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Stock Market में फिर भूचाल, कच्चे तेल की आग से निवेशकों का पैसा डूबा
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Tuesday, September 29, 2026
Last Updated On: Tuesday, September 29, 2026
शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Tuesday, September 29, 2026
Stock Market Crash: पिछले कुछ हफ्तों से शेयर बाजार (Share market) में जो कमजोरी बनी हुई थी, वह अब बड़ी गिरावट में बदल गई है. सोमवार को बाजार बुरी तरह टूटा था और मंगलवार सुबह भी बाजार खुलते ही निवेशकों को झटका लगा. आइए समझते हैं कि आखिर इतनी बड़ी गिरावट के पीछे कौन-कौन सी वजहें काम कर रही हैं.
Stock Market Crash: शेयर बाजार फिर धड़ाम, खुलते ही सेंसेक्स ने लगाया 600 अंकों का गोता
भारतीय शेयर बाजार (Share market) में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत ही गिरावट के साथ हुई. सेंसेक्स करीब दो सौ अंक की कमजोरी के साथ खुला और कुछ ही देर में यह गिरावट बढ़कर सात सौ अंक के करीब पहुंच गई. निफ्टी भी बाईस हजार छह सौ के स्तर तक फिसल गया. यह लगातार दूसरा दिन है, जब बाजार में बड़ी बिकवाली देखने को मिल रही है.
सोमवार को हुआ था बड़ा नुकसान
इससे एक दिन पहले सोमवार को बाजार का हाल बेहद खराब रहा था. सेंसेक्स ग्यारह सौ चौबीस अंक यानी करीब डेढ़ फीसदी टूटकर बहत्तर हजार सात सौ इकहत्तर के स्तर पर बंद हुआ था. निफ्टी भी तीन सौ साठ अंक गिरकर बाईस हजार सात सौ अस्सी पर आ गया था. इस एक दिन की गिरावट में निवेशकों के करीब साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये डूब गए.
आखिर क्यों टूट रहा बाजार
बाजार में इस गिरावट (share market today) के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और उसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बताई जा रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड सौ डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए महंगा तेल देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर डालता है.
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
दूसरी बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली है. सिर्फ सितंबर महीने में ही विदेशी निवेशक सत्रह हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच चुके हैं, जबकि इस साल अब तक कुल मिलाकर करीब सवा दो लाख करोड़ रुपये की बिकवाली हो चुकी है. अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार से दूर हो रहा है, जिससे रुपये पर भी दबाव बना हुआ है.
किन शेयरों को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान
सोमवार की गिरावट में सेंसेक्स की सभी तीस कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए थे. सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों को हुआ. मणप्पुरम फाइनेंस, यस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, वोडाफोन आइडिया और अडाणी ग्रीन एनर्जी जैसे शेयर पांच से छह फीसदी तक टूट गए. ऑटो और एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई.
सोने-चांदी पर भी दिखा असर
शेयर बाजार (Share market) की इस उथल-पुथल के बीच सर्राफा बाजार में भी हलचल रही. मंगलवार को सोने की कीमत एक लाख अड़तालीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास पहुंच गई, जबकि चांदी के भाव में गिरावट देखने को मिली.
पिछले हफ्तों से ही कमजोर था बाजार
गौरतलब है कि भारतीय बाजार पिछले लगातार सात हफ्तों से लाल निशान में बंद हो रहा था. यानी यह गिरावट अचानक नहीं आई, बल्कि पिछले काफी समय से बाजार पर दबाव बना हुआ था, जो अब और गहरा गया है.
निवेशकों को क्या सलाह
बाजार के जानकारों का कहना है कि इस तरह के माहौल में निवेशकों को घबराहट में जल्दबाजी में शेयर बेचने या बिना सोचे-समझे सस्ते में शेयर खरीदने से बचना चाहिए. उनके मुताबिक फिलहाल सिर्फ मजबूत बुनियाद और कम कर्ज वाली कंपनियों पर ही भरोसा करना समझदारी होगी.
निष्कर्ष
फिलहाल बाजार की दिशा पूरी तरह वैश्विक हालात, खासकर कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के तनाव पर टिकी है. जब तक इन मोर्चों पर राहत नहीं मिलती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव और गिरावट का यह सिलसिला जारी रह सकता है.
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