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बिहार में छा रहा है तमिलनाडु का मुद्दा, चुनावी सियासत में गरमाहट
Authored By: सतीश झा
Published On: Thursday, August 28, 2025
Last Updated On: Thursday, August 28, 2025
बिहार की सियासत में इन दिनों एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है. आगामी विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election 2025) से पहले अब तमिलनाडु का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है. जन सुराज अभियान के नेता प्रशांत किशोर (PK) ने एमके स्टालिन (M K Stalin) की ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ के दौरान उन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब तमिलनाडु में “बिहार के बच्चों की हत्या” का कथित मामला सामने आया था, तब स्टालिन चुप क्यों थे और उन्होंने कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी.
Authored By: सतीश झा
Last Updated On: Thursday, August 28, 2025
Tamil Nadu Issue in Bihar Politics: PK का यह बयान न केवल एमके स्टालिन पर निशाना है, बल्कि कांग्रेस (Congress) और राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव पर भी सीधा हमला माना जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के बड़े नेता बिहार के सम्मान और यहां के लोगों के मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं, जबकि चुनाव नज़दीक आते ही अधिकार और न्याय की बात करने लगते हैं.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (M K Stalin) ने बिहार में कांग्रेस की ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ के तहत आयोजित रैली में भाजपा और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला. उन्होंने भीड़ को तमिल भाषा में संबोधित करते हुए कहा कि यदि चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए गए, तो एनडीए की हार निश्चित है. स्टालिन ने केंद्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “चुनाव आयोग को रिमोट कंट्रोल से चलने वाली कठपुतली बना दिया गया है. बिहार के लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाना लोकतंत्र के खिलाफ है.”
उनके भाषण का हिंदी में अनुवाद भी मंच से कराया गया. उन्होंने विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर भरोसा जताते हुए कहा, “INDIA ब्लॉक की पार्टियाँ लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट हैं. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की दोस्ती सिर्फ़ राजनीति तक सीमित नहीं है, यह दो भाइयों का रिश्ता है. यही रिश्ता उन्हें जीत दिलाएगा और हम सब लोकतंत्र को बचाने के लिए मिलकर लड़ रहे हैं.”
स्टालिन के इस बयान ने बिहार में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है. विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संघर्ष बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे चुनावी गठजोड़ की मजबूरी और जनता को गुमराह करने का प्रयास करार दे रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद विपक्षी एकजुटता को चुनौती दे सकता है, क्योंकि कांग्रेस और डीएमके (तमिलनाडु) के बीच गठबंधन संबंध पहले से मौजूद हैं. ऐसे में बिहार में तमिलनाडु का मुद्दा उठने से विपक्षी खेमे में असहज स्थिति बन सकती है. कुल मिलाकर, तमिलनाडु के कथित घटनाक्रम को लेकर उठे सवालों ने बिहार की चुनावी राजनीति को और गरमा दिया है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस और राजद इस आरोप का क्या जवाब देते हैं और क्या यह मुद्दा बिहार के मतदाताओं को प्रभावित कर पाएगा.
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी खेमे को मजबूती देने के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का बिहार आगमन राजनीतिक हलचल बढ़ा रहा है. दोनों नेताओं की मौजूदगी से न केवल विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि एनडीए पर हमले भी और तेज़ हो गए हैं.
स्टालिन ने मुजफ्फरपुर की रैली में भाजपा पर चुनाव आयोग को “कठपुतली” बनाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि अगर चुनाव निष्पक्ष हुए तो एनडीए की हार तय है. वहीं रेवंत रेड्डी ने बिहार की जनता को भरोसा दिलाया कि दक्षिण से लेकर उत्तर तक विपक्ष एकजुट है और भाजपा को हराने के लिए साथ खड़ा है.
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इन नेताओं का बिहार आना विपक्षी एकजुटता का संकेत है और इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि भाजपा के खिलाफ राष्ट्रव्यापी माहौल बनाया जा रहा है. हालांकि, भाजपा-जेडीयू का कहना है कि बाहरी नेताओं का आना बिहार की राजनीति पर कोई असर नहीं डालेगा और जनता केवल विकास और स्थिर नेतृत्व को वोट देगी.
कुल मिलाकर, स्टालिन और रेवंत रेड्डी की एंट्री ने बिहार के चुनावी संग्राम को और गरमा दिया है. अब देखना यह होगा कि क्या विपक्ष इस राष्ट्रीय एकजुटता को जमीनी समर्थन में बदल पाता है या सत्ता पक्ष अपने मजबूत संगठन और नेतृत्व के बल पर बढ़त बनाए रखेगा.
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