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10 दिन में दूसरी बार अमित शाह का बिहार दौरा, NDA के लिए कितना खास?
Authored By: सतीश झा
Published On: Wednesday, September 24, 2025
Last Updated On: Wednesday, September 24, 2025
बिहार की सियासत में चुनावी हलचलें तेज हो चुकी हैं. विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) से पहले जिस तरह राजनीतिक दल अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं, उसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का लगातार दूसरा दौरा बेहद अहम माना जा रहा है. 27 सितंबर को वे अररिया, सारण और वैशाली में भाजपा (BJP) पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे और चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे.
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Wednesday, September 24, 2025
अमित शाह (Amit Shah) की पहचान सिर्फ भाजपा (BJP) के कद्दावर नेता के तौर पर नहीं, बल्कि चुनावी प्रबंधन के माहिर रणनीतिकार के रूप में भी है. उनकी मौजूदगी से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है और संगठन को नई दिशा मिलती है. यही वजह है कि 10 दिन में दूसरी बार बिहार दौरा महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक संदेश है कि भाजपा और पूरा NDA राज्य में पूरी ताकत से चुनावी जंग लड़ने की तैयारी कर रहा है.
बिहार की राजनीति फिलहाल बेहद जटिल समीकरणों से गुजर रही है. नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और अन्य दलों के बीच की खींचतान ने भाजपा के लिए अवसर भी पैदा किया है और चुनौतियां भी. शाह (Amit Shah) का यह दौरा संगठन को एकजुट करने, बूथ स्तर तक संदेश पहुंचाने और गठबंधन की रणनीति तय करने के लिहाज से निर्णायक हो सकता है.
भाजपा ने बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) से पहले राज्य को पांच जोनों में बांटकर अपनी चुनावी तैयारियों को गति देने की योजना बनाई है. इससे पहले 18 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) डेहरी ऑन सोन और बेगूसराय में बैठक कर 20 जिलों के पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित कर चुके हैं. 27 सितंबर को होने वाली बैठक में शेष तीन जोनों के जिलों के नेताओं को चुनावी रणनीति और तैयारियों से अवगत कराया जाएगा.
जानकारों का कहना है कि अमित शाह की यह सक्रियता पार्टी की चुनावी तैयारियों में तेजी लाने के उद्देश्य से है. भाजपा राज्य में बढ़ते चुनावी माहौल को देखते हुए अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को समय पर निर्देश और दिशा देने की कोशिश कर रही है. पार्टी का यह रणनीतिक कदम बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, नेताओं को अपने क्षेत्रों में सक्रिय रखने और चुनावी संदेश को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
भाजपा इस बार NDA की पूरी चुनावी रणनीति को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. पांच जोनों में विभाजन से पार्टी को यह फायदा होगा कि प्रत्येक ज़ोन में स्थानीय मुद्दों और जातीय समीकरणों के आधार पर केंद्रित रणनीति तैयार की जा सके. वहीं, विपक्षी दलों जैसे राजद (RJD) और कांग्रेस (Congress) के लिए चुनौती यह है कि वे इस व्यवस्थित तैयारियों के मुकाबले अपनी चुनावी मशीनरी को और सक्रिय करें.
विशेषज्ञों का कहना है कि अमित शाह की लगातार सक्रियता और नेताओं को समय पर दिशा देने से NDA को बूथ स्तर पर मजबूती मिलेगी, जबकि विपक्ष को अपने गठबंधन और उम्मीदवारों के चयन में तेजी लानी पड़ेगी. यह मुकाबला 2025 के विधानसभा चुनाव को और भी रोचक बनाने वाला है.
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा (BJP) केंद्रीय नेतृत्व द्वारा चलाए जा रहे रणनीतिक अभियान का असर अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है. इससे पहले 3 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में पार्टी के नेताओं के साथ बैठक कर बिहार चुनाव को लेकर रणनीति तय की थी. यह बैठक महज औपचारिकता नहीं थी, बल्कि राज्य में चुनावी तैयारी और संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम थी.
विशेषज्ञों का कहना है कि अमित शाह की लगातार बैठकों की श्रृंखला स्पष्ट रूप से यह संकेत देती है कि भाजपा अपने संगठनात्मक ढांचे को मज़बूत करने और चुनाव में रणनीतिक बढ़त हासिल करने पर विशेष ध्यान दे रही है. बूथ स्तर से लेकर ज़ोन और जिला स्तर तक यह सक्रियता पार्टी के लिए चुनावी मजबूती सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी.
यह भी साफ है कि भाजपा इस बार किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती. शाह का बार-बार बिहार आना यही दिखाता है कि पार्टी न केवल सीट बंटवारे और गठबंधन की मजबूती पर जोर दे रही है, बल्कि स्थानीय मुद्दों और जातीय समीकरणों पर भी पैनी नज़र रखे हुए है.
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