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महंगाई के बीच कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता, 100 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, September 15, 2026
Last Updated On: Tuesday, September 15, 2026
Inflation Pressure: अगस्त में भारत की खुदरा और थोक महंगाई बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों ने भी चिंता बढ़ा दी है. ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है. सितंबर में भारतीय बास्केट की औसत कीमत 107.66 डॉलर रही. इससे आने वाले महीनों में ईंधन और घरेलू खर्च बढ़ने का दबाव बन सकता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, September 15, 2026
Inflation Pressure: देश में महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है. अगस्त में खुदरा और थोक, दोनों स्तरों पर कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज हुई. इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से ऊपर गई हैं. ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका है. ऐसे में आने वाले महीनों में घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
अगस्त में खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी
अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई दर यानी CPI आधारित महंगाई 4.82 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी. सबसे बड़ी चिंता खाद्य महंगाई को लेकर है. जुलाई के 5.52 प्रतिशत के मुकाबले अगस्त में खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़कर 5.95 प्रतिशत हो गई.
खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की खुदरा महंगाई भी अगस्त में 5.66 प्रतिशत तक पहुंच गई. अंडे, मांस, फल, नट्स और चीनी जैसी कई वस्तुओं की कीमतों में सालाना आधार पर दोहरे अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसका सीधा असर रोजमर्रा के घरेलू खर्च पर पड़ सकता है.
13 में से हर सेक्टर में बढ़ी कीमतों की रफ्तार
महंगाई का असर केवल खाने-पीने की चीजों तक सीमित नहीं रहा. अगस्त में निगरानी वाले सभी 13 सेक्टर में कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली. पर्सनल केयर, सोशल प्रोटेक्शन और अन्य सामान व सेवाओं की श्रेणी में सालाना महंगाई 15.17 प्रतिशत तक पहुंच गई.
थोक स्तर पर भी दबाव बना हुआ है. अगस्त में WPI आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 9.78 प्रतिशत थी. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि थोक और खुदरा महंगाई के बीच का अंतर अभी पूरी तरह ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है.
क्रूड की तेजी क्यों बढ़ा रही है चिंता?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है. सितंबर में अब तक भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत 107.66 डॉलर प्रति बैरल रही है. 11 सितंबर को यह औसत 119.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी.
क्रूड की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं तो तेल मार्केटिंग कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव की संभावना भी बढ़ जाती है. ईंधन महंगा होने पर परिवहन से लेकर उत्पादन तक की लागत प्रभावित होती है, जिसका असर दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
सितंबर में 5 फीसदी से ऊपर जा सकती है महंगाई
ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार सितंबर 2026 में CPI महंगाई 5 प्रतिशत के पार जा सकती है. अक्टूबर और नवंबर के दौरान इसके लगभग 6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है. कम बेस और GST से जुड़े बदलाव भी इस वृद्धि में भूमिका निभा सकते हैं.
वहीं, ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड राजीव शरण का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई 4.5 से 5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है. खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव, मानसून की अनिश्चितता, अल-नीनो का जोखिम और कच्चे तेल की महंगाई इसके लिए अहम कारक होंगे.
अब RBI की अगली बैठक पर नजर
महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच अब रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक महत्वपूर्ण हो गई है. MPC की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होगी. अगर तब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं और महंगाई का दबाव कम नहीं होता, तो ब्याज दरों को लेकर RBI के फैसले पर भी इसका असर पड़ सकता है. फिलहाल बढ़ता क्रूड और खाद्य महंगाई दोनों ही घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी निगरानी वाली वजह बने हुए हैं.
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