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एक आम महिला से विशेष बनीं राबड़ी देवी, समय-समय पर नीतीश सरकार पर करती रही हैं तीखे हमले
Authored By: सतीश झा
Published On: Tuesday, July 29, 2025
Last Updated On: Wednesday, July 30, 2025
लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की पत्नी राबड़ी देवी (Rabri Devi), जो राजनीति से दूर एक पारंपरिक घरेलू महिला थीं, अचानक मुख्यमंत्री (CM of Bihar) की कुर्सी पर आसीन हो गईं. यह फैसला उस समय हुआ, जब चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई और उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई. ऐसे में उन्होंने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए राबड़ी देवी (Rabri Devi) को बिहार की मुख्यमंत्री बनाया. इस निर्णय ने राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति को चौंका दिया.
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Wednesday, July 30, 2025
राबड़ी देवी (Rabri Devi) भले अब मुख्यमंत्री नहीं हैं, लेकिन वह राजद (RJD) की वरिष्ठ नेता के रूप में सक्रिय बनी हुई हैं. वह समय-समय पर नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) सरकार की नीतियों और कानून-व्यवस्था को लेकर तीखे हमले करती रही हैं. विशेषकर महिला सुरक्षा, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर वे सत्ता पक्ष को कठघरे में खड़ा करती रही हैं.
राजनीति में संघर्ष और स्थायित्व
शुरुआत में राबड़ी देवी (Rabri Devi) की आलोचना हुई—उनकी शिक्षा, प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक समझ पर सवाल उठे. लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को साबित किया. उन्होंने तीन बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी निभाई और राजद (RJD) की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया.
राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का अप्रत्याशित फैसला
राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाए जाने का निर्णय जितना चौंकाने वाला था, उतना ही विवादास्पद भी रहा. खुद राबड़ी देवी (Rabri Devi) ने कई बार यह स्वीकार किया है कि वे इस भूमिका के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थीं. वह राजनीति से दूर एक सामान्य गृहिणी थीं, जिनका जीवन रसोई और परिवार तक सीमित था. लेकिन लालू यादव (Lalu Yadav) की रणनीति ने उन्हें सत्ता के केंद्र में ला खड़ा किया.
कैसे राबड़ी देवी बनीं बिहार की मुख्यमंत्री
राबड़ी देवी का जन्म 1956 में बिहार के गोपालगंज जिले के एक सामान्य परिवार में हुआ था. 1973 में जब उन्होंने लालू प्रसाद यादव से विवाह किया, तब वे मात्र 17 वर्ष की थीं. सात बेटियों और दो बेटों की मां राबड़ी देवी ने कभी नहीं सोचा था कि वे एक दिन सत्ता की सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठेंगी. उनका पूरा जीवन एक घरेलू महिला की भूमिका में बीता था — परिवार, बच्चे और घर-गृहस्थी तक सीमित. लेकिन राजनीति की अप्रत्याशित करवट ने उन्हें सीधे मुख्यमंत्री पद तक दिया.
1997 में चारा घोटाले के आरोपों के चलते जब तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा, तब पार्टी में उथल-पुथल मच गई. पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह, रामचंद्र पूर्वे और अब्दुल बारी सिद्दीकी जैसे दिग्गजों को भी यह उम्मीद नहीं थी कि लालू राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करेंगे. लेकिन लालू ने एक रणनीतिक दांव खेला. उन्होंने सत्ता की बागडोर अपनी सबसे भरोसेमंद व्यक्ति — अपनी पत्नी — को सौंप दी. यह फैसला जितना चौंकाने वाला था, उतना ही राजनीतिक दृष्टि से प्रभावशाली भी साबित हुआ. राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाकर लालू ने सत्ता पर अप्रत्यक्ष पकड़ बनाए रखी और पार्टी के नियंत्रण से हाथ नहीं जाने दिया.
राजनीति में पहली पारी: सहजता से संघर्ष तक
राबड़ी देवी की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी किसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह एक राजनीतिक आवश्यकताओं की उपज थी. लालू प्रसाद यादव को यह अच्छी तरह एहसास था कि अगर किसी अन्य नेता को मुख्यमंत्री बनाया गया, तो पार्टी में नेतृत्व को लेकर बिखराव हो सकता है. ऐसे में उन्होंने अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बनाकर सत्ता पर परोक्ष नियंत्रण बनाए रखने की रणनीति अपनाई.
सियासी आलोचनाओं के बीच बनीं सशक्त नेता
शुरुआती दौर में राबड़ी देवी को ‘रबर स्टैंप’ मुख्यमंत्री कहा गया. प्रशासनिक अनुभव की कमी को लेकर आलोचना हुई, लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को साबित किया. उन्होंने लगातार तीन बार मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए विपक्ष के तीखे सवालों और प्रशासनिक दबावों का सामना किया.
एक प्रेरणास्रोत
राबड़ी देवी (Rabri Devi) का सफर आम महिलाओं के लिए एक मिसाल है—कि कैसे परिस्थितियों से लड़ते हुए कोई भी महिला नेतृत्व की भूमिका में आ सकती है. एक गृहिणी से मुख्यमंत्री (CM of Bihar) बनने का उनका यह सफर भारतीय लोकतंत्र में एक अनोखी कहानी बन गया है. राबड़ी देवी (Rabri Devi) आज भी राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं और अपनी स्पष्ट वाणी और अनुभव से RJD के जनाधार को मजबूत बनाए रखने में योगदान दे रही हैं.
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