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तेजस हादसे के बाद उठे बड़े सवाल, क्या खतरे में पड़ेगी डील? जानें डिफेंस एक्सपोर्ट को कितना झटका
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, November 24, 2025
Last Updated On: Monday, November 24, 2025
दुबई एयर शो में भारत के गर्व, "तेजस फाइटर जेट" का दुर्घटनाग्रस्त होना सिर्फ एक हादसा नहीं था… यह उस समय हुआ जब भारत दुनिया को यह बताने की तैयारी में था कि अब हम केवल खरीददार नहीं, बल्कि हथियार निर्यात करने वाले बड़े खिलाड़ी बन चुके हैं. हजारों लोगों के सामने हुए इस हादसे ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया- क्या अब तेजस की विदेशी डील खतरे में पड़ेगी? क्या भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट पर इसका असर पड़ेगा?
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, November 24, 2025
Tejas Export Deal Crisis: दुबई एयर शो में भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस दुनिया के सामने अपनी क्षमता दिखाने ही वाला था, लेकिन अचानक हुए क्रैश ने पूरे माहौल को बदल दिया. इस हादसे ने केवल प्रदर्शन को नहीं रोका, बल्कि भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट मॉडल और वैश्विक भरोसे पर भी सवाल खड़े कर दिए. जिस तेजस को भारत अपनी तकनीकी पहचान और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण का प्रमाण बताकर बेचने की कोशिश कर रहा था, अब उसी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा हो रही है. सवाल सीधा है- क्या यह हादसा सिर्फ तकनीकी गलती है या फिर तेजस की विदेशी डील अब खतरे में पड़ चुकी है?
तेजस: गौरव से सवालों तक का सफर
तेजस का सफर कभी आसान नहीं रहा. इसे तैयार करने में तीन दशकों से ज्यादा समय लगा और इसके विकास के दौरान कई तकनीकी अड़चनें सामने आईं. इसके बावजूद तेजस ने भारतीय वायुसेना में अपनी जगह बनाई और इसे आधुनिक एवियोनिक्स, हथियार क्षमता और कम मेंटेनेंस कॉस्ट की वजह से हल्के लड़ाकू विमानों की कैटेगरी में मजबूत विकल्प माना गया. भारतीय वायुसेना ने इसके 180 से ज्यादा उन्नत संस्करणों का ऑर्डर दिया है. लेकिन दुबई एयर शो में हजारों लोगों के सामने इसका गिरना एक ऐसी घटना थी जिसने इसकी छवि को गंभीर चोट पहुंचाई है.
विदेशी खरीदार और डील पर मंडराता खतरा
भारत कई देशों को तेजस बेचने की योजना पर काम कर रहा था और बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी. मिस्र, आर्मेनिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों ने तेजस में दिलचस्पी दिखाई थी क्योंकि इसकी कीमत पश्चिमी लड़ाकू विमानों की तुलना में काफी कम है और भारत तकनीक साझा करने तथा हथियार विकल्प कस्टमाइज करने की भी पेशकश कर रहा था. लेकिन अब हादसे के बाद इन देशों के सैन्य विशेषज्ञ, सलाहकार और रक्षा मंत्रालय “सेफ्टी रिपोर्ट” पर सवाल उठा रहे हैं. खरीद प्रक्रिया धीमी हो सकती है और नए तकनीकी प्रमाण तथा अपग्रेडेड रिपोर्ट की मांग की जा सकती है. यह स्थिति भारत के लिए चुनौती बन चुकी है.
भारत का बढ़ता रक्षा निर्यात और नया मोड़
पिछले कुछ सालों में भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है. कभी जो भारत केवल रक्षा उपकरणों का खरीदार था, अब दुनिया उसे एक उभरती रक्षा शक्ति के रूप में देखने लगी है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रुपये पार कर चुका है और सरकार 2029 तक इसे 50,000 करोड़ रुपये सालाना तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती है. गोला-बारूद, मिसाइल, ड्रोन, बख्तरबंद वाहन और रक्षा तकनीक जैसे उपकरणों में भारत तेजी से वैश्विक बाजार बना रहा है. लेकिन इस हादसे ने उस सकारात्मक छवि पर धूल जमा दी है जिस पर भारत लंबे समय से मेहनत कर रहा था.
हादसे का असर: भरोसा, टेक्नोलॉजी और बाज़ार
ऐसे हादसे केवल मशीन का नहीं बल्कि ब्रांड का नुकसान करते हैं. रक्षा सौदों की दुनिया विश्वास और विश्वसनीयता पर चलती है और अब तेजस की विश्वसनीयता पर सवाल उठ चुके हैं. भारतीय वायुसेना ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं और प्रारंभिक रिपोर्ट आने तक किसी भी स्तर पर टेक्निकल सुधार या अपग्रेड की घोषणा होने की संभावना है. अगर भारत इस जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाकर तकनीकी मजबूती साबित करने में सफल होता है, तो स्थिति दोबारा सुधर सकती है. लेकिन अभी यह साफ है कि विदेशी डील, खासकर पहली बार खरीद की सोच रखने वाले देशों में, धीमी हो गई है.
रुकावट, और मौका दोनों साथ
तेजस का क्रैश भारत के लिए सदमे जैसा है, लेकिन यह अंत नहीं है. कई देशों की रक्षा परियोजनाओं में ऐसे हादसे होते रहे हैं और बाद में वही तकनीक सफल हुई है. भारत के सामने अब सबसे बड़ा काम है- विश्वास दोबारा जीतना. अगर सरकार जांच के नतीजों के बाद तेजस में तकनीकी सुधार करती है और इसे और मजबूत बनाती है, तो यह घटना भविष्य में सकारात्मक मोड़ भी ला सकती है.
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