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Election Commission: चुनाव आयोग पर कोर्ट की फटकार: 2026 में कब-कब उठे सवाल?
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Saturday, September 26, 2026
Last Updated On: Saturday, September 26, 2026
Election Commission की कार्यशैली पर 2026 में अदालतों की कड़ी टिप्पणियां चर्चा में हैं. SIR से लेकर चुनाव चिह्न विवाद तक, जानिए कब-कब कोर्ट ने उठाए सवाल. पढ़ें पूरी खबर
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Saturday, September 26, 2026
Election Commission की कार्यशैली इन दिनों लगातार चर्चा में है. SIR यानी Special Intensive Revision से लेकर चुनाव चिह्न आवंटन तक कई मामलों में अदालतों की टिप्पणियों ने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े किए हैं. 2026 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पश्चिम बंगाल और दिल्ली SIR (Delhi SIR) से जुड़े मामलों में प्रक्रिया को लेकर अहम सवाल उठाए. वहीं, कलकत्ता हाई कोर्ट ने ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न के आवंटन को लेकर चुनाव आयोग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई. आखिर इन मामलों में कोर्ट ने क्या कहा और कब-कब चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठे? पूरी रिपोर्ट में जानिए.
चुनाव आयोग(Election Commission) की कार्यशैली आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है. कभी एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर केंद्रीय चुनाव आयोग की मनमानी पर विपक्षी दलों के कड़े तेवर की बात हो या राजनीतिक दलों को चुनाव चिह्न देने की बात, कई बार चुनाव आयोग सवालों के घेरे में आया है. क्या है पूरा मामला और कब-कब अदालत ने चुनाव आयोग के कामकाज से जताई नाराजगी, देखते हैं इस रिपोर्ट में.
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पिछले दिनों ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) से वापस लेकर डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को आवंटित करने पर चुनाव आयोग को फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि आयोग को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए.
एक चुनाव चिह्न दोबारा आवंटित करने पर चुनाव आयोग को फटकार लगाई
कोर्ट ने कहा कि आयोग के पास 183 मुक्त चुनाव चिह्न हैं. इसके बावजूद नंदीग्राम उपचुनाव में एक नई पार्टी को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न देने की क्या वजह थी, जबकि आईएसएफ ने भी वहां अपना उम्मीदवार उतारा है. अदालत ने कहा कि इस चुनाव चिह्न को सुरक्षित रखा जाना चाहिए था.
इस वर्ष 2026 में चुनाव आयोग को अदालत की फटकार कब-कब लगी
अदालत के आदेशों में अलग-अलग शब्द जैसे trust deficit, mechanical notices, explanation sought आदि इस्तेमाल हुए हैं.
उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड और ताजा रिपोटरे के आधार पर 2026 में अब तक कम-से-कम दो प्रमुख मौकों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल/कड़ी टिप्पणी की है.
1. 20 फरवरी 2026 -पश्चिम बंगाल
मामला: मतदाता सूची का एसआईआर
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पश्चिम बंगाल(West Bengal) सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहे विवाद को “trust deficit” यानी विश्वास की कमी बताया. कोर्ट ने कहा कि स्थिति ऐसी हो गई है कि -एसआईआर में दावों और आपत्तियों की जांच के लिए सेवारत और पूर्व न्यायिक अधिकारियों को लगाया जाना जरूरी हो गया.
यह आदेश इसलिए महत्त्वपूर्ण था क्योंकि सामान्यत: मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकारियों के माध्यम से चलती है, लेकिन इस मामले में कोर्ट ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक अधिकारियों को प्रक्रिया में शामिल करने का असाधारण कदम उठाया.
2. 22 सितंबर 2026 – दिल्ली एसआईआर
मामला ‘Logical Discrepancy के नाम पर मतदाताओं को भेजे गए नोटिस से जुड़ा है
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा था कि दिल्ली में मतदाताओं को भेजे जा रहे नोटिस “almost mechanically” क्यों जारी किए जा रहे हैं. कोर्ट ने आयोग से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि ‘logical discrepancy’ निर्धारित करने का आधार क्या है और क्या नोटिस पाने वाले मतदाताओं को यह पर्याप्त रूप से बताया जा रहा है कि उन्हें किस कमी/विसंगति का जवाब देना है.
कोर्ट ने आयोग से यह भी देखने को कहा कि नोटिस जारी करने से पहले अतिरिक्त फिल्टर/सुरक्षा उपाय अपनाए जाने चाहिए या नहीं.
एक महत्वपूर्ण अंतर
2 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल में एसआईआर ड्यूटी कर रहे न्यायिक अधिकारियों को घेरने और उन पर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ी नाराजगी जताई थी. हालांकि उस मामले में अदालत की मुख्य आलोचना पश्चिम बंगाल के प्रशासन और पुलिस व्यवस्था को लेकर थी, सीधे चुनाव आयोग को फटकारने को इसे गिनना सही नहीं होगा. कोर्ट ने केंद्रीय चुनाव आयोग को केंद्रीय बलों की मांग करने का निर्देश जरूर दिया था.
इसी तरह अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल एसआईआर से जुड़े अपील मामलों का विस्तृत आंकड़ा चुनाव आयोग से मांगा था, लेकिन इसे सीधे ‘फटकार’ कहना उचित नहीं होगा.
2026 में एसआईआर पर अदालत की कड़ी टिप्पणियां
- 20 फरवरी: पश्चिम बंगाल एसआईआर (SIR) में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच “trust deficit” का जिक्र किया और दावों-आपत्तियों की जांच में न्यायिक अधिकारियों को लगाने का असाधारण निर्देश दिया.
- 22 सितंबर: दिल्ली एसआईआर(SIR) में सुप्रीम कोर्ट ने logical discrepancy’ के नोटिसों को “almost mechanically” जारी किए जाने पर सवाल उठाया और आयोग से प्रक्रिया स्पष्ट करने को कहा.
- कुल मिलाकर कह सकते हैं कि 2026 में अब तक कम-से-कम दो प्रमुख मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताई या सवाल उठाए हैं.
Written By: Rajiv Mandal
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