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PK का भाजपा नेताओं पर बड़ा आरोप, कोविड के वक्त मंत्री फ्लैट खरीदने में लगे थे, अब एम्बुलेंस घोटाले की गंध
Authored By: सतीश झा
Published On: Friday, August 8, 2025
Last Updated On: Friday, August 8, 2025
चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) ने शुक्रवार को बिहार भाजपा (Bihar BJP) के शीर्ष नेताओं पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. PK ने दावा किया कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने BJP प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से 25 लाख रुपये कथित घूस ली और इस रकम का इस्तेमाल दिल्ली में पत्नी के नाम पर फ्लैट खरीदने में किया.
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Friday, August 8, 2025
PK on BJP Scam: प्रशांत किशोर (PK) के अनुसार, कोविड-19 की भयावह लहर के दौरान जब लोग इलाज और ऑक्सीजन के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब मंत्री पांडेय दिल्ली के द्वारका स्थित CGHS लिमिटेड सोसाइटी में फ्लैट नंबर 001 खरीदने में व्यस्त थे. यह फ्लैट 86 लाख रुपये में पत्नी उर्मिला पांडे के नाम पर खरीदा गया. किशोर का कहना है कि इस खरीद में मंत्री के पिता अवधेश पांडे और दिलीप जायसवाल के बीच पैसों का लेन-देन हुआ.
25 लाख मंगल पांडेय के पिता के खाते में भेजे
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने शुक्रवार को बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय (Mangal Pandesy) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल (Dilip Jaisawal) पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. पीके के मुताबिक, 6 अगस्त 2019 को दिलीप जायसवाल के बैंक खाते से 25 लाख रुपये मंगल पांडेय के पिता अवधेश पांडेय के अकाउंट में ट्रांसफर किए गए. इसके बाद अवधेश पांडेय ने यह रकम अपनी बहू उर्मिला पांडेय के खाते में भेजी, जिसका इस्तेमाल दिल्ली के द्वारका स्थित फ्लैट खरीदने में हुआ.
पीके ने यह भी दावा किया कि इस फ्लैट की खरीद के दस्तावेज़ों में दिलीप जायसवाल बतौर गवाह दर्ज हैं, जिससे पूरे लेन-देन की मिलीभगत साफ होती है.
मेडिकल कॉलेज को मिली डीम्ड यूनिवर्सिटी की मान्यता
प्रशांत किशोर का आरोप है कि भाजपा नेता अपने ही दल के नेताओं से रिश्वत लेने में पीछे नहीं हैं. उन्होंने कहा, “किशनगंज स्थित दिलीप जायसवाल के एमजीएम मेडिकल कॉलेज को 2019 तक डिग्री देने का अधिकार नहीं था, तब वहां मधेपुरा यूनिवर्सिटी की डिग्री दी जाती थी. ऐसा प्रतीत होता है कि 25 लाख रुपये लेने के बाद उसी साल इस कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिला दिया गया, जिससे यह खुद डिग्री देने में सक्षम हो गया.”
एम्बुलेंस खरीद पर सवाल
पीके (PK) ने स्वास्थ्य विभाग की 1250 एम्बुलेंस खरीद में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि फोर्स मोटर्स के एम्बुलेंस का बाजार मूल्य करीब 21 लाख रुपये है, लेकिन बिहार सरकार ने इन्हें 28.47 लाख रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदा. टाटा मोटर्स को तकनीकी आधार पर टेंडर से बाहर कर दिया गया. शर्त रखी गई कि ड्राइवर केबिन में एसी नहीं होना चाहिए.
किशोर का आरोप है कि इस खरीद में करोड़ों रुपये का खेल हुआ और आयुष्मान भारत योजना के तहत सबसे ज्यादा वसूली दिलीप जायसवाल के मेडिकल कॉलेज के जरिए हुई. उन्होंने मांग की कि जल्द ही मुख्य सचिव बनने वाले स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत को इस महंगी खरीद पर सफाई देनी चाहिए.
एम्बुलेंस खरीद में गड़बड़ी के आरोप
प्रशांत किशोर ने फरवरी 2022 में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 1250 एम्बुलेंस खरीदने के टेंडर पर भी सवाल खड़े किए. उनके अनुसार, 466 टाइप-सी एम्बुलेंस की कीमत 19,58,257 रुपये प्रति यूनिट आंकी गई थी. टाटा मोटर्स और फोर्स मोटर्स, दोनों अधिकृत निर्माता हैं, लेकिन टाटा मोटर्स को तकनीकी आधार पर बाहर कर दिया गया.
तकनीकी शर्तों में कहा गया कि ड्राइवर केबिन में एसी नहीं होना चाहिए, जबकि यह मानक नहीं है. 22 अप्रैल 2025 को 28,47,580 रुपये प्रति यूनिट की दर से एम्बुलेंस खरीदी गई, जबकि फोर्स मोटर्स के एम्बुलेंस का बाजार मूल्य करीब 21 लाख रुपये है.
किशोर का आरोप है कि इस खरीद में भारी कीमत वसूली की गई और आयुष्मान भारत योजना के तहत सबसे ज्यादा ‘उगाही’ दिलीप जायसवाल के कॉलेज के जरिए हुई. उन्होंने मांग की कि स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव और जल्द ही बिहार के मुख्य सचिव बनने वाले प्रत्यय अमृत को बताना चाहिए कि आखिर इतनी महंगी दर पर एम्बुलेंस क्यों खरीदी गईं.
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