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पटना में CWC की ऐतिहासिक बैठक और बिहार की बदलती राजनीति
Authored By: सतीश झा
Published On: Wednesday, September 24, 2025
Last Updated On: Thursday, September 25, 2025
पटना की सरज़मीं पर पहली बार कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक का आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक संदर्भ भी है. सदाकत आश्रम (Sadakat Ashram), जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) और पंडित नेहरू (Jawahar Lal Nehru) की गूंज सुनी थी, अब चुनावी वर्ष में कांग्रेस (Congress) की रणनीति गढ़ने का साक्षी बनने जा रहा है. यह संयोग मात्र नहीं, बल्कि कांग्रेस का एक सोचा-समझा राजनीतिक संदेश है—अतीत की विरासत को वर्तमान की राजनीति से जोड़ने का प्रयास.
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Thursday, September 25, 2025
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने पटना में आयोजित कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सदाकत आश्रम स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र बिंदु रहा है और यह कांग्रेस के कई महान नेताओं का कर्मस्थल भी रहा है. खरगे ने कहा, “पटना में हो रही CWC की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है. हम ऐसे समय पर मिल रहे हैं जब भारत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है.” खरगे ने आगे कहा कि कांग्रेस (Congress) अपने ऐतिहासिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं के साथ जनता की आवाज़ उठाने के लिए प्रतिबद्ध है. उनके बयान ने बिहार की सियासत में चुनावी माहौल को और गरमा दिया है.
इस बैठक को ऐतिहासिक बताने का दावा बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम (Rajesh Ram) का हो या फिर महागठबंधन की चुनावी रणनीति तय करने की उम्मीद, इसमें कोई संदेह नहीं कि यह आयोजन बिहार की सियासत को नया मोड़ दे सकता है. आजादी के बाद पहली बार पटना में हो रही यह बैठक कांग्रेस के लिए आत्ममंथन और पुनर्गठन का भी अवसर है. सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस मंच का इस्तेमाल महागठबंधन को मजबूती देने और जनता के बीच अपना खोया हुआ विश्वास वापस पाने के लिए कर पाएगी?
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह बैठक महज कांग्रेस (Congress) तक सीमित नहीं रहेगी. इसके जरिए महागठबंधन अपनी एकजुटता का संदेश देना चाहेगा और भाजपा-एनडीए (BJP-NDA) के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करने की कोशिश करेगा. पटना में हो रही CWC की यह बैठक केवल कांग्रेस की परीक्षा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के लिए भी एक निर्णायक क्षण है. यदि कांग्रेस इस अवसर का उपयोग दूरगामी रणनीति बनाने में करती है, तो यह बैठक सचमुच ऐतिहासिक साबित हो सकती है. लेकिन यदि यह केवल प्रतीकात्मक आयोजन भर रह गया, तो इतिहास गवाह रहेगा कि कांग्रेस ने एक और अवसर गंवा दिया.
बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम (Rajesh Ram) ने इसे ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि 1947 से लगातार CWC की बैठकें आयोजित होती रही हैं और अब सदाकत आश्रम की धरती पर इसका होना विशेष महत्व रखता है. उन्होंने याद दिलाया कि यही वह स्थान है, जहाँ से 1921 में महात्मा गांधी और पंडित नेहरू के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन और सत्याग्रह की आवाज़ उठी थी. राजेश राम ने कहा कि CWC, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की नीति निर्धारण समिति है, जहाँ राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और राज्य के अहम मुद्दों पर विमर्श होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि बैठक में वोट चोरी के षड्यंत्र, आर्थिक नीतियों और अंतर्राष्ट्रीय टैरिफ पॉलिसी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. साथ ही AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के सीमांचल दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा—“कांग्रेस का मुद्दा साफ है, वोट चोर गद्दी छोड़.”
कांग्रेस नेता सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने पटना में आयोजित कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक के दौरान कहा कि बिहार की धरती ऐतिहासिक है और कांग्रेस पार्टी की जड़ें यहां बेहद मजबूत हैं. उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन मजबूती के साथ चुनाव लड़ रहा है और इस बार बिहार के लोग बदलाव चाहते हैं. पायलट ने जोर देकर कहा, “बिहार में बदलाव होकर रहेगा.”
वोट चोरी के मुद्दे पर उन्होंने चुनाव आयोग (Election Commission of India) की भूमिका पर सवाल उठाए. पायलट ने कहा, “अगर कोई वोट में गड़बड़ी कर रहा है तो उसकी जवाबदेही चुनाव आयोग की है. हम तथ्य और प्रमाण दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही. आखिर CCTV फुटेज को क्यों खत्म करना चाहते हैं?”
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