों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है.
स्टार्टअप और लॉजिस्टिक्स को मिल सकता है बढ़ावा
प्रस्तावित BRICS Startup Innovation Fund और Incubator Network भारतीय स्टार्टअप्स के लिए पूंजी, तकनीकी साझेदारी और नए बाजारों के रास्ते खोल सकते हैं. इसी तरह Logistics Supply-Chain Cooperation Framework से माल ढुलाई, शिपिंग और विनिर्माण से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
निवेशकों के लिए असली संकेत क्या होंगे?
निवेशकों की नजर केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि उनके अमल पर होगी. व्यापार सुविधा, निवेश लक्ष्य, भुगतान ढांचे, ऊर्जा सहयोग और वास्तविक वित्तीय प्रतिबद्धताओं से जुड़े फैसले सबसे महत्वपूर्ण होंगे. New Development Bank से बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, तकनीक और सतत विकास के लिए मिलने वाली संभावित वित्तीय सहायता भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है. सम्मेलन की अंतिम घोषणा बताएगी कि BRICS का आर्थिक एजेंडा कितना ठोस और महत्वाकांक्षी रहता है.
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